पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/५४९

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', विमोतक. ४७१ इसका तखता जलमें हुया कर रखते हैं, पच जाने के बाद । वृक्ष दुर्भाग्य खड़ा कर देनेवाला है और जो आदमी घरमें पीछे इमसे दरवाजा आदि तय्यार करते हैं । मध्यप्रदेश में | इसको लकड़ोको झिवाड़ी या खिड़कियां धनवा कर | लगयाते है, उनके कुल खान्दानमें कोई चिराग बत्ती जव वीजशाल लकड़ीका अभाव रहता है, तब यहाँके । करनेवाला भो नहीं रह जाता। मामो इसी लकड़ीसे हल और शुभाठा,तय्यार करते कार्तिकसे पोप महीने तक इसका फल गच्छी तरह हैं । दक्षिण भारतमें इससे पेकिङ्ग वषस, चाय या काफोके । पक जाता है और बाजारमें विकने लगता है। मानभूम, पफ्स, बेड़ा (Catarnaran ) और मापपान तैयार हजारीबाग आदि पार्वत्य प्रदेशोंमें इसका मूल्य १) रुपये होते हैं। ____बहुत दिनोंसे आर्यसमाज बहेड़े का प्रचलन है। तथा चट्टप्राम अञ्चलमें ५) रुपये मन है। हरीतकीका घेदिक ऋषिगण इस लकड़ी का बना 'पाशा व्यवहार करते मूल्य इसकी अपेक्षा हुत अधिक है। रासायनिक परीक्षा थे। मालूम होता है, कि इस लकड़ीका बना पाशा द्वारा इस फल और इसके वोजके पारमाणविक पदार्थ समष्टिको जो सूची निकली है, वह साधारणको हाड़के बने पाशेसे खेलमें सुवाल पड़ता था। ऋग्वेद जानकारीके लिये नीचे दी जाती है- संहिताके १० मण्डलके ३४ सूत्र में पू तकार और अक्षका पदार्थ फन्नसक बीजकोष वर्णन है- जलोयांश ८०० ११३८ "प्रावे पामो वृहतो मादयन्ति प्रवावेजा हरिणे पर्वतानाः। भस्म ४२८ ४३८ सोमस्येय मौजवतस्य भक्षो विभीदको जागविमझमच्छान ॥" ) पेद्रालियम इधर एकद्राकृ १२ २६८२ (ऋक् १०३४११) । वृहतो महतो विभीतकस्य फलत्येन सम्यन्धिनः | इलकोहलीय , ६४२ प्रतातेजा प्रयणे देशे आता रिण मास्फारे यतामा जलोय , ३८५६ . २५२६ प्रयतमानाः प्रायेपाः प्रवेषिणः कम्पनशीला अक्षा मा मां उक फलस्वफ वर्ण (Colouring matter), गोंद मादयन्ति दयन्ति किञ्च जागृविजयपराजययोहण- ( Resin ), गालिक एसिड और तेल मिलता है। इनके शोकाभ्यां कितवानां जागरणस्य कर्ता विभीदफी यिभी. एकट्राफ्टसे जो पेद्रोलियम इथर उत्पन्न होता है वह सकधिकारोऽक्षा मह्यं मामछान माच्छदत् । (सापय) सहज रंग मिले हुए पीले तेलमै सहज ही अनुभूत होता है। इसके फलके रसमें कसीस या हीराकस मिला देनेसे पलकोहलीय एकद्राय हरिद्रावर्ण, भंगर, धारक और लिबनेको अच्छी स्याही तय्यार होती है। योजका 'उज्या जल में द्रव होता है । जलीय या Aqueous Extract तेल फेशमूलको न करता तथा केशको पढ़ाता है। और चर्म परिष्कार करनेकी शक्ति ( tanmin ) परि. चीनी साफ करनेमें इसकी लकड़ीको राव सावन्तवाड़ी लक्षित होती है। बीजको गूदीमें जो तेल मिलता है, जिलेके लोग व्यवहार करते हैं। इसके पत्ते के काधमें उसमें प्रायः ३०४४ अंश रसवत् पदार्थ विद्यमान है। मलाई ( Bosxvellia serrata) वृक्षका तमता ५६ महीने यह घिरने पर ऊपरमें जरा सज रंगका तेल और तलेमें मिजाकर रखनेसे वह इतना दृढ़ हो जाता है, कि वह शोध घोको तरह गाढ़ा सफेद पदार्थ पाया जाता है। यह जल या कीचड़ में खराब नहीं होता। . इस सबसे रेल साधारणतः औषधके रूपमै व्यवहत होता है। बाजका . विछानेयाला 'श्लोपर' या पटरेका काम भी इससे लिया। तेल वादाम तेलकी तरह पतला है। उसमें फोका पीले जाता है ! • इससे वृक्ष छत्ते की तरह छायादार होने रंगका जो पेट्रोलियम् इथर पकष्ट्राफ्ट पाया जाता है, रास्तेकी दोनों वगलों में लगाये जाते हैं। उत्तर-मारतके यह सहज ही नहीं सूत्रता या पलकाहलमें द्रव नहीं साधारण हिन्दुओं का विश्वास है, कि यह वृक्ष होता। किन्तु 'पलकोहलिक एकद्राय उष्ण जल में द्रय भूतपोनिका आवास स्थल है। इसीलिये वे दिनके । हो जाता है। उसमें भग्लको प्रतिक्रिया विद्यमान रहती समय भी इसके नीचे घठनेका साहस नहीं करते। है। सांयुन-चीनी या क्षारका विन्दुमान निदर्शन या , मध्य और दक्षिण भारत के लोगोंका यिभ्यास,कि यह आसाद नहीं है।