पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१३७

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विवाहको लिये गोलका नियम पत्यन्त प्रबल १) अदली जाती है। पहले दुर्गा, महादव, महेश पिता, (२) पितामहो. (३) प्रपितामहरी, (४) हा प्रपति देवतायोको वर्षमा की जातो।। प्रपितामही. (५) माता, (३) मातामही तथा ७) डोमों में बहुविवाह और विधवा-विवाह निविध नहीं प्रमातामहो ये जिस अंगीके होते | उस पोम मधया विधवा माथ सम खामोका कनिष्ठ भाई विवाह डोम विवाह नहीं करता है। बालके डोमॉम कर सकता। बसपोर सिन्दूर दानी सगाई केवल एक मूलकी जो पुरुषका विवाह नियम-विरुद्ध विधवा-विवारवा पा । मुर्मिदाबादकी डोममि पति है। बाँकुड़ामें कमसे कम पीढ़ी में विवाह नहीं होता, पालो परित्यागकी प्रथा प्रचलित है। परन्तु या परित्याग परन्तु भैयादि रहने पर ५ पोढ़ौमें भी विवाह नहीं पञ्चायती सम्पतिनामसे होना पावश्यक है। ययावतके हो सकता है। २४ परगनावासीको कोई डोम सपिख 'जामों' कामे हो सब गड़बडी जातो तो उत्तर सो ग्रहण नहीं करता। भागलपुरमें खामो कुछ पयास से कर समर्थ सामने यदि किसी दूसरी जातिका मनुथ डोम होना चाहे दो खण्ड कर देता है और इस तरह विवाह सम्बन्ध तो वह पचायतको निर्टिष्ट पर्थ और निकटवर्ती डोमों- विक्षित हो जाता है। मुझमें श्य स्वामी पचायतको को एक भोज देकर डोम जातिमें मिल सकता है। जो एक भोज देता घोर उसमें सूपर काटता है। जब कोई मनुष्य डोम श्रेणीमुक्त होना चाहता है, उसे मिर मूड़वा किमो खोका सतीत्व नष्ट करता है, तो वह उसके पूर्व कर पञ्चायतमे एक प्रकारको दीक्षा ग्रहण करनी पड़तो स्वामीको रुपये देकरी समाजमुक्ति पा सेता। मध्य भोर पूर्व बङ्गालके डोम थोड़ी ही अवस्थामें डोमोंके पवायतोको भिव भिव उपाधि यथा-- अपनी लड़कीका विवाह कर देत।१० वर्ष से अधिक सरदार, प्रधान, मनमान, मार, गोरेत और कविराज। सम्बकी कन्याका विवाह नहीं करनेसे समाजमें कन्याके एक मनुखको सन्तान ही उत्तराधिकारोगामी पचायत पिताको निन्दा होती है। इनमें कन्याका पण ५) नाम पाल करती है। प्रति पञ्चायतके पधोनमें एक एक रुपयेसे ले कर १०० रुपये तक है। ढाका जिसके डोम बड़ीदार रहता है। विवाहकालमें पामोयखजौको धामन्वय करत है। डोमों में धर्म को माला नहीं है। विभिन प्रदेशीय निमन्वितगषके पहुंचने पर वरका पिता पुत्रको गोद में डोमोको धर्म प्रणालोको समानता देखी नहीं जाती। ले कर मडप पर बैठता तथा कन्याका पिता भी इनके कोई प्राण पुरोहित नहीं सनक कारबमका कन्याको ले कर बरके सामने बैठ जाता है। कन्याका धर्मानुष्ठान भित्र भिवसानोंमें विभिन पाशतिम पवाट पिता पीढ़ीके तथा बरका पिता पौढ़ीके नाम उचा- गया है। भागिनेय हो विशेषकर पुरोहितमा काम रच करता है। इसके बाद वे खरको इस विषयमें करता है। भागिर्नय अथवा भामिनियसम्पीय विसी साची रखते हैं और वरका पिता कन्याके पितासे यह स्थति न रहने पर परिवारका वार्ता हो मन्बादि पाठ जिज्ञासा करता है कि वह पानी कन्याको परित्याग करता है। बङ्गालके बॉकुड़ा जिलेमें देवरिया तथा करतानहीं। कन्धाके पितासे सम्मतिसूचक उत्तर अन्यान्य जिलो में धर्म पण्डित नामले पभिहित होमोसे पाने पर वर कन्याक कपालमें सिन्दर देता है। इमो पुरोहितका कार्य किया जाता है। मका पद पुरषानु। सरासे विवाहनिया संपन होतो। २४ परमनके क्रमिक। पालीम ताँवकी गूठोसे ये पश्चाने डोम विवापसमयमै विवा-समाके मधमा पर गा- जाति । सवाल परगनिम पापित की पोरीहित्य जससे पूर्व एक पाय रखते है। इस पावके अपर वर करता है। पौर कन्याकारणाने। धर्मप्रतिक मन्वादि बाल पोर पचिम बालके बहुतसे डीम चय पड़ने पर भी बरबोर कन्या दोगीकी माखा परस्पर पर राजा पोरसवपतिरिक्ष धर्मराजभोली Vol. IX 34