पृष्ठ:स्टालिन.djvu/३६

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[पंचीस

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में सर्वप्रिय बन गया। वह गर्जस्तान प्रान्त में पैदा हुमा था। अतः वह उस स्थान को भाषा, अपितु उस भाषा की विमिन उपभाषाओं से भी भली भान्ति परिचित था। उसके माता पिता पहले किसान थे और बाद में मजदूर बन गए । उसने स्वयं एक धार्मिक शिक्षण संस्था में शिक्षा प्राप्त की थी। इसके अतिरिक उसके मुख से निकले हुए प्रत्येक शब्द में एक चमत्कार सा पाया जाता था। उसके स्वभाव में धर्म के प्रति इतनी प्रगाढ़ और अन्ध श्रद्धा विद्यमान थी कि यह जानना कठिन न था कि वह इस आन्दोलन के नेतामों में एक अच्छा कार्य कर्ता सिद्ध होगा। यह घटना १८६७ ई० की है और सच पूछा जावे वो स्टालिन 'भविष्य के स्टालिन के जीवन का काया-कल्प होना यहीं से प्रारम्भ हुआ और इसी स्थान से उसके क्रान्तिकारी जीवन का प्रारम्भ हुआ। तीस वर्ष पश्चात् १९२७ ई० में जब स्टालिन प्रशान्त रूस का सचाधारी सर्वाधिकारी बना तो उसने तफलस में एक व्याख्यान देते हुए अपने जीवन की प्रारम्भिक अवस्था पर इस प्रकार प्रकाश डाला- "मुझे वह समय याद है जब मेरी सेवाओं का प्रारम्भ था और तफलस के मजदूरों ने सर्वप्रथम मेरे तुच्छ व्यक्तित्व पर विश्वास कर मुझे प्रोत्साहन दिया था। यद्यपि यह ३० वर्षे पूर्व की बात है, परन्तु मैं उसे भूला नहीं हूँ। मैंने कामरेड स्टोवन की बैठक में क्रियात्मक कार्य का पहला पाठ कैसे पढ़ा था, यह मुझे अब भी याद है। उस अवसर पर कई महान क्रान्तिकारी भी उपस्थित थे-जी ब्लेज,डरक वली, शक्नेष भादि । उनके मुकाबले में एक तुच्छ नौसिखिया था और उस समय मेरा कोई महत्व नहीं था। सम्भव है मुझे उनकी अपेक्षा क्रान्तिकारी