पृष्ठ:स्टालिन.djvu/३०

विकिस्रोत से
नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

99 उन्तोस] [ *** दिखलाने का प्रयत्ल किया है। "हमें चाहिये कि निहलिम्टों की भांति व्यक्तियों के विरुद्ध व्यक्तिगत असंगठित हमले न करें। हम कार्ल मार्क्स के अनुयायी हैं और हमारी इच्छा है कि मजदूरों और किसानों को संगठन की लड़ी में पिरोया जावे। हम उनमें जाप्रति पैदा कर उन पर यह प्रगट करना चाहते हैं कि वास्तव में उनका जीवन कितना दासतापूर्ण है ?.. .यही वह मार्ग है जिस पर हमें भविष्य में चलना चाहिये और उस पर चलते हुए आतंक- प्रसारक व्यक्तिगत घटनाओं से तटस्थ रहना चाहिये। यह पहला ही अवसर था कि जोजफ ने विद्यार्थियों की सभा में भाग लिया । तथ्य यह है कि उसने उसी दिन से उस जीवन से मुंह फेर लिया जिसको वह गत चार वर्ष से व्यतीत कर रहा था। उसे नए आन्दोलन के साथ कुछ २ सहानुभूति होने लगी और वह प्रसन्नतापूर्वक उस आन्दोलन को प्रत्येक बात जानने का प्रयत्न करता था। अब वह केवत्त क्रांतिकारी साहित्य पढ़ता । पाठशाला के नियमानुसार वह दिन में साधारण संसारिक साहित्य नहीं पढ़ सकता था। अत: रात में वह एक धुंधले दीपक के प्रकाश में इस नवीन साहित्य को पढ़ता था। एक दिन जब वह व्याख्यान सुनने गया और इसका ज्ञान उसके प्रोफेसरों को हुआ तो वह बड़े आश्चर्यान्वित हुए कि उनके साधु विद्यार्थी में भी यह परिवर्तन क्योंकर हुआ ? जोजक को धीरे २ इस आंदोलन से इतनी गहरी दिल- चस्पी हो गई कि वह उसकी प्रत्येक बात का ज्ञान रखने केलिये उत्सुक रहने लगा। इस आंदोलन के विषय में जो भी पुस्तक उसके हाथ में आती वह सब को पढ़ डालता । अब पाठशाला, अध्यापक मंडल, अपनी शिक्षा और अपने जीवन के कार्य क्रम सभी के