पृष्ठ:हिंदी शब्दसागर भाग ५.pdf/५८६

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रउरे २८७७ रडरे-सर्व० [हिं० राव, रावल ] मध्यम पुरुष के लिए आदर वाला। हलवाई। (२) रकाबियों में खाना घुनने और सूचक शब्द । आप। जनाब । उ०-विन सहित परिवार लगानेवाला । खानसामाँ (३) बादशाहों के साथ खाना गोसाई । करहिं छोह सब रउरिहि नाई।—तुलसी । लेकर चलनेवाला सेवक । खासाबरदार । (४) रकाव पका रऐयत-संशा स्त्री० [अ०] प्रजा । रिमाया। कर घोड़े पर सवार करानेवाला नौकर । साईस । रफछो-संज्ञा पुं० [हिं. रिकवच ] पत्तों की पकौड़ी। पतौर। | रकाबा-संज्ञा पुं० [फा ] बड़ी थाली । परात । तश्त । उ.-पान कतरि छौंके रकछही डारि मिर्च औ आदि। | रकाबी-संशा स्त्री० [ फा ] एक प्रकार की छिछली छोटी थाली, एक खंड जी खावै पा सहस सवादि।--जायसी । जिसकी दीवार बहुत कम ऊँची अथवा बाहर की और मुरी रकत*-संशा पुं० [सं० रक्त ] लहू । खून । रुधिर । हुई होती है । तश्तरी। वि. लाल । सुर्ख। रकार-संशा पुं० [सं०] र वर्ण का बोधक अक्षर र । रकतकंद-संशा पुं० [सं० रक्तकंद ] (1) मूंगा । प्रवाल । विद्युम । | रकीक-वि० [अ० ] (1) पानी की तरह पत्तला । तरल । द्रव । (हिं.) (२) राजपलाडु । रक्तालु । रतालू । (२) कोमल । मुलायम । नरम । रकतांक-संज्ञा पुं० [सं० रक्ताङ्ग ] (8) विद्रुम । प्रवाल। रकीब-संज्ञा पुं० [अ०] वह प्रतियोगी जो किसी प्रेमिका के प्रेम मूंगा । (डि.) (२) कुंकुम । केसर । (३) रकचंदन। । ___ के संबंध में प्रतियोग करता हो । प्रेमिका का दूसरा प्रेमी। लाल चंदन। सपन। रकया-संशा पुं० [अ०] वह गुणन-फल जो किमी क्षेत्र ! रकेवी-संशा स्री० दे० "रकाबी"। की लंबाई और चौड़ाई को गुणा करने से प्राप्त हो। रक्खना-कि० स० दे० "रखना"। क्षेत्रफल। | रक्त-संज्ञा पुं० [सं०] (१) वह प्रसिद्ध तरल पदार्थ जो प्रायः रकबाहा-संज्ञा पुं० [देश॰] घोड़ों का एक भेद । उ०-फर रक __ लाल रंग का होता और शरीर की नसों आदि में से होकर बाहे किलबाकी कुही काबिल के, खुरासानी खंजरीट खंजन। बहा करता है। लहू । रुधिर । खून । खलक के।-सूदन। विशेष साधारणतः रक्त से ही हमारे शरीर का पोषण और रकमंजनी-संज्ञा स्त्री० [सं० रुक्म ] एक प्रकार का पौधा । रक्षण होता है। यह हृदय द्वारा परिचालित होता और रकम-संज्ञा स्त्री० [अ०] (1) लिखने की क्रिया या भाव । (२)' सदा सारे शरीर में चक्कर लगाया करता है। शरीर के अंगों छाप । मोहर। (३) रुपया या बीघा-बिस्वा आदि लिखने में पोषक द्रव्य रक के द्वारा ही पहुँचता है; और जब रक्त के फारसी के विशिष्ट अंक जो साधारण संख्यासूचक अंकों कहीं से चलता है, तब उस स्थान के दूषित या परित्यक से भिन्न होते हैं। (४) नियत संख्या का धन । संपत्ति । अंश को भी अपने साथ ले लेता है। इस प्रकार इसमें जो दौलत । (५) गहना। जेवर ! (६) धनवान । मालदार । दूषित अंश या विष आ जाता है, वह फुफ्फुस की क्रिया (७) चलता-पुरजा । चालाक । धूर्स । (6) नवयौवना और से नष्ट हो जाता है; और फुफ्फुस में आने के उपरांत रक्क सुन्दरी स्त्री। (बाजारू) (९) लगान की दर। (१०)प्रकार। फिर शुद्ध हो जाता है । हृदय से जो साफ रक्त चलता है, तरह । भाँति। वह लाल होता है। पर फिर जब शरीर के अंगों से वही रकमी-संज्ञा पुं० [अ० ] वह किलान जिसके साथ कोई खास रक्त फुफ्फुस की ओर चलता है, तब यह काला हो जाता रिआयत की जान। है। रक्त जल से कुछ भारी होता है, स्वाद में कुछ नमकीन रकाब-संशा सी० [फा०] (1) घोड़ों को काठी का पावदान होता है। और पारदर्शी नहीं होता । साधारणतः इसका जिस पर पैर रखकर सवार होते हैं और बैठने में जिससे तापमान १००° फहरन हाइट होता है; पर रोगों में यह सहारा लेते हैं। धोड़ों की जीन का पावदान। यह लोहे का ताप घट या बढ़ जाता है। इसमें दो भाग होते हैं-एक एक घेरा होता है, जो जीन में दोनों ओर रस्सी या तस्मे से तो तरल जिसे रक्त वारि कह सकते हैं और दूसरे रक्त कण लटका रहता है। जो उक्त रक्त वारि में तैरते रहते हैं। ये कण दो प्रकार के महा०—रकाब पर पैर रखना जाने के लिए उद्यत होना । चलने होते हैं-श्वेत और लाल। ये कण वास्तव में सजीव के लिए बिलकुल तैयार होना । जैसे,—(क) आप तो पहले से अणुपिंड है। शरीर से बाहर निकलने पर अथवा मृत्यु के ही रकाब पर पैर रखे हुए है। (ख) आप जब आते हैं, तब उपरांत शरीर के अंदर रहकर भी रक्त बिलकुल जम जाता रकाब पर पैर रखे आते हैं। है। प्रायः सारे शरीर का वाँ भाग रक होता है। (२) रफावी । तश्तरी। पशुओं का रक्त प्रायः चीनी आदि साफ़ करने और खाद रकाबदार-संज्ञा पुं॰ [फा०] (१) मुरब्बा, मिठाई आदि बनाने- | तैयार करने के काम में आता है। हमारे यहाँ के वैद्यक ७२०