पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/८२

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


७९ डॉट-असा पन्तिम गजात को पुत्र न रहने की कारण उनको मृत्यु के काशीसे एक योजनपचिममें पशि एक प्राचीन ग्राम। बाद मवाकोटके ठाकुरोवनय भास्कर है। गज्यसिहा- मुसलामानरानाके समय यहां बहुतसे उठे? या को मन पर बैठे। उनके बाद यथाक्रम वनदेव, पञ्चदेव, । रहते थे इसी कारण ग्राम का नाम लाठर पड़ा है। यहाँक नागा नदेव और शङ्करदेव राजा हए । शारदेव राजा भूमिहार जाति थे। गुलाबसिनामक एक की मृत्य के बाद अश वर्माक वंशीय और एक यावा. मनुषाने मुसलमानोंको भगा कर यहाँ पर मुह वास तक भुक्त वामदेव राज्यमिहामन पर पारूढ़ हुए । उनके बाद राज्य किया था। यहांका कोटगढ़ उन्हों का बनाया पुवादिक्रममे वामदेव, हर्षदेव, सदाशिवदेव, मानदेव, हुआ है। उनके बाद गौतमगोत्रीय राजपूतोंने इसे अपने नरसिंहदेव. नन्ददेव, नद्रदेव, मित्रदेव, परिदेव, अभय अधिकारमें लाया। अभी पूर्व समधि लुल हो गई है। मन पोर श्रामन्दमन राजा कहलाये। प्रानन्दमलके पाजकल यहां केवल सापकोंका वास है। समयमें कर्णाटक वशीय नान्यदेवने नेपाल राज्य पर (ब्रह्मखं० ५७ २३७.४५) पाक्रमण कर उसे अपने अधिकार कर लिया। इसी ठाठर (हि.पु०) नदीका गहरा स्थान जहां बांस या लग्गो ममयसे ठाकरोवंशका राज्य जाता रहा । अव भो नेपालके न लगती हो। अनंक म्यानों में ठाकुरीवंशका वास है। उनको अवस्था ठाड़ा-काशो के पश्चिम मन्दा नदीके तौर पर अवस्थित एक हीन होने पर भो वे अपने को राजशोय के जैसा सम्मा- ग्राम। यहाँ हिन्दू और मुमलमानोंमें घमसान लड़ाई मित और गौरवान्वित ममझते है। ई थी। (ब्रह्मखं , ५७।२३.२४) ठाट (हि.पु.) १ लकड़ी या बांसको पहियोका बना ठाड़ा (हिं० पु. ) खेतको एक प्रकारको जोताई। इपा परदा । २ ढाँचा, पर। ३ वैश, विन्यास शृङ्गार. ठाड़े खरी-एक प्रकार के संन्यामो। ये दिनरात खड़े रहते रचना. मजावट।। ४ बाड़म्बर, दिवावट धमधाम। है और इसी अवस्था में भोजन इत्यादि सब काम करते ५ भागम, सुख, मज़ा। ६ प्रकार, शैली, ढब, सरोका। हैं। सामने में किसी चोजका महारा मिल जानेसे हो ये ७ प्रायोजन, सामान, तैयागे। ८ सामग्री सामान। है सो जाते हैं। ८ युति, पाय । १० कुश्ती में बड़े होने का ढंग, पैतरा। " ठान : हिं. स्त्री०) १ अनुष्ठान, ममारम्भ, कामका शुरू ११ काबूतर या मुरगेका प्रसबतासे पा झाड़ने का ढंग। होमा । २ कार्य शुरू किया हुआ काम। दृढ़संकल्प, १२ सितारका सार समारोह पका इरादा। ४ चेष्टा, चंदाज । पिगह जो बस या माँडको गरदनके ऊपर रहता है, ठानना (हि क्रि०) १ पनुष्ठित करना, किसो काम तो मुस्ते दोसे शुरू करना। २ स्थिर करना, दृढ़स कप करना, पका करना। गठना (हिं. क्रि० १ निर्मित करना, मयोजित करना, गर (हि. पु.) १ अत्यन्त शीत, गहरी सरदो । २ हिम, बनाना। २ अनुष्ठान करना, ठानना। ३ सुसजित पाला। करना, सजाना, संवारना । ठाल (हि. स्त्री०) १ जीविकाका प्रभाव, बेकारी। २ गटबदी (हि. स्त्र'. ) छप्पर या परदे पादि बनाने का अवकाश, फुरसत । काम, गट, टहर। ठाला ( हिंपु०) १किसी प्रकारके रोजगारका नरहना। गटबाट (हि.पु.) १ सजावट, बनावट. सजधज । २ २ जीविकाका प्रभाव, रुपये पैमेको कमी। भाइबर, दिखावट, सड़क भड़का ठाली (हि. वि. ) १ रख, साली, काम । गटर (हि.पु.) १ ठाट, उर, पहो। २ ठठरी, पंजर। ग (हि.स.) ठाप देखो। १ ढोचा। ४ टारसो छतरो जिस पर कबूतर पादि बैठते लामा ( पु.) लोहारोका एक या। इससे है।५ अङ्गार, सजावट, बनाय। वे कीर्ष स्थानमें लोको कोर सिकालते घोर -भविषावनखण्ड वर्णित स्वर्गभूमिके मध्यभागमें भारते। ..