पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/१३८

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१३४ प्रधान उपाय है। ये दुर्गापूजाके ममय ढाकपूजा किया देते हैं और उनको उपामना करने का मामक बाहेर- करते हैं। मध्य बालके डोम एकास कालीभक्त है। में एक घरमें अथवा वक्षके नीचे पूजादिका कार्य किया पूर्व बाके बहुत से डोम शोभनमतको गुरुरूपसे पूजते है जाता है। कहना नहीं पड़ेगा, कि इन देवतापोंको इनमेमे घोड़े ऐसे भी है जो महाराज हरिश्चन्द्रमे अपनी मस्या और उत्पत्ति विवरण प्रसव है। जो डोम उत्पत्ति बतलाते हुए अपनेको हरिश्चन्दो मानते हैं । उनका अपने कार्योंसे तथा मृत्य या किसो दूसरे कारणसे प्रसिद्ध कहना है कि हरिश्चन्द्र जब अपना सर्वस्व विश्वामित्र को हो गया है, डोम लोग उनकी ठाकुरके जेमा उपासमा दान कर चुके थे, सब उन्होंने एक डोमके निकट दासत्व करते हैं। श्यामसिंह भो मम्भवत: मी तरहसे हो खोकार किया था। डोमके घरमें पा कर और उसके उत्पन्न हुए होंगे। गयाके निकटस्य मधया डोम प्रमिल व्यवहारसे सन्तुष्ट हो कर उन्होंने समस्त जातिको अपने डकैत है। जब कोई डकैतीक लिये बाहर निकलता धर्म में दोक्षित किया; सभोसे डोम वह धर्म प्रनिपालन है, तो पहले वह पाने मलके लिये सनसारो माई करता पा रहा है। देवोको पूजा कर लेता है। बहुतोका अनुमान है कि पूर्व बङ्गालमें श्रावणिया पूजा डोमका प्रधान उत्सव यह देवो कालोक ही मामभेद मात्र है। परन्त दूसरे है। यह उत्सव श्रावण माममें किया जाता है। उस एम देवीको पृथिवी बतलाते हैं। एम देवीको उपा समय एक शूकर बलिदान कर एक पात्र में उमका सनाक लिये प्रतिमूर्ति का प्रयोजन महौं पड़ता है। घर शोणित और दूमरे में टुम्ब तथा सोमरेमें सुरा रख कर में प्राध विलम्त परिमित स्थान पर गोबरके जलमे एक नारायणको उत्सग किया जाता है। भाद्र कृष्णरात्रिमें मण्डली बनाई जाती और उपासक उस मण्डलोक भी इसी तरह वे एक दिन एक पात्र दुग्ध, चार पात्र सामने अपने घुटमेको टेक कर बैठता है। बाद दाहिन मुरा, एक नारियल और गाँजा इत्यादि हरिरामको हाथमें डोमौकी प्रसिद्ध कुल्हाड़ी ले कर उसके हारा अमर्ग करनेके बाद शूकरको बलि दे कर उत्सव करते बाई नामें एक जगह काटता है। बाद वह अंगुलोमे है। कुछ दिन पहले अङ्गाल में सर्वत्र एक ही प्रथा थी। चार पाँच बुन्द लेह से कर मण्डलीके मध्य चिह्नित कर सूर्य या चन्द्रग्रहणके समय प्रत्येक हिन्दू गृहस्थ हारके देता है, तथा मृदुखरसे देवीके निकट प्रार्थना करता बाहरमें बहुतसी ताम्ममुद्राएं रख देते थे जो डोमो को ___ है, कि पाजको रात्रि खूब पन्धकारमय हो, जिससे उसे ही मिला करती थी। परन्तु पाजकल ग्रहाचार्य ने प्रचुर धनचोरोम हाथ लगे एवं वह अथवा उसका कोई उन पर अपना स्वत्व जमा लिया है। रिसलो साहबका पनुचर पकड़ा न जाय । अनुमान है, इस प्रथासे प्रतोत भो होता है कि बहुतोंका विश्वास है कि डोम मृतदेहका न तो डोम पहले अग्नि, जल, वायु प्रभृति भूतोपासक अनार्य अग्निसत्कार करते और न उसे महोम गाड़ते हो। जातियों के पुरोहित थे। थे निशियोगमे मृतदेको खण्ड खगड करके पासको . बिहार के डोम भी महादेव, कालो, गङ्गा प्रतिको नदीमें फेक देते हैं। जो कुछ हो, यह भीषण धारणा समय समय पर पूजा करते है। इनके अतिरिक्षा श्याम अत्यन्त अमूलक है, सभवत: डोमीको पहले रात्रि सिंह, रतमाला , गोहिल, गोरैया, बन्दा, लोकेण्डर और योगमें ही मृतसत्कार करने में बाध्य करानेसे ऐसा प्रवाद दिवार प्रभृति सनक प्रगण्य देवता हैं। इनसे ये प्रचलित हुपा होगा। ढाका प्रदेशमें डोम मृतदेह खामसिंहको अपमा पादिपुरुष अनुमान करते हैं। नदीमें फेंक देते, सम्भ्रान्त होने पर उसकी देह गाड़ सामसिंहही इन लोगोंका प्रधान देवता है। दरभागेके दी जाती है। पाजकल अधिकांश स्थानमें ही दार देवधा नामक स्थानमें इनका एक मन्दिर है। विवाह करने को प्रथा प्रचलित हो गई। मृतका सवार पथवा और किसी प्रकार के उत्सवमें डोम महीको पिण्डा समा होने पर वे बान कर एक एक करके लोह, पत्थर अति मतसी मूर्तियो निर्माण करके सूबरको बलि और सूखे गोबरको सय कर हो जाते , तयां