पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष एकविंश भाग.djvu/७४७

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विप भामाशको पीड़ा या मारित्व बोध तिरोहित नहीं होता। लिये तो इसकी थोड़ी मात्रा भो अहितकर है। वमन ही दस्त होता है और उसके साथ यून निकलता है। तू.तेयाका प्रधान लक्षण है। मनसे निकला हुमा पसीना निकलता है तथा प्यास लगती है। नाडोको पदार्थ तूतिया रङ्गका होता है। शिरका दर्द, पेटमें गतिमें कमजोरी तथा अनियमित भाय दिखाई देता है। व्यथा, उदरामय आदि तूतिया विपके लक्षण हैं। भद्वारहसे बहत्तर घण्टे तक रोगीको मृत्यु हो सकतो , तृतियासे शूलकी तरह व्यथा भी होती है। तूतिया है। संखिया विषकी क्रिया तथा हैजेको किया प्रायः' विषसे धनुटंकारका लक्षण दिखाई देता है। चिकि- एक समान है । संखियाको विपक्रियाके लक्षणोंमे त्सक यमन करानेयो उद्देश्यसे २४ प्रेन तूतियाका · उल्लिखित लक्षण हो विशेष हो प्रपोजनीय हैं। व्यवहार करते हैं। यमनके माध तूतिया विष मी संखिया विपके धूएं और सूंघनसे भी विपकिया , शरीरसे बहार निकल आता है। यदि कुछ रह जाये, उत्पन्न हो सकतो है। फलतः नेत्र और मतहियोंकी : तो हमाकपम्प द्वारा मामाशय साफ कर सिलाध द्रव्य 'जलन और उससे होनेवालो उदामय आदि पीड़ा, सानेको देना चाहिये। दिक्षाई देती हैं। संखिया विषका सेवन करनेसे अभ्या- ४।-जिङ्क और येरियम गादि भी उपविषकी तरह सित लोग भा देखे जाते है। पे अधिक मात्रामें भी क्रिया प्रकाश करते हैं। इसके द्वारा यमन और उदरा- ससिया विषपान कर अवलोला ममसे उसे पचा डालते. मय गादि विष लक्षण प्रकाशित होते हैं। हैं। उनताजना वियोंमें संलिया विपकी मिया ५।-याक्रोमेट भाव पटास-भयानक विष है। भयानक है। यह साधारणतः व्यवहृत नहीं होता और सब जगह यह २। सीसा-जीवदेहमे सीसाका विप बहुत धीरे धीरे | मिलता भी नहीं। इस विषसे भो अन्नप्रदाहजनित काम करता है। इसके फलसे लकवा या पक्षाघात) उदरामय और आमाशय प्रदाइजनित यमनका उपद्रव और शूल रोग उत्पन्न होते हैं। चित्रकर और लाम्बर होता रहता है। भादिका सोसके विपस पोड़ित देखा जाता है। सोम- ६-फसफरस भो विपश्रेणोके अन्तर्मुक्त है। शूल एक बहुत कष्टदायक वााधि है। इससे नाभिको इसको यथेट दाहकता शक्ति है। हहोके वाहर या अगलमें प्रपल वेदना होती है। दुनिवार्य काष्ठयद्ध- ऊपर हो इसकी विपक्रिया प्रकाशित होती है । इसके रोगमे रागो यातना पाता है। माडीके किनारे काले उदरस्थ होनेसे भामाशयमें और अंतहीमें जलन पैदा काले दाग दिखाई देते हैं। रेचक औषध, अफोग और होती है। साथ ही घेदना भी अनुभूत होने लगती है। भाइलाइ आव पोटासियम मादि द्वारा सोसा विषका धमन और दस्तके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। फस- प्रतिकार किया जाता है। .. फरस द्वारा ये सब दुर्लक्षणों के घटनेको परीक्षा मन्ध. सोसा विपका और एक लक्षण यह है, कि इससे | कार गृहमें यमन किये हुए पदार्थों के देखनेसे होती है। ..हाथ कांपता है और हाथ अवश हो जाता है तथा | यमनके साथ जो फसफरस बाहर निकलता है, अन्ध. .वाह सूख जाती है। तडित्यनके संयोगसे इसका कारमें यह उज्ज्वल दिखाई देता है। प्रतिकार किया जाता है। पोटासियम भाइसाइट। फसफरसके घिपमें यत् स्वराय हो जाता है। सेवन कराना मायश्यक है। इन सब प्रक्रियायोके। इससे कामलारोग उत्पन्न होता है। तारपीनका तेल प्रतिकार न होनेसे दैदिक यन्त्रादि धीरे धीरे विकृत | इसके प्रतिकारके लिपे उत्तम कहा गया है। ३० यूद हो कर रोगोका जीवन नए होता है। " भी तेल घावहार किया जा सकता है। शिशु या छोटे . . ३ तांका-तांबा भी एक भयानक विष है। सांवेसे छोटे बच्चे हो दियासलाईको काठीको नोक पर लगे हो तूतियाकी उत्पत्ति होती है । तृतियाके पेट में / फसफरसको उदरस्थ कर लेते हैं। - पहूँचने पर घमनका दौरात्म्य भारम्भ होता है। एक ७।-जयपालका नेल और इलेटेरियम मादि द्वारा नाला तूतियास मी विपकी क्रिया होती है। पोंक | भी ईजेकी तरह लक्षण दिखाई देता है। Vol. xxl 165