पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३७४

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कणाका अवलम्बन ले कर धीरे धीरे ताड़ित निकलता हुगलीसे उसे एक बार छ दी। अब स रकाबोमें भी रहता है। कुछ धन-ताड़ित संक्रमित और पाविर्भूत देखोगे। किमो नुकीले पदार्थ में ताड़ित मञ्चित करने पर वास्तवमै पाला के ऋण पार दूममेक धनमें कुछ वायुभाव उम ताडितको पकना कठिन हो जाता है। नुकीन और व्यवधान रहनसे एक प्रकार लोडन जारको सृष्टि स्थानम ताहित जमता है और चारो तरफमे धक्का पा कर हो जातो है। अब हत्थे को पकड़ कर दूसरो तरतगेको वायुपश्रम निकल जाता है। वायुमें जो प्रवाह उत्पत्र अलग कर दो और सञ्चित धन-ताडितका यर्थच्छ व्यव- होता , उमको कौगलमे प्रत्यक्ष दिखाया जा मकता है। हार करो। इस तरह के यन्त्र को ताहिदवस्यन्त केन्द्र एसा सिवा सूचौक महतं पास वायुमें नाना प्रका। मतं हैं हमका अग्रेजो नाम है Electro-phorus. प्रलोकीका विकास होता है। अंधेरे घरमै ताडित-मन्त्र ! प्रचुर परिमाणमें नाडितोत्पादन के लिए गाना प्रका- चन्नानसे सूचों के मुंह पर ऐसे पालोकोका विकाश देखन र बड़े बड़े यन्त्र हैं। ये यन्त्र माधारणतः दो श्रेणा के में आता है। इति हैं। प्रथम श्रेणाम घर्षण हारा काँच वा अन्य द्रय बचपातको आशा निवारणार्थ मकान बगन्नौ पर ताड़ित उत्पन्न होता है। उम ताडितको फर बडे बडे सूक्ष्माय धासुदगड़ गाड़ रखनको प्रथा है। ऊपरम धर्म तताधाम सिमो तर! संचालित पार सञ्चित किया ताडित मञ्चित होने पर नोचे जमोन पर भो उस म. जाता है। इस येणाम राममडेनका ( mstem) वर्ती विपरोत ताड़ित का मक्रमण होता है । वह तात यन्त्र ही प्रसिद्ध है। इनमें ताड़ित शतिका त्यन्त अप जमोन पर आवद्ध न रह कर धातुदगड़ के सूक्ष्म अग्रभावमे वय होता है, यहो दोष है। जितना महनत को जातो क्रमशः निकल जाता है। एक माथ ज्यादा साड़ित भूपष्ठ है, उसका अधिकांश वृथा नष्ट हो जाता है, उतना फन्न पर भाव वा मञ्चित न हो सकने के कारण, वजात नहीं मिलता। अर्थात मञ्चित ताडित खिचावमे वायुराशिममे पाक दूसरो थलोक यन्त्र कक कक नाडियन्त्रमे मिलत सरो पाक यन्त्र कक कक स्मिक भेदजनित स्फुलिङ्ग निकलने को पाशा नहीं जुनते हैं। मान ला कि, दो बई व 'क' और 'ख' रहती। ता.इतके आधारस्वरूप विद्यमान है। शुरूमे हो क'में फिलहाल ताड़ित-स्फुलिङ्गक विषयम नये नये विविध थोड़ा धन पोर 'ख' में थोडा ऋगा मञ्चित है। और एक तत्त्वोंका पाविष्कार इमा है। उनमे माल म होता है, तोय क्षुद्र ट्रस 'ग' को लो। 'ग' को 'क, के पास पकड कि इस तरह धातु दण्ड दाग सम्यक, फल और एक बार जमोनम छुपाया। ग' में किञ्चित् गाता मम्भावना कम है। वजरातको आयङ्काको निमूल संक्रमण होगा! 'ग' को अब हटा कर व, को छ दो: करने के लिये मकानको लोहे या तबिके जाल ढक देर 'ग' का प्राय मम्प गण ऋण 'व' में चला जायगा । क्योंकि के सिवा अन्य उपाय नहीं है। 'ग' छोटा और ख' बड़ा है, 'ब' में ऋणका परिमाण ताड़ितयन्त्र-पर्याप्त परिमाणमें ताड़ित उत्पादन और बढ़ गया। फिर 'ख' को ग के सामने रख कर भूमि मञ्चय करन के लिए विविध यन्त्रोंका पाविष्कार हुषा स्पर्श करायो । पत्रको बार 'ग' में धन मकान्त होगा। है। अल्प मात्रामें ताड़ितकी आवश्यकता होने पर 'ग' को 'क'के पास ले जा कर 'क' को छू दो। प्रायः महजमें मिल सकता है। एक तश्तरोमें थोड़ोसो लाख सम्पग धन 'क' में चला जायगा । अबकी बार 'क' में गला कर रक्वो। पोर दूसरो एक तश्तरोको काँच वा धनको मात्रा बढ़ गई । मो तरह मध्यवर्ती 'ग' को एक अन्य अपरिचानक दण्डके हत्थे मे थामा। पहलो रकाबो बार 'क' को तरफ और एक बार 'ग' की तरफ ले को लाख पर फलालेन वा विशोका चमड़ा दो चार बार जानसे तथा. बोच बोनम भूमिस्मथ को व्यवस्था करने घिसनेसे उसमें कुछ ऋण-ताडितका विकाश होगा। 'क' में क्रमशः धन पोर 'ख' में नामशः ऋणको मात्रा बढ़ दूसरी रकाबोको इस ताडितके सामने लामो पोर जायगो। दोनों साडितका थोड़ा घोड़ा पंच ले कर प्रारम्भ