पृष्ठ:स्टालिन.djvu/४०

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उन्तालीस] [ *** जा सकते हैं। अत: वह टोनी की मात्रा का पालन करने के लिये विवश हो जाता था। जब परिस्थिति अत्यन्त विकट होगई और व्यापारी अधिक भयभीत रहने लगे तो उन्होंने इस प्रणाली के विरुद्ध पुलिस से सहायता मांगी। किन्तु पुलिस की सहायता व्यर्थ प्रमाणित हुई। यदि कोई व्यापारी साहस करके दुकान खोल लेवा तो इस भांति की घटना घटती कि कोई अज्ञात खरीदार कोई वस्तु मोल लेने के बहाने से दुकान के अन्दर जाता और अब- सर पाकर तेल या अन्य ऐसी ही कोई वस्तु उसके बढ़िया मान पर गिरा कर उसकी अपार हानि कर डालता। जब आन्दोलन ने प्रबल रूप धारण कर लिया तो कासिक सवार बुलाये गए। उनके आक्रमणों से बहुत से आदमी मारे गये नथा असंख्य जख्मी हुए । किन्तु कार्य कर्ताओं की धीरता में कोई अन्तर न पाया। दूकानदारों को शीघ्र ही अनुभव हो गया कि किसी अज्ञात शत्रु से युद्ध जारी रखना उनके लिए कियात्मक रूप में असम्भव है । शनै: २ परिस्थिति इतनी बिगढ़ गई कि उस अन्धियारे बाजार में एक भी दूकान ऐसी दृष्टिगोचर न हुई जिसको खोल कर सामान बेचा जा सकता। हड़ताल ने अपूर्व सफलता प्राप्त की, किन्तु सोसो अंतिम समझौते में भाग न ले सका। पुलिस ने उसके कुछ प्रातकपूर्ण कार्यों के कारण उसके विरुद्ध गिरफ्तारी के वारंट जारी कर दिये। उसके कारागार में पदार्पण करते ही समाजवादी श्रेणी में अशान्ति छा गई। किन्तु इस वारन्ट जारी होने ने उसे पार्टी का वास्तविक सदस्य बना दिया। अभी तक उसे पुराने कार्यकर्ताओं के समान जेल जाने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ था। अब वह त्रुटि भी पूरी होगई और से भी जेल-यात्रा का सौभाग्य प्राप्त हो गया।