पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२०६

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२०० घरमा-परसाइत इस प्रकार लगा होता है, कि सहजमें खूब अच्छी तरह बरवासागर-युक्तप्रदेशके झांसी जिलेका एक नगर । यह घूम सके। जिस स्थान पर छेद करना होता है उस अक्षा० २५२२ उ० और देशा० ७८४४ पू०के मध्य स्थान पर नुकोला कोना लगा कर और दस्तेके सहारे ; अवस्थित है। जनसंख्या छः हजारसे ऊपर है । इसके उसे दवा कर रस्सीकी गराड़ियोंकी सहायतासे अथवा पास ही एक बड़ा पर्वत है जिसके निम्नमें एक सुन्दर और किसी प्रकार खूब जोर शोरसे घुमाते हैं जिससे हृद है। उक्त पर्वतसे जो जल निकलता है वह इसी वहां छेद हो जाता है। हृदमें जमा रहता है । -१७०५ १७३७ ई०के मध्य ओर्छा- बरमा- ब्रह्मदे । देग्यो। राज उदित्सिंहने नगरकी शोभा बढ़ानेके लिये उक्त बांध बरमी (हिं० पु. १ ब्रह्मवासी, बरमाका रहनेवाला । (स्त्रो०)। और एक दुर्ग बनवाया था। ख्यातनामा झांसीकी रानी २ ब्रह्मदेशकी भाषा । ( वि० ) ३ ब्रह्मदेश सम्वन्धी, बरमा इस दुर्ग की शेष अधिकारिणी थी। अङ्गारेजोंके अधि- देशका : (स्त्री०) ४ गीली नामका पेड़। कारमें आनेसे वह दुग पा थनिवासमें परिणत हो गया बरम्हवोट हिं० सी० ) एक प्रकारकी नाव जो प्रायः ४० है। यहांसे तीन मील पश्चिम एक प्राचीन चन्दल हाथ लम्बी होती है । इस नावका पिछला भाग अपेक्षा- मन्दिर है जिसकी देवमूर्ति मुसलमानोंसे विध्वस्त हो कृत चौड़ा होता है और पीछेकी ओर ऐसा यंत्र बना गई है। शहरमें एक छोटा-सा स्कूल है। होता जिसे बारह आदमी पैरसे चलाते हैं। बरवै (हिं० पु०) १६ मात्राओंका एक छन्द । इसमें बरम्हा--ब्रह्मश देखो। १२ और ७ मात्राओं पर यति तथा अन्तमें जगण होता बररे ( हिं० पु० स्त्री० ) बरे देखो। है। इसे ध्रुव और कुरंग भी कहते हैं। बरवट ( हिं० स्त्री०) तिल्ली नामका रोग। तिमी देखो। बरषा (हिं स्त्रो०) १ वष्टि, पानी बरसना। २ वर्षा- बरवल (हि.पु.) भेड़की एक जाति जो हिमालय काल, बरसात। पर्वतके उत्तर जुमीलासे किरंट तक और कमाऊँसे बरपासन (हि.पु०) एक वर्ष की भोजनसामग्री, उतना सिक्किम तक पाई जाती है। यह पहाड़ी भेड़ोंके पांच अनाज जितना एक मनुष्य अथवा एक परिवार एक वर्ष- में खा सके। भेदोमेंसे एक है। इसके नरके सिर पर मजबूत सींग होते हैं और वह लड़ाई में खूब टक्कर लगाता है। इसका बरस (हिं. पु०) बारह महीनों अथवा ३६५ दिनोंका समूह। वर्ष देखो। ऊन यद्यपि मैदानकी भेड़ोंसे अच्छा होता है तो भी मा बरसगांठ (हिं स्त्री० ) वह दिन जिसमें किसीका जन्म मोटा होता है और कम्मल आदि बनाने के काममें ही आता हुआ हो, जन्मदिन । आगरे आदि प्रांतोंमें प्रत्येक है। इसका मांस खाने में रूखा होता है। व्यक्तिके घरमें एक तागा रहता है। जिसके नामका यह बरवा (हिं पु०) बरवै देखो। तागा होता है उसके एक एक जन्मदिन पर एक एक गांठ बरवासागर----मध्यभारतके इन्दोर राज्यान्तर्गत निमार हो जाते हैं। इसीसे जन्मदिनको वर्षगांठ कहते हैं। जिलेका एक शहर । यह अक्षा० २२१५ उ० और देशा०प्राचीन समयमें भी ऐसी ही प्रथा थी। ७६३ पू०के मध्य अवस्थित है। जनसंख्या छह हजार- बरसना (हि. क्रि०) १ आकाशसे जलकी बूदोंका से ऊपर है। कहते हैं, कि यह शहर १६७८ ईमें पर्शमान निरन्तर गिरना, मेह पड़ना । २ बहुत अधिक मान जमींदारके पूर्वज राणा सूर्य मलने बसाया था। शिवाजी संख्या या मात्रामें चारों ओरसे आ कर गिरना, पहुंचना राव होलकरको यह स्थान बड़ा प्रिय था, इस कारण उन्हों- या प्राप्त होना । ३ वर्षाके जलकी तरह ऊपरसे गिरना। ने अपने रहने के लिये यहां एक सुन्दर राजप्रासाद बन : ४ ओसाया जाना, डाली होना। ५ खूब प्रकट होना, वाया था। शहरमें एक सरकारी और प्टेटका डाक- बहुत अच्छी तरह झलकना। घर, एक स्कूल, चिकित्सालय, सराय और एक डाक-: बरसाइत (हिंस्त्री०) जेठ बदी अमावस जिस दिन बंगला है। । त्रियां वट सावित्रीका पूजन करती हैं।