पृष्ठ:सरदार पूर्णसिंह अध्यापक के निबन्ध.djvu/१५०

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अमेरिका का मस्त जोगी वाल्ट हिटमैन- ( Walt Whitman) अमेरिका के लम्बे लम्बे हरे देवदारों के घने वन में वह कौन फिर रहा है ? कभी यहाँ टहलता है कभी वहाँ गाता है । एक लम्बा, ऊँचा, वृद्ध-युवक, मिट्टी-गारे से लिप्त, मोटे वस्त्र का पतलून और कोट पहने, नङ्गे सिर, नङ्गे पाँव और नङ्गे हो दिल अपनी तिनकों की टोपी मस्ती में उछालता, झूमता जा रहा है । मौज श्रांती है तो घास पर लेट जाता है । कभी नाचता, कभी चीखता और कभी भागता है। मार्ग में पशुओं को हरे तृण का भोज उड़ाते देख आनन्द में मग्न हो जाता है। आकाश-गामी पक्षियों के उड़ान को देख हर्ष में प्रफुल्लित हो जाता है। जब कभी उसे परोपकार की सूझती है तब वह गोल गोल श्वेत शिवशङ्करों को उठा उठा कर नदी की तरङ्गों पर बरसाता है। आज इस वृक्ष के नीचे विश्राम करता है, कल उसके नीचे बैठता है। जीवन के अरण्य में वह धूप और छाँह की तरह बिचरता चला जाता है । कभी चलते चलते अकस्मात् ठहर जाता है, मानो कोई बात याद आ गई । बार बार गर्दन फेर फेर और नेत्र उठा उठा कर वह सूर्य को ताकता है । सूर्य की सुनहली सोहनी रोशनी पर वह मरता है। समीर की मन्द मन्द गति के साथ वह नृत्य करता है, मानो सहस्रों वीणायें और सितार उसको पवन के प्रवाह में सुनाई देते हैं । इस प्राकृतिक राग की आँधी के सामने मानुषिक राग, दिनकर के प्रकाश में टिमटिमाती हुई दीप-शिखा के समान तेजोहीन प्रतीत होते हैं । उसके भीतर बाहर कुछ ऐसी असाधारण मधुरता भरी है कि चञ्चरीक के समूह के समूह उसके साथ साथ लगे फिरते हैं। उसके हृदयका सहस्रदल ब्रह्म-कमल ऐसा खिला है कि सूर्य और चन्द्र भ्रमरवत् उस विकसित कमल के मधु का स्वाद लेने को जाते हैं । बारी बारी से वे उसमें मस्त होकर बन्द होते हैं और प्रकाश पाकर पुनः बाहर आते हैं। १५०