पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३२७

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


वारवा-पारवीया ३२१ माई थी। पारितोषिक स्वरूप सन्नाट्ने उन्हें इस जिलेका अक्षा० १८६२४० उ० तथा देशा० ८४३७ ३५“.. सालाक परगना प्रदान किया। १७५१ ईमें राइक- के मध्य अवस्थित है। यहांसे नाना प्रकारके म्याकी पाड़ाने विद्रोही हो कर लखनऊ पर चढ़ाई कर दी। भारतके विभिन्न देशोंमें रफ्तनी होती है। कल्याणी नदीके किनारे मुसलमानी सेनाके साथ उनकी बारवा (हिं० स्त्री० ) एक रागिनी जिसे कुछ लोग श्राराण- नहरी मुठभेड़ हो गई । आखिर खाजादागणने जयो की पुलवधू मानते हैं। हो कर उनकी कुल सम्पत्ति छीन ली। १८१४ ई०में बारवाटी -उडीसाकी राजधानी कटकके अन्तर्गत एक दुर्ग। सयावत् अली खाँकी मृत्युके बाद राइकवाड़गण अपने | यह अक्षा० २०२६ उ० तथा देशा० ८५५६ पू० कटकके खोए हुए राज्यका पुनरुद्धार करने में समर्थ हुए थे। दूसरे किनारे महानदीके दाहिने किनारे अवस्थित है। १८५२ ई में अंगरेजशासनमुक्त होनेके पहले उन्होंने किस समय यह दुर्ग बनाया गया था, ठोक ठोक मालूम एक विस्तृत राज्य संगठन किया था। देशीय राजाके नहीं । १४वीं शताब्दीमें हिन्दू राजाओंके अधिकारकालमें अधिकारमें यह स्थान अत्याचारका आदर्शस्थल हो उसका गठनकार्य समाप्त हुआ, ऐसा जनसाधारण- गया। गोमती और कल्याणी तीरवती जङ्गलमय पहाड़ का विश्वास है । १७५० ई० में मुसलमान और महाराष्ट्र प्रदेशमें सूर्यपुरके शैराज सिहजीका, भवानीगढ़के मही अधिकारमें इसके कुछ अंशोंका संस्कार किया गया । पत सिंहका और काशुनगढ़के गङ्गावक्सके दस्युसेना- अभी यह दुर्ग जंगलमें परिणत होने पर भी उसका पूष दलका दुर्भेद्य दुर्ग स्थापित था। द्वार और फते खां रहोम-निर्मित मसजिद विद्यमान है। १८५७-५८ ई०के गदर में यहांके तालुकदारगण शामिल दुर्गकी सीमाके चारों कोने पर दो स्तवक प्रस्तरमाचीर थे। नवाबगञ्जके युद्ध में सीतापुर और बराइचके और बोचमें पताकास्तम्भ था। पूर्वद्वारके निकट और राइकवाड़ोंने राजपूतोचित वीरताका परिचय दिया था। दोनों तरफ दो चतुरस्र गुम्बदका चिन्ह भी दृष्टिगोचर उस समयके कोई अंगरेज सेनापति इन लोगोंके रणो- होता है । १७६७ ई०में भ्रमणकारी मोटे (M. la Motte) न्माद और भीषण साहसकी कथा लिपिवद्ध कर गये हैं। इसके गठनकार्यके साथ इङ्गलैण्डस्थ विएडसर दुर्गकी १८५८ ई०के जुलाई मासमें यहां पूरी शान्ति स्थापित तुलना कर गये हैं। १८०३ ई०में महाराष्ट्र अभियानके हुई। दूसरे वर्ष दरियाबादसे नवाबगञ्ज जिलेमें सदर शेषमें यह दुर्ग अप्रेजोंके हाथ लगा। उठा कर लाया गया। इस जिलेके अन्तर्गत बाराबंकी, बारवाला - बम्बई प्रदेशके अहमदाबाद जिलेके अन्तर्गत फतेपुर, रामसनेहो और हैदरगढ़ नामके चार उपविभाग। एक नगर। यह अक्षा० २२८१५ उ० तथा देशा. पड़ते हैं। १५७३० पू० उतौली नदीके बायें किमारे भवस्थित इस जिलेमें १० शहर और २०५२ प्राम लगते हैं। है। यह नगर चारों ओर प्राचीरसे घिरा है। जनसंख्या ग्यारह लाखसे ऊपर है जिनमेंसे सैकड़े पीछे बारवाला-१ पञ्जाव प्रदेशके हिसार जिलेके अन्तर्गत ३ हिन्दू और १७ मुसलमान हैं। यह जिला विद्याशिक्षामें एक तहसील । भूपरिमाण ५८० वर्गमील है। गुत पीछा पड़ा हुआ है। अभी कुल मिला कर १७० | २ उक्त उपविभागका एक प्रधान नगर और विचार- स्कूल हैं। स्कूलके अलावा १२ अस्पताल और चिकि सदर । यहांका ध्वंसावशेष इस स्थानको प्राचीन समृद्धि त्सालय भी हैं। का परिचय देता है। अधिकांश अधिवासिगण सैयद २ उक्त जिलेका एक शहर। यह अक्षा० २६५६। वंशीय मुसलमान हैं। ये लोग निकटवर्ती स्थानीय उ० तथा देशा०८११२ पू०के मध्य अवस्थित है। जन अधिकारी हैं। संख्या प्रायः ३०२० है। नवाबगज शहरसे यह एक बारक्सपुर--मध्यप्रदेशके रामपुर जिलान्तर्गत एक मील उत्सर पड़ता है। सामन्तराज्य। भूपरिमाण ४३वगमील है। पारवा-बारवा राज्यका प्रधान न मोर नदर। यह बारवीधा-सरेर जिलेके मन्तर्गत एक नगर । हा . Vol. xv. 81