पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/५६०

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१५६ तिम्ब (तिम्मप)-तिरपौलिया तिका (तिमप)-स नामके दाक्षिणात्यमें बहुत छोटे छोटे तिरकुटा (हि. पु० ) मोंठ, मिर्च, पोपल रन तोन करके गजा, सामन्त वा सर्दार हो गये। कृष्णा जि मे दवाइयों का समूह । पावित बहुतमे शिलालेखों में उनका नाम उबिग्वित तिरखू टा (हि. वि०) त्रिकोण युक्त, जिसमें तोन कोन हुधा है। इनमेंमे एक सायादेवरायके मन्त्री थे जिन्हनि हो। १४३७ शक- कोण्हवोई अधिकार किया था। मङ्गन्न- तिरच्छ म पु० ) तिनिध वृक्ष। गिरिके शिलालेखमें इनका माहामा वणित है । महन्न- तिरछउड़ा (•ि स्वा० ) मालम्वम्भको एक कमरत । गिरिक गरुड़ल वर मन्दिरमें एक शिलालेख है, जिसमें तिरछा (हि. वि. ) जो ठीक सामनेको ओर न जा कर उपराजपुत्र तिम्मका परिचय पाया जाता है । विजय. इधर उधर हट कर गया हो । २ अस्तर के काममें पान- नगरको एक शिनाम्लिपिमें चिक्क तिम्मय्यदेवका महा- वाला एक पकारका रेशमो कपड़ा। भरसके पुत्र तिम्मगनके नाममे उल्लेख मिलता है। वैकट- तिरछाना (हिं• क्रि० । तिरछा होना। गिरिक नायुड़ वशमें भी गणि-तिम्म नामक एक परा- तिरछापन (हि. पु० ) तिरछा हनिका भाव । कामयाली पुरुषका जन्म हुआ था। इनके ममयमें पलनाड़ तिरछो (हि. वि० ) तिरछा देखो। पौर क्षणाके दक्षिाशस्थित प्रदेशों में कुछ दस्य -सरदा. तिरछो बेठक हि at० ) मालवम्भशे एक कसरत : रों ने मिल कर बहत उपद्रव किया था। इन्होंने विजय तिरकोहाँ ( हि वि० : जो कुछ तरछापन लिए हो। नगराधिपति बच सदेवरायके आदेशानुसार वहां आ तिरकोहे : हि क्रि.वि.) वक्रता ति कापन लिए कर उनका शामन किया था। इमो तरह १५३० ई में हुए। मलपुरके जाणाके कुछ मरदारोंकी पगस्त किया ग। तिन । मि. कि: ) गनाको सत के जपः रहना उन. पाखिरको रणक्षेत्र में हो ये मारे गये थे । उनको पुत्रने गना। २ तैरना. पेरमा। ३ पार होना। ४ मुक्त भी ममलमान सरदारोंसे घोर यह किया था। होना, उद्धार पाना। तियला (हि. पु. ) स्त्रियों को पोशाक। तिरनी ( स्त्रो० ) एक डोग जिमसे घाघरा या धोने सिया (हिं पु० ) सोन बूटियों का साशका एक पत्ता। नाभिक पाम बांधते हैं, नीवो तिम्रो । २ नाभिके नाचे २ नकोपुरके खेलका एक दाँव। लटकता हुपा घाघरे या धोतोका एक भाग। तिरकट (पु.) अगला पान । तिरप (हिं स्त्री० ) नाच में एक प्रकारका ताल । तिरकट गावामबाई (पु. ) वह पान जो सबसे ऊपर तिप्पटा (हि. वि. ) ओ तिको अाँख करके देखता घोर भागेमें रहता है। हो, ऐंचाताना। सिरकटगावो (पु. ) जपरका पाल । तिरपन मि.वि.) १ जिमको संख्या पचासमे तीन तिरकट डोल ( पु०) अगमा मस्तूल । ज्यादह हो। (पु.) २ वह मख्या जो पचाम और तोनक तिरकट तवर (पु. ) कोटा और चौकोर प्रगन्ना पाल। योगसे बनी हो। यह मबसे बड़े मस्सूलके जपर भागेको प्रोर लगाया तिरपाई (Eि. स्त्र ) वर चोको जिममें तीन पाये जाता है। जब धोमो इवा चलती है तो यह पाल लगे रहते हैं. रूष्ट ल । काममें लाया जाता है। तिरपाल (हि.पु.) १ छाअनमें खपड़ों के नीचे दिए तिरकट सबर (पु०) वह पाल जो सबसे ऊपर रहता है। जानका फम या मरकण्डों का लम्ब पूले । २ वह कम- तिरकट मवाई (पु०) रस्समें बंधा हुपा पगला पाल । यह वम जिसमें रोगन चढ़ा रहता है। मस्त लके सहारे के लिये लगाया जाता है। तिरपौलिया ( •ि पु० ) वह बड़ा स्थान जिसमें तीन तिरकाना ( क्रि० ) १ टोला कोड़ना। २ रस्मा फाटक हों और जिस होकर हाथी, घोड़े, जटत्यादि टीमा करना। सवारियाँ पच्छी तरह मिकल सके।