पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२७४

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२६८ बहेचाबहोल लोदी, सुलतान वहेचा ( हि० पु. ) घड़े का ढांचा जो चाक परसे गढ़ कर | लालन पालन करते थे और मरते समय अपना उत्तरा- उतारा जाता है। इसे जब थापी और पिटनेसे पीट कर | धिकारी बना गये थे। बढ़ाते हैं, तब यह घड़े के रूपमें आता है। ___ बादशाह बन बहोलने बुद्धिवैभवसे संसार भरमें बहेड़क । स० पु० ) विभीतक वृक्ष, वहेड़ा। अपना प्रभाव फैला लिया। किन्तु चचेरा भाई बहेड़ा (हिं० पु०) अर्जुनको जातिका एक बड़ा और ऊँचा कुतुब खां इनके वशमें नहीं हो सका। उसने दिल्लीके जंगली पेड़। यह पतझड़में पत्ते झड़ता है और सिंध सुलतान महम्मदसे उनकी चुगली खाई। सुलतान मह- तथा राजपूताने आदि सूखे स्थानोंको छोड़ भारतवर्ष के म्मदने उसकी बातोंमें आ, हाजी हिसाम खांको सेना ले जंगलोंमें सर्वत्र होता है। इसके पत्ते महुएकेसे होते कर बहोलका दमन करने भेजा। विजिराबादके कारा- हैं। फूल बहुत छोटे छोटे लगते हैं। विभीतक देखो। प्रामके निकट दोनों दलमें मुठभेड़ हो गई । हाजी हिसाम बहेड़ा---दरभङ्गा जिलेके अन्तर्गत एक प्रधान वाणिज्य-! खां हार खा कर दिल्लीको भागा। स्थान। यह अक्षा० २६४ उ० तथा देशा० ८६.१० उसके भाग जाने पर वहोलने उसके विरुद्ध सुलतान ८“पू०के मध्य अवस्थित है। पहले यह स्थान उपवि महम्मदके पास एक पत्र भेजा। पत्रमें लिखा था, कि भागका सदर था। पर आवहवा अच्छी न होनेके कारण इसके अन्याय शासनसे यहांका राज्य एकदम नष्ट हो दरभङ्गा-नगरमें वह उठा कर लाया गया। गया है। दास आपके चरणोंकी सेवा करने सदा तैयार बहेड़ी-युक्तप्रदेशके बरेली जिलेकी तहसील । यह अक्षा० है। इनकी बातोंमें पड़ कर सुलतान महम्मदने हाजी २८.३५ से २८ ५४ ३० तथा देशा० ७६१६ से ७६ ४१ हिसाम खांको मरवा डाला और हामिद खांको उसकी पू०के मध्य अवस्थित है । भूपरिमाण ३४५ वर्गमील और जगह पर वजीर बनाया। यह खबर जिस समय बहोलने जनसंख्या २ लाखसे ऊपर है। इसमें २ छोटे छोटे शहर सुनी, उसी समय बहुतसे लोदियोंको साथ ले वे सम्राट और ४१० ग्राम लगते हैं। महम्मदके अभिवादनार्थ दिल्ली आये। यहां आ कर बहेतू ( हिं० वि० ) १ इधर उधर मारा मारा फिरनेवाला, ! इन्होंने अपनी जागीरका चिरस्थायी प्रबन्ध कर लिया। जिसका कहीं ठौर ठिकाना न हो । २ व्यर्थ घूमनेवाला, ___अब सुलतानकी तरफ हो कर इन्होंने मालव राजाको निकम्मा। हराया और भेंट स्वरूप खानखानाकी उपाधि पाई। बहरा (हिं० पु०) बहेड। देखो। इनकी पदोन्नतिसे राजदरबारमें लोदियोंकी खूब बहेला ( हिं० पु. ) कुश्तीका एक पेच । बन चली। इन लोगोंने बिना सम्राटकी अनुमतिके बहेलिया ( हिं० पु० ) पशु पक्षियोंको पकड़ने या मारनेका । लाहोर, दीपालपुर, सन्नाम, हिसार, फिरोजा आदि कितने व्यवसाय करनेवाला शिकारी। ही जिलोंमें अपनी गोटी जमा ली। बहलोलपुर--पञ्जाबके लुधियाना जिलेका एक ग्राम । यह सुलतान महम्मदने इनकी जड़ उखाड़नेकी बहुत चेष्टा अक्षा० ३० ३५° उ० तथा देशा० ७६२२ पू०के मध्य की, पर सभी विफल हुई। अन्तमें इन लोगोंने विद्रोही अवस्थित है । जनसंख्या दो हजारसे ऊपर है। सम्राट हो दिल्ली पर चढ़ाई कर दी। बहुत दिनों तक दिल्ली में अकबरके समय बह लोल खाँ और बहादुर खाँ नामक दो घेरा डाले रहने के बाद वे विफल मनोरथसे सरहिन्द अफगानोंने से बसाया था। लौट आये। मालिक बहोलका इसी समय सुलतान बहोल लोदो, सुलतान -दिलीके एक मुसलमान बादशाह । नाम पड़ा। किन्तु बिना दिल्लीको वश किये उन्होंने ये मालिक कालाके पुत्र थे, इस कारण लोग इन्हें अपने नाम पर खुत्वा पाठ और सिक्के का प्रचार नहीं मालिक बहोल कहा करते थे। इनके चाचा सुलताम होने दिया। शाहलोदी (इसलाम खाँ) सरहिन्दके शासनकर्ता थे। वे महम्मदकी मृत्युके बाद उनका लड़का अलाउद्दीन बहोलको सुचतुर और बुद्धिमान् देख पुत्रको तरह इनका दिल्लोके राजसिंहासन पर बैठा। इस समय पयपि