पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३६४

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३६. नास्ति साडित म.वि.) तड-गिर-ना। १ पाहत २ तिर कुछ ताड़ितराशिको विविध पक्रियाकै अपर प्रतिष्टिन। स्वत । ३ उत्पाडिन । ४ गत । ५ दण्डित । ६ विछ। यूरोप और अमेरिका के प्रधान प्रधान मनखियों के हाथ (को०) लडित भावाशे अग। ७ विद्य त्. बिजलो। ताड़ित के विषय में विविध प्राविष्क्रियापोंका साधन और ताडितको उत्पत्तिका विषय मिसान्तशिरोमणिमै रम ताड़ितविज्ञानको विविध उन्नति सम्पादित हुई है। इस प्रकार निग्वा है ममुद्रमं वड़वाग्नि है, जलभरनिमग्न छोटेमे निबन्धमें सबका उल्लेख करना असम्भव है । किन्तु इम वड़वाग्निम धमाश उस्थित होतो है और वह धूम कुछ लोगांका उल्लेख न करनेमे निबन्ध अधूरा रह जायगा। राशि आकागम वायहाग नात हो कर चारों तरफ फन फालिन और कावेगिड़म के बाद ऑपेयार, माइकल जाता है। पोर्क द्य मांग किरण द्वारा प्रदोल होने पर फारादे, लार्ड केनविल ( मर विलियम टोममम), काकै स्फनिङ्ग निकलते हैं. इन्हीं स्फुलिङ्गोंको ताड़ित वा मक्सवेल और हार्ट जकै नाम नाड़ितविज्ञान के इतिहास में बिजनौ कहत हैं। ये अनसन और प्रतिकूल वायुकं समधिक प्रसिद्ध है। इनमें प्रपिचार फरामो, हार्टिज प्राघातम उदभ्रान्त हो कर पार्थिवांश माथ मिश्रित जर्मन तया और सब अंग्रेज थे। इङ्गालैण्ड के लिये यह होते हैं, बादमें अकस्मात् वैद्य त तेजः निकलता है, बड़े गौरवका विषय है। यह प्रायः प्रकानवर्ष णमे हा करता है । यह तोन वर्तमान ममय में ताड़ितशक्ति विविध विधानानुमार प्रकारका है-पाथि व, प्राप्य प्रोनम । जिममें पृथिवी- मनुष्य और मनु'थ-समाज का भृत्यभावमे उपकार कर का अंश अधिक हो वह पार्थिव, जिमि जन्नीय ग रही है। कितने विषम कितने उपायोंसे ताड़ित अधिक हो वह पाप्य और जिममें तेजका भाग अधिक . शक्तिका व्यवहारिक प्रयोग हो रहा है, उमको शुमार हो वह तेजम कहलाता है। नहीं। वर्तमान निबन्ध ताड़ितशतिको वैज्ञानिक विशेषपरिचय-यरोपीय विज्ञान में ताडितका परिचय दम आलोचना की जायगो। ताड़ितके व्यवहारिक प्रयोगके प्रकार दिया गया है-अम्बर (Ambar) नामक पदार्थ लिए स्वतन्त्र निबन्धको आवश्यकता है। ग्रेहमबेल, एडि- को घर्षण करनेमे, वह छोटे छोटे ग्व, तृण प्रादिको मन आदि जगविख्यात व्यक्तियोंने जिम कौशलो से प्राकर्षित करने लगता है। बहत दिनोंमे लोग अम्बर विविध यन्तीका उद्भावन कर ताड़ित शक्तिको मनुष्यों के इस गुणको जानते थे। अम्बरके ग्रीक नाममे अङ्गीजो कार्य साधनमें नियोजित किया है, इस निबन्धमें उन Electricit: शब्दको उत्पत्ति हुई है। मस्कृत प्राचीन मबको आलोचनाको हो स्थान मिलेगा या नहीं ग्रन्थों में वृणमपि और अम्बरको एक हो पदार्थ बसन्नाया मन्द है। गया है। डाकर गिलवाट ने तोन मो पचाम वर्ष पहले, ताड़ित एक जड़पदार्थ अथवा जड़ पदार्थ का एक अन्यान्य पदार्थोमभो अवस्थाभेदसे इस तरहको आकर्षण प्रकार धर्म मात्र है, अथवा शक्तिका किस तरहका शक्तिका आविष्कार किया था। भेद मात्र है, रमका प्रभो तक निःसंशय निरूपण नहीं उड़ मौ वर्ष पहले ताड़ितके विषयमें मनुष्य जातिका हुपा है। पाज तक भी इस विषय पर विविध तर्क जाम मोण और सोमाव था। वास्तव में देखा जाय वितक चल रहे हैं। फिलहाल हम उस वितण्डाक्षेत्रम तो सुप्रमिह ामरिक बेञामिन फ्रांकलिन और ग्रेज प्रवेश नहीं करना चाहते। उस विषयमें पाधुनिक कावीण्डमके ममयमे ही ताडित-विज्ञानको राष्टि हुई है। वैज्ञानिकों के मत अन्समें कहेंगे। पोछे ताडितको इतनो उन्नति हुई कि अब उसने विज्ञान ताड़ित किसको कहते है ?-ताड़ित कहनेसे हम का शीर्षस्थान लाभ कर लिया है । वतमानमें यह कहना या समझते हैं, पहले यही बतलाना पावश्यक है। एक पत्युक्ति न होगा कि, मनुष्य-ममाजकी स्थिति और उबनि- कांचके डण्डे को रेशमी रुमाल पर घिस कर छोटे छोटे के लिए ताड़ितशक्ति हो प्रधान पवलम्बन है। सभ्यतम कागजके टुकड़ों के ऊपर रखमसे मालूम होगा कि कागजके मनुष्य जातिका व्यवसाय, वाणिज्य, राजनीति रत्यादि मब टुकड़े उछल उछलकर कांचक डाहे पर लग रहे है।