पृष्ठ:स्टालिन.djvu/५४

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तरेपन] [ *** सब घड़ाके क्रमश: थोड़े ही समय में हुए । एक बम के बाद दूसरा बम फटने में जो समय लगता उसमें बन्दूकों और पिस्तौलों के चलने की आवाजें भी सुनाई देती थीं। टूटे हुए कांच के टुकड़े और ऐसी ही दूसरो वस्तुएं बड़े परिमाण में फैली हुई पाई गई। पुलिस शीघ्र ही घटना स्थल पर पहुंच गई।" दूसरी रिपोर्ट निम्न निखित है-- "पुलिस ने बड़ी खोज के पश्चात मालूम किया है कि आक्रमणकारियों की इच्छा एक गाड़ी लूटने की थी, जिस पर सरकारी कोष था। आक्रमणकारी ३४१००० रुबल उड़ा ले जाने में सफल भी हो गए।" यह एक पर्याप्त बड़ी राशि थी। किन्तु लेनिन की पार्टी को कार्य सञ्चालन के लिये इससे भी अधिक धन का आवश्यकता थी । समाचार पत्र और पत्रिकाएं छापने और पार्टी के सदस्यों के विभिन्न स्थानों में भ्रमण करने पर अगणित रुपया व्यय होता था कान्तिकारी लोग यह भली प्रकार समझतेथे कि रूस की कई करोड़ की जनसंख्या में जाप्रति उत्पन्न करने के लिये लाखों ही नहीं वरन् करोड़ों रुपये की जरूरत है। रूस की सारी पुलिस हद क्रान्तिकारी ड्यूड को तलाश करती फिर रही थी, जिसके साहस और निर्भयता को यह दशा थी कि वह दिन दहाड़े नगर के मध्य में सरकारो कोष लूट कर ले जाने में सफल हो गया। उन्होंने उसे पाने के लिये देश का कोना २ छान मारा। उसकी खोज में कोई प्रयत्ल बाको न छोड़ा। किन्तु ईश्वर जाने, ड्यूड पृथ्वी में समा गया या उसे आकाश निगल गया। वह उसका कहीं भी पता न पा सके। इस बात का कई वर्ष पश्चात् पता लगा कि स्टालिन ने अपने-युद्ध-संघर्षमय जीवन में जो बहुत से कल्पित नाम धारण