पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३५०

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३४९ ताँतिया तोपी-तातियामील (तात्यामील) पौर तात्याटोपी पकड़ने के लिए भेज दिया। १८५८ तांतियाभोन, (तात्याभोल)-एक प्रसिह भोल-इस्य वा ६०को प्वी मार्च को मजा मिडन, जिम गाँवमे मान डाकू। मध्यप्रदेशमें नोमार जिले के अन्तर्गत घाटकेगोक मिह रहते थे. नम गाँव ठाकरको पत्र दिया। उसमें निकट विरदा नामका एक ग्राम है ; यहाँ हिन्दू भीलों के मानमिक लिनिवा गया, कि यदि वे स्वयं आ कर बोच कई एक घर गोपों के भो वाम है। पसी में पकड़ाई देंग. तो उनके लिए बहुत सभोता होगा । अन्त- (१८४२ ई.में) मषिजीवो भाजमिहके औरममे ताँतिया में मानमिहको कहा गया कि उनको अटिश-शिविरम रकवा जायगा, मिधिया उनका बाल भो बावा नहीं कर' बाल्यावस्था को प्रमको माता का देहान्त हो गया। म. ग. प्रत्य तः उनकै सुखस्वच्छन्दताक लिए अगरेज : विद्याशिक्षाके अमद्भावके कारण ज्ञानमाजित नहीं हो मेनापति विशेष कोशिश करेंगे। मानमिद अंग्रेज सेना. सका था, किन्तु उममें उनके महगा, अमाधारण बुद्धि पति : पाम जा कर मिले। किन्तु तब भो तांत्यातापा- और न्यायपरता अवश्य थी। का कुछ मन्दह न हुपा। उन्होंने मानसिंहको कह- बचपन में हो तोतिया अस्त्र-शस्त्रमे खेलना ज्यादा पन्द नवा भेजा, f. वे गहों रहे या फिरोजशाहके माथ करता था। उमम शागरिक मामय भो कम न थी। फिर जा मिले । मानसिंहने उत्तर दिया कि, “मैं तोन एक दिन एक भै मा निम अवस्थामें गाँव के अन्दर घुस दिन भीतर पा कर आपमे मुलाकात करूंगा।" । प्राया, ग्रामका कोई भी उसको पकड़ न मका । किन्तु घटिश मैनापति जानते थे कि मानमिडके मिषा पार नातियान खेन ममझ कर उसके दोनां मींग इम तरहमे किमीको भो ताकत नहीं कि तात्या तोपोको पकड़. पकड़ कर नवा दिये कि, फिर वह भ'मा किमी तरह लावे। इमलिए नाना प्रकारका लोभ दे कर मानसिंह : भो अपना मस्तक उठा न मका और धर्शता हा जमीन पर यह भार मौंपा गया। ७ अनौलको शामके बाद पर गिर पड़ा। मानमिन सांस्याम जाकर भेंट की और कहा-"मिड, नभोम लोगांको तोतिया पराक्रमका परिचय मिलन माहब पाप पर मदय हुए है।" उस समय भो तांतिया- लगा। जिम ग्राममें भाजसिंह रहता था, वहाँ उसको ने पूछा, कि यहाँ रहैं या फिरोजशाह पाम जाँय। कुछ मम्पत्ति न थो। किन्तु 'कन इसका जबाब दूंगा' इतना कह कर मान- ग्राममे कुछ दूरी पर पाखार नामक गांवमें उसको मिह चल दिये। उमो रातको दो पहर के समय मान- कुछ जमोन थो। शिव पटेल नामक एक व्यक्तिक साझ. मिहने कुछ मिनायांक साथ पा कर देखा, कि तांत्या में वह खेतो करता था। नोरियाको उम जब ३० वर्ष- तोपो गहरी नींद में भी रहे हैं। विश्वासघातक मान- को हुई, तब उसके पिता भाऊसिरको मृत्यु हो गई। मिह उसो अवस्था में उनको कैद कर मिड साइबके पिताको मृत्य के बाद उम शिव पटेलन तातियाको उस शिविरमें ले गये । पोछे तात्यातोपी मौकरोको भेजा जमानमे दूर कर दिया। इस पर तालियान शिव पटेल- गया। विचारमं तात्यासोपो दोषी ठहराये गये । विचार के नाम अदालतमं नालिश ठोक दो; किन्तु अर्थाभावसे के समय तान्यातोपोने जवाब दिया था कि -"अपने वह मुकदम में हार गया। प्रभुक भादशमे इतने दिन युद्ध किया है। मैंने कभी भी ताँतियाने मुकदमे में हार कर शिव पटेलको उत्तम किसो अंग्रेज पुरुष, स्त्री वा बालकको हत्या नहीं की।" मध्यम कुछ शिक्षा दी। इस अन्याय अत्याचार के १८५८ ई०, १८ अपोल्नको उमक प्राणदण्डका दिन कारण उसे एक वर्षको कैद हुई। स्थिर हुपा । मृत्युसे पहले तात्यातोपोने यह बात कही यह उनका प्रथम कारागार दर्शन है। नागपुर थो-"मैं अपने लिए जरा भो दु:खित नहीं परत में इस जेल में बड़े कष्टसे एक वर्ष बिताया। मेरा परिवारवर्ग को कष्ट न पहुँचना चाहिये ।" तांतिया जलसे लोट तो पाया पर गांव के कुछ खोना। मामासाहम, सिपाहीवियोह, सांसीकी ग़नी भादि शब्दोंमें केवड्यासे उसे फिर तोन महोने लिए जेल जाना भन्यान्य विवरण देखो। पड़ा।