पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३७५

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करनेमे शेष तक दोनोंका प्रचुर मञ्चय हो सकता है। होती है। जब तक जोरसे बा नतम ताड़ित उत्पन म श्रेणोके यन्त्रों में शशिका अधिक प्रपश्थय महों करके परिचालक पदार्थ के दोनों पंशोको उहातिको होता, तथा एक छोटेसे यन्त्र में इतनी बिजलो सचित प्रममान रकवा जाता है, तभी तक ताडितका स्रोत एक को जा सकता है कि, जिसको विचावसे 'क' और 'ख' शसे अन्यत्र चलता रहेगा। सहतिके समान होते दोनों के मध्य वायुपथ में कई पक्ष वा कई फुट लम्बे हो स्रोत भी बन्द हो जाता। स्कुलिङ्ग पायानोसे निकल सकते हैं। ताड़ित-यन्त्रके हारा ताडितका जो स्रोत उत्पत्र होलट ज ( Holta. ), यम् ( Voss ) विम्हरमटम होता है, उसमें प्रवाहित ताडितका परिमाण अधिक ( Timhurst ) प्रादिक बनाये हुए ताड़ितयन्त्र कमी नहीं होता। ताड़ितमें प्रवल स्रोत बहानेके अन्य उपाय श्रेणी के अन्तर्गत हैं। प्राजकन्न रम्हों यन्धोंका आदर भी है। होता है। ___ साधारणत: ताडितका प्रवास कहनेसे धन-ताड़ित के ताडिन-प्रवाह ।-एक ताडिलयन्त्र के साड़िताधार प्रवाहका हो बोध होता है। किन्तु इस बातका हमेशा कुछ ताडितका मञ्चय करके एक ताँबे के तारसे उम ताडि ख्यान रक्खो कि, ताड़ित 'क' से 'ख' की तरफ बहता ताधारको जमीनमे छुपा देनमें उमो ममय सम्म ण है. ऐसा कहने धनताडित 'क' से 'ख' को तरफ और ताड़ित उम तार के जरिये जमोनमें चला जाता है। इस माथ हो ऋण ताडित 'ख' से 'क' को सरफ प्रवाहित सरह ताड़िताधारको उद्द,ति भूमिको उद्घति के समान हो होता है ऐसा समझो। जातो है, इमोका नाम है ताड़ित-प्रवाह। यह प्रवार साड़ितयम्बके बिमा ताड़ितस्रोत उत्पन्न करने के लिए क्षणमात्र ठहरता है प्रवाह के कारण गा कुछ गरम डो सौन प्रधान उपाय है- जाता है। प्रवाह को यदि स्थायो बनाना चाहो तो यन्त्रक (१) एक टुकड़ा तौबा और एक टुकड़ा दस्ता, काय को चन्द न करके लगातार ताड़ित उत्पन्न करत दोनों छोरों के मिला कर अन्य दो प्रान्तोंको मण्डक वा रहो । एक तरफ जमे ताड़िन आधारम निकन कर तारले शल्कहीन मत्साको देहसे छुपानसे उनका निर्जीव शरीर जरिये चलता रहेगा, दूसरो और उसी तरह नवोन ताहित भो उछलने लगता है। गलवनो ( Galbani ) में इस आधारमें मञ्चित होता रहेगा। इस तरह जब तक चाहो घटनाका आविष्कार किया था। दो विभिन धातु के स्पर्श ताडितका प्रवाह तारमें चलाया जा मकता है। तार म.बसे दोनामें नाडितका आविर्भाव होता है। एकमें क्रमश: उत्तम हो जाता है। तारके पाम यदि एक धन और दूमरोमें ऋण पाविभूत होता है। वोलटा चुम्बकको कोल रक्खो जाय, तो वह अपने स्थानमे (Volta : इस घटनाकं पाविष्कर्सा थे। थोड़ासा पानी में थोडासा हट जायगा। ___ जरासा नमक वा कई विन्दु, द्रावक डाल कर उसमें लोडन-जारके दोनों तरफ धातुदण्ड वा तार जो एक तांबे और एक जस्तके टुकड़े को आंशिकभावसे डुबो ऐनसे दण्ड और तारमें ताड़ितप्रवाह चलता है। ऋणमें दो तथा एक तारके हारा ताँबे के साथ बाहर, जस्त को मश्चित ताड़ित बाहर निकल जाता है। धन ताड़ित एक मलग्न कर दो। बाहरमें ताँबे से जस्त की तरफ तार पृष्ठसे एक हो ओर जाता है, ऋग-ताड़ित अन्य पृष्ठसे हारा ताडितका (अर्थात् धन-ताडितका) स्रोत चलेगा। अन्य दिशाको जाता है। इस स्थल में भी ताड़ित प्रवाह पानोंक भीतर जस्त मे तॉब की तरफ स्रोत चलेगा। क्षणस्वायो होता है। प्रवाहको खायो बनाने के लिए एक जब तक दोनों धातुएँ पानोके भीतर बो रहेंगो. सब तल ( पृष्ठ ) ताड़ितयन्त्र के साथ और दूसरा तल भूमिक तक यह ताड़ित-स्रोत बहता रहेगा । हुये हुऐ जस्त.' साथ संयुक्त करके अविरत यन्त्रको चलाते रहना चाहिये। का धोरे धीरे चय हो जायगा। मष्ट देखने में पाता है, कि परिचालक पदार्थ को इस तरह ताडितका कोष ( Cell ) तैयार होता जातिको समान करनेके लिए इस प्रयासको उत्पत्ति है। कोषके पनर साधारणत: गन्धकलावया पाना में मिला