सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/८१

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।
४९
ब्रिटिश संघ: एक सुझाव

अधिकारियों द्वारा अनेक सुधार करवाये। इस प्रकारके परिश्रमके फलस्वरूप कैदियोंकी स्थिति बहुत सुधर गई। किन्तु उनके लेखे यह पर्याप्त नहीं था। उन दिनों कैदियोंको आस्ट्रेलिया भेजा जाता था। जहाजमें उनको बड़ा कष्ट दिया जाता था। स्त्री कैदियोंकी आबरू भी न रह पाती थी। एलिजाबेथने देखा कि अपने किये कराये सारे कामपर इन कैदियोंको ले जाने में पानी फिर जाता है। इस कष्टको मिटाने के लिए वे स्वयं बड़ी मुसीबतें झेल कर जहाजोंपर आया-जाया करती थीं। अन्तमें उन्होंने जहाज-यात्राके कष्टोंको भी दूर कराया। फिर आस्ट्रेलियामें कैदियोंको जो कष्ट होता था उसमें भी सुधार करवाया और अन्तमें कानून बना कि आस्ट्रेलियामें पहुँचनेपर छ: महीने तक तालीम देने के बाद कैदियोंको दूसरोंकी नौकरी में सौंप दिया जाये। इस प्रकार दुःखियोंके दुःखमें बहुत भाग लेनेवाली यह भली महिला अपना दुःख भूलकर ईश्वरका भजन करती हुई परलोक सिधारी।

[गुजरातीसे]
इंडियन ओपिनियन, १९-८-१९०५

६६. ब्रिटिश संघ' : एक सुझाव

दक्षिण आफ्रिकाको अपनी भूमिपर प्रतिष्ठित वैज्ञानिकोंके इस संघका स्वागत करनेका अभूतपूर्व सम्मान प्राप्त हुआ है। ब्रिटिश विज्ञान-प्रगति संघ (ब्रिटिश असोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ साइन्स) एक ऐसी संस्था है जिसपर साम्राज्य गर्व कर सकता है। दक्षिण आफ्रिकी संव (साउथ आफ्रिकन असोसिएशन) ने अपनी सहधर्मी संस्थाको इस देश में बुलानेका विचार किया, यह खुशीकी बात है। इसके परिणाम दूरगामी हो सकते हैं। इससे संघका मुख्य उद्देश्य यानी विज्ञानका प्रचार- तो सिद्ध होगा ही, उसमें भी एक बड़ा लाभ यह होगा कि ब्रिटेन, दक्षिण आफ्रिका और अन्य उपनिवेश एक-दूसरेके निकट आ जायेंगे। यह तीसरा अवसर है कि संघकी बैठक ब्रिटिश द्वीप-समूहके बाहर हो रही है। ऐसी यात्राओंके महत्त्व तथा, जिस सहृदयतासे सदस्योंका स्वागत किया गया है, उसे देखते हुए यह नहीं लगता कि यह क्रम अब टूटेगा। हम उस दिनको प्रतीक्षामें है जब यह बैठक भारतमें होगी। हमें विश्वास है कि ऐसी बैठकसे न केवल भारतका हित होगा, बल्कि संघको भी लाभ होगा।

हमें एक नम्र सुझाव रखना है। हमने कहा है कि बाहरके देशोंको ऐसी यात्राएँ साम्राज्यके दूर-दूर तक फैले हुए उपनिवेशोंको जोड़ने में बहुत सहायक होंगी। और इसलिए कि संवको सर्वत्र उसके वास्तविक रूपमें मान्य किया जाये, अर्थात् यह कि संघ साम्राज्यकी एक बड़ोसे-बड़ी संपत्ति है, हम चाहेंगे कि उसका वर्तमान नाम बदल कर 'ब्रिटिश साम्राज्य विज्ञान प्रगति संघ' कर दिया जाये।

[अंग्रेजीसे]
इंडियन ओपिनियन, २६-८-१९०५


१.१८३१ में स्थापित ।

४-५