पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/९९

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कोसी सार ठीक नहीं समा राजनीतिक पनुसार इस सत्वको नहीं -पभियोमको मावा उससे भी ज्यादा । प्रमा- छोड़ देना सर्वतोभाव पविधय है। साधारण सभी सावत् रूपले पण गवर्मे छ हाग लाई उनहोसीने मानो देशीय राजापों के प्रभुबकी शासित होने की पछा करते है। इस विषयमें राज.. पास करने के लिए होस देशमें पदार्पण किया था क्योयोको रछा हो सबसे अधिक पायो जाती है। वे सिफदन.राज्यों को हो टिपराज्य में शामिल कर इलाहौसीको यद्यपि उसी समय रस राबको पस्तित्व भान न हुए। समाने हैदराबाद के मिजामको कुछ लोप करने को पछा थी. तथापि बनदियों सावध विभाग छोड़ने के लिए बाध्य किया तथा सुदूर दाक्षि पौर पारस्वराज्यके साथ शव ताबी पायव पपने पावके कर्णाट और तखोर राज्यको बटिय सम्मान्धमें छहस्यके पनुमार कार्य न कर सके। इसी समय डल. शामिल कर लिया। उत्तराचलमें पेशवा बाजीराव सिंहा हौसोका भारस-मामनकाल निबटनेको हुपा । लीन सनयत हो कर वार्षिक ८०,०००० रुपये को वृत्ति पा डिरकरोंको लिख भेजा कि-"यदि पाप लोगोको पहे थे। १८५३ में उनको मृत्यु होने के कारण उनके इच्छा हो तो मैं और कुछ दिन भारतमें रहकर पयोमाके पुत्र नानासाहवने सत्ता उत्तिके लिए प्रार्थनाको, किन्तु विषम पाप लोग जैसा सिद्धान्त निर्णीत कर इसको डलहौसीने इत्ति भो बद कर दी। कार्य में परिणत कर ना।" डिरोकरोने मानद साय इतने पर भी डलहौसीकी राज्य पिपासा नहीं मिटो इस प्रस्तावको मंजूर कर लिया पौर पयोधा पारके वे अन्समें अयोध्या-राज्य पास करनेको उत्सक हुए। पक्षपाती हो कर कार्य का पूर्ण भार डलहौसी पर व प्रयको बार उन्होंने एक नयी चाल चली । १७६५ ई में दिया। पहले पयोध्या के साथ जो सन्धि हुई थी, उसका सुभाउहोलाने कारवसे पयोध्याका पुनरधिकार पाया था। लोप करके पयोध्या टिश साम्बाज्यमें शामिल कर ली सभोमे उनके वंशधर सता राज्य का शासन करते पाई गई। १८०१ और १८३७१० पयोध्याके साथ थे। हैं। अग्रेजों के साथ मित्रता के कारण उनको किमो जौको दो सन्धि हुई थीं। पूर्व सन्धिक बनुसार बाव तरक युद्धादिमें व्याप्त नहीं होना पड़ता था। मो- कर्मचारियोंके परामर्शानुसार राज्यको बौद्धि करेंगे, ध्याकं शामनकर्तागण क्रमशः अत्यन्त प्रकर्मण्य पोर इस पतं पर अयोध्याका पाच टिव-गवर्मा को प्राप्त प्रजापीड़क हो गये थे। भित्र भित्र गवर्नरजनग्नोन हुआ। दूसरी सन्धिका नियम यह था कि यदि सुनिय- उनसे राज्यमें सुशृङ्गला स्थापित करने के लिये पुनः पुनः मसे राध-सासन न हो, तो पंज-कर्मचारो सत्योडिन अनुरोध किया था। अन्तमें लाई हार्डिन खय' अयोध्या प्रदेशका शासन भार ग्रहण कर सुप्रवन्ध करने तथा जा कर वहां के शासनकर्ताको दो वर्ष के भीतर अपने व्ययातिरिका पथ पयोध्याके राजकोषमें पहुंचेगा। सेन्च राज्यमें सुप्रबन्ध करने के लिए विशेष रूपसे कह पाये थे। रचाके लिए वार्षिक १५,..,.00 रुपये अग्रेज-गवर्ने । उस समय वाजिद अली अयोध्याके शासमका थे। एटको देने पड़ेगे, यह भी पता मन्धिमें लिखाया। किन्तु वहार्डिसके डरानेसे विचलित न हुए और न उन्होंने डिरेकरोंने इस अंगका अनुमोदन नहीं किया,बोकि राज्यमें कोई सुप्रबन्ध हो किया । लार्ड डलहौसो गवः संन्य रक्ष के लिए नवाबने उनको राज्यका पांच पहले ही नर जनरल हो कर पाये। एकीने निहिष्ट व्यतोत दे दिया था। म शके सिवा उस मधिले पब किसी समय होते ही तत्कालीन रेसिडेण्ट मि. स्निमानको भी पंचको डिरेकरोने अपाच नको किया था। राज्य परिचमणपूर्वक समस्त विषय भलो भाँति जान इस प्रकारका मन्धपत्रके होते हुए मो इटियमवमें - कर जतलाने के लिए लिख भेजा। १८५२ को स्लि- एटने पयोध्यागग्य पर काला कर लिया। उसहोसौंने मानने डलहौसीको लिखा कि, राज्यमें पत्याचारक रेसिडेण्ट बाउष्ट्रामको निम्नलिखित पाणयका एक पत्र कारण नवाब वाजिद पलीती विष जैसा पभियोग लिखा, वादानुमादक समय सम्भव है, राजा पयोध्याके रुपलिता उसका एक पर भी पतिरक्षित वाव १८३००को सपियो बात है। रसित