पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/३७९

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यही परिमाण महज है। जलवा पन्य तरलपदार्थ जाता है, उसको बजीमें Sobnoid कहते है।हिन्दीमे कितने समयमें कितना विनेषित होता है, इसको देख उसे कुण्डली कर सकते है । सारको एक लम्बी कुण्ड कर प्रवाहके प्रावल्य वा क्षोणताको निर्णय होमकता नो में विद्य प्रवाह चलनसे वह सर्वा शमें चुम्बक शलाकाके है। अथवा चुम्बकको कोन्न कितनो घम गई. इमको अनुरूप होता है। उसका एक छोर स्वतः हो उत्तरको देख कर प्रवाहका परिमाण हो सकता है। प्रवाह तरफ और दूसरा दक्षिण को भोर रहता है। दो चुम्ब जितना प्रबल होगा चुम्बकके लिए उमका प्रयुक्ता बन भो को परम्पर जैसे धाकषण-विकर्षण प्रादि होता है, उतना ही अधिक होगा। प्रवाह यदि नितान्त क्षीण कपडलो और चुम्बकम वा दो कुगलियां में भी उपा तरह हो, तो तारको उस कोल पर कई बार फिरा लेना आ.र्षण-विकर्षण आदि जारी रहता है। अथवा चाहिये। जितन फेरा लोगे, प्रवाहका बल भी उतना कुगडनोको बात जाने दोजिये, जरासे तारको एक फेर ही बढ़ जायगा। चुम्बकका कोनका बका में लटका लपेट कर मर्फ मागूठो के भमान करके) उममें साडि.त. कर बकसके चारो तरफ तार लेपेटने में ताडि.त-प्रवाह. . चला मे, वह भी चुम्बक धर्माक्रान्त इस्पातको नापनका यन्त्र बन जाता है। दमका अग्रजी नाम है रकको मह कम करता है । उसका एक पाव उत. Gualvanoinctor. रवर्ती और दूसरा पाव दक्षिणवर्ती होना चाहता है। ताडित प्रवाहमें चुम्बकत्व । ताडितप्रवाह चुम्ब दीनद' अंगठाकः परम्प। सम्म खान करनमें दोनों कक कॉटेको घुमा देता है। वस्तुत: ताडि.तप्रवाह स्वय- में भाकपए वा विकर्षगा होता है । प्रवाह यदि दोनों में हो मर्वा शमें चुम्बकधर्म युक्त है। एक चुम्बक के चागे एक तरफ चन, सा अ.कर्षण और विपरीत दिशामें चले पाख के प्रदेशमं जा जो घटनाएं होतो हं. ताडि.तयवाई ताविक होता है। फरामोमो विहान् पाँपयरने के पार्श्वस्थ प्रदेशमें भी बह वमो की घटनाएं होतो पहन परल व गणितक प्रयोगसे यह प्राकर्षणादि हैं। तारको एक अंगुठो तेयार कर उभमें प्रवाह च नात बटन को गणना को था। फिलहान फरादे और मक्सवेन हो, वह चुम्बकरूपमें परिगात हो जाती है । एक बडा हा प्रदशिन पतिम य गणनाएं पोर भी महजमें म्यात चुम्बकक पाख में लाहा रखनम वह चुम्बकधर्म सम्या दत होती हैं। पाता है, चुम्बकको कोल रखनसे, वह एक निर्दिष्ट तादितका एधि ।।-चुम्बक के पाश्व प्रदेशको धौम्बक दिशामें लम्बी तोरमे ठहरती है। इसी तरह ताडित प्रदेश काँगे। उता प्रदेशमें लोहा रखने से उसमें प्रवाहके ममोप भी लाहा चुम्बकत्व पाता है : चुम्बक चुम्बकत्व आ जाता है। चौम्बक प्रदेशका प्रधान शलाका निर्दिष्ट दिशाम ठरतो है। छोट! लाहका लक्ष हो यर है कि वहाँ गार गार चुम्बक की यहच्छा. टड. उमको तरफ आकृष्ट होता है। उम्पातको प्रबन चुम्बकक पास ज्यादा देर तक रखने क्राममे रकवा नहों ा मकत । उम दूगर चुम्मसको वा चुम्बकसे धसन पर इस्पात स्थायी चुम्बक बन जाता चाह जिस तरह र कवो, B के माय हो तह घूम कर है। इसी तरह इस्पात पर ताडितवाहो तार लपेट टेनमे एक निदिहरूप प्रवधान को ग्रहण करेगा। वहां से भो वह स्थायी चुम्बक हो जाता है । नोहे पर तार लपेट लावक हटाने ए भो, वह पुनः वहीं पहुंच जायगा । नेमे जब तक प्रवाह रहता है, तभी तक उममें चुम्बकत्व ताहि-वा के नागं पाखं का प्रदेश भो चोम्बक रहता है। वास्तवमै प्राजकन्न स्थायो वा अस्थायो चुम्बक प्रदेश है। वहां । तुम्बक वा अन्य ताडितप्रवाहको हैयार करने के लिए ताडितका प्रवाह हो व्यवहतोता यहच्छ'क्रम हर एक जगह नहीं रख मकते। पवनसे है। प्रबलप्रवाई की सहायता से आसानौसे क्षमताश:लो २ घम कर पुनः अपने निर्दिष्ट स्थानको ग्रहण कर चुम्बक बनता है। लेना है। इसी तरह दम चोम्बक प्रदेशमें चुम्बक और एक लकडीको रूल पर थोड़ा मना हुपा तार लपेट ताहिक प्रवाह अपने पाप गनिहीन हो जाता है। गति कर इसको निकाल लेनमे जो लपेटा एषा तार रस प्रधान्त: घूर्णन गति होता है। कोशलक्रमसे ताडित-