पृष्ठ:सेवासदन.djvu/२१९

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ जाँच लिया गया।
२५० सेवासदन


तौल की पदवी मिलेगी और शूद्र है तब तो आप बने बनाये चाण्डाल हैं ही। आप अगर गाने से प्रेम रखते हैं तो आप दुराचारी है, आप सत्संगी है तो आपको तुरन्त ‘बछिया के ताऊ' की उपाधि मिल जायगी। यहाँ तक कि आापकी माता और स्त्रीपर भी निन्दास्पद आक्षेप किये जायेंगे। हमारे यहाँ मतभेद महापाप है और उसका कोई प्रायश्चित्त नहीं। अहा!वह देखिये, डाक्टर श्यामाचरण की मोटर आ गयी।

डाक्टर श्यामाचरण मोटर से उतरे और उपस्थित सज्जनों की ओर देखते हुए बोले, I am sorry. I was late.

कुंवर साहब ने उनका स्वागत किया। औरों ने भी हाथ मिलाया और डाक्टरसाहब एक कुर्सीपर बैठकर बोले-When is the performance going to begin!

कुंवर-डाक्टर साहब, आप भूलते है, यह काले आदमियों का समाज हैं।

डाक्टर साहब ने हँसकर कहा, मुआफ कीजियेगा, मुझे याद न रहा कि आपके यहाँ म्लेच्छों की भाषा बोलना मना है।

कुंवर—लेकिन देवताओं के समाज में तो आप कभी ऐसी भूल नहीं करते।

डाक्टर--तो महाराज उसका कुछ प्रायश्चित करा लीजिये।

कुंवर—इसका प्रायश्चित्त यही है कि आप मित्रोसे अपनी मातृभाषा- का व्यवहार किया कीजिये।

डाक्टर-आप राजा लोग हैं, आपसे यह प्रण निभ सकता है हमसे इसका पालन क्योंकर हो सकता है? अंग्रेजी तो हमारी Lingua Franca (सार्वदेशिक भाषा) हो रही है।

कुंवर-- उसे आपही लोगों ने तो यह गौरव प्रदान कर रखा है। फारस औोर काबुल के मूर्ख सिपाहियों और हिन्दू व्यापारियों के समागम से उर्दू जैसी भाषा का प्रादुर्भाव हो गया। अगर हमारे देश के भिन्न- भिन्न प्रांतों के विद्वज्जन परस्पर अपनी ही भाषा में सम्भाषण करते