पृष्ठ:सरदार पूर्णसिंह अध्यापक के निबन्ध.djvu/१६०

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जो ईश्वर का रूप दर्शन करना होता है तो मैं तुमको देखता हूँ और जो तुमको देखता हूं तो उस देखने में ईश्वर की दर्शन होने लगता है कर्मों कि तुम्हारी छवि में ईश्वर का सही रूप दिखाई पड़ता है। मयस्सर- प्राप्त होना। नभोलालिमा-सूर्योंदय के पहले उषा:काल की लाली। समष्टि-रुप-सामूहिक सम्पत्ति या सत्ता । व्यष्टिरुप-अलग-अलग होने का भाव। मौरुसी-बखप-दादों को छोड़ी हुई परम्परागत जायदाद। अनृत्त:-वास्त्व में। ______ अमेरिका के मसरत जोगी वाल्टहिवटमैन शिवशंकर-भगवान् शंकर की मूर्ति के समान गोल-गोल पत्थर।चंचरीक-भ्रमर। भ्रमरवत्-भौंरेके समान ढिलिया-मिट्टी की बनी हुई मटकी। शाहदौला-बादशाह। पोरियाँ-बाँस आदि के दो गाँठोंके बीच का भाग कलदार