पृष्ठ:सेवासदन.djvu/२७६

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सेवासदन ३२३


महबूब जान एक धनसम्पन्न वेश्या थी। उसने अपना सर्वस्व अनाथालयके लिये दान कर दिया था। सन्ध्या समय सब वेश्याएँ उसके मकान पर एकत्रित हुई, वहाँ एक महती सभा हुई । शाहजादी ने कहा,बहनों,आज हमारी जिंदगी का एक नया दौर शुरू होता है। खुदाताला हमारे इरादे में बरकत दे और हमे नेक रास्तेपर ले जाय। हमने बहुत दिन वे-शर्मा और जिल्लतकी जिन्दगी बसर की, बहुत दिन शैतान की कदमे रही। बहुत दिनोंतक अपनी रूह (आत्मा) और ईमानका खून किया और बहुत दिनों तक मस्ती और ऐश परस्तीमे भूली रही। इस दालमण्डी की जमीन हमारे गुनाहोसे सियाह हो रही है। आज खुदाबंद करीमने हमारी हालत पर रहम करके कदगुनाहसे निजात् (मुक्ति) दी है, इसके लिये हमे उसका शुक करना चाहिये। इसमें शक नही, कि हमारी कुछ बहनों को यहॉ से जलावतन होने का कलंक होता होगा, और इसमें भी शक नही है कि उन्हें आनेवाले दिन तारीक नजर आते होंगे। उन बहनोसे मेरा यही इल्तमास है कि खुदाने रिज्क (जीविका) का दरवाजा किसीपर बन्द नहीं किया है। आपके पास वह हुनर है कि उसके कदरदाँ हमेशा रहेगें। लेकिन अगर हमको आइन्दा तकलीफें भी हों तो हमको साबिर व शाकिर (शान्त) रहना चाहिये। हमे आइन्दा जितनी ही तकलीफें होगी उतना ही हमारे गुनाहों का बोझ हलका होगा। मैं फिर खुदासे दुआ करती हैं कि वह हमारे दिलों को अपनी रौशनी से रौशन करे और हमें राहे नेकपर लानेकी तौफीक (सामर्थ) दे।

रामभोली बाई बोली, हमे पण्डित पद्मसिंह शर्मा को हृदय से धन्यबाद देना चाहिये, जिन्होंने हमको धर्म मार्ग दिखाया है। उन्हे परमात्मा सद सुखी रखे।

जहराजान बोलो, मैं अपनी बहनों से यही कहना चाहती हूं कि वह आइन्दा से हलाल हराम का ख्याल रखें। गाना बजाना हमारे लिये हलाल है। इसी हुनर में कमाल हासिल करो। बदकार रईसों की शुरूवत (कासातुरता) का खिलौना बनना छोड़ना चाहिये। बहुत दिनों तक