पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/४७६

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४७० अकाल पड़े तब हो तब लगानके चढ़े हुए लाखों रुपये रखी जाय तो बहुत दिनों तक खराब नहीं होती। यह प्रजाको छोड़ दिये और लाखों रुपयोंका नाज प्रजामें बांटा खंभे, चौखटे और धरने आदि बनानेके काममें आती है। और गरीबोंका पालन किया। इन्होंने वूदी राज्यमें गौओं- दार्जिलिङ्गके आस पासके जंगलों में इससे बढ़ कर उप- के चरनेके लिये जमीन छोड़ रखी है। महाराव राजा योगी ओर कोई वृक्ष कदाचित ही होता है। वहां इसकी रघुवीरसिंहजी जैसे धर्म मर्यादा और प्रजापालक थे वैसे पत्तियोंसे चमड़ा भी सिझाया जाता है। ही बोर धीर और उत्साही थे। इस समयके नरेशोंमें (पु०)२ चंगुल, बकोटा । महाराव गजा साहव धनुर्विद्यामें अद्वितीय थे। मिती बूकना (हिं० क्रि०) १ सिल और बट्ट की सहायतासे किसी कृष्ण १३ मंगलवार संवत् १९८४ के दिन महाराव राजा चीजको महीन पीस कर चूर्ण करना । २ अपनेको अधिक रघुवीरसिंहजीके स्वर्ग सिधारने पर इनके सहोदर लघु योग्य प्रमाणित करनेके लिये गढ़ गढ़ कर बातें करना। भ्राता महाराज रघुराजसिंहजीके पुत्र महाराज ईश्वरीसिंह यका (हि० पु०) वह भूमि जो नदीके हटनेसे निकल आती जी ही एकमात्र उत्तराधिकारी थे। ये मिती श्रावण शुक्ल है, गंग बरार। चंद्रवारको वू'दोराज-सिंहासन पर विराजे। ये हो वर्त्त- बक्का (सं० वि०) बुक्कयति शब्दायते इति बुक्क-अच् पृषो- मान राजा हैं। इन्हें १७ तोपोंकी सलामी मिलती है। दरादित्वाद्दोघः । बुक्क, हृदय । बूंदी (हि० स्त्री० ) १ एक प्रकारकी मिठाई। यह अच्छी | घूगा ( हिं० पु०) भूसा। तरह फेटे हुए बेसनको झरने से बूंद बूंद टपका कर बूच ( अं० पु०) १ बडी मेख । २ कपडे कागज या चमडे और घोमें छान कर बनाई जाती है। इसके दो भेद हैं, आदिका वह टुकड़ा जो बन्दूक आदिमें गोली या बारूद. मोठी और नमकीन । नमकीन बू'दी बनानेके लिये पहले को यथास्थान स्थिर रखनेके लिये उसके चारों ओर ही बेसनको घोलते समय उसमें नमक, मिर्च आदि मिला लगाया जाता है। देते हैं, पर मीठी वूदी बनाने के लिये बेसन घोलते समय बूचड़ ( ० पु० ) पशुओंका मांस आदि बेचनेके लिये उसमें और कुछ भी मिलाया नहीं जाता। उसे घीमें उनको हत्या करनेवाला, कसाई । छान कर शीरेमें डुबा देते हैं और तब फिर काममें लाते हैं। छोटे दानोंकी बूदोका लड्डू भी बांधते हैं जो दीका बूचड़खाना ( हिं० पु० ) वह स्थान जहां पशुओंकी हत्या होती है, कसाई बाड़ा। ल, कहलाता है। २ वर्षाके जलकी बूद। बूचा (हिं० वि०) १ जिसके कान कटे हुए हों, कनकटा । खु ( फा० स्त्री० ) १ बास, गंध, महक। २ दुर्गन्ध, बदब। २ जिसके ऐसे अंग कट गए हों अथवा न हो जिनके बूआ ( हिं० स्त्री० ) १ पिताकी बहन, फूफो। २ भारतकी बड़ी बड़ी नदियों में मिलनेवाली एक प्रकारको मछली। कारण वह कुरूप जान पड़ता हो। इसका मांस रूखा होता है। ३ बड़ी बहन। ४ मुस- बूची ( हिं० पु०) वह भेड़ जिसके कान बाहर निकले हुए लमान-स्त्रियोंका परस्पर आदरसूचक सम्बोधन। न हों, बल्कि जिसके कानके स्थानमें केवल छोटा-सा बई ( हिं० पु० ) दिल्लीसे सिन्ध तक तथा दक्षिण भारतमें छेद हो हो, गुजरी। मिलनेवाला एक प्रकारका पौधा । यह ऊमरी और खार वूजन (फा० पु०) बन्दर । आदिकी जातिका होता है। इसे जला कर सजीखार बूजना (. फा० क्रि०) धोखा देना, छिपाना । निकालते हैं। बम (हिं० स्त्री०) १ बुद्धि, समझ। २ पहेली। बक (हि.पु.) माजूफलकी जातिका एक बड़ा वक्ष। बझना (हि. क्रि०)१ समझना, जानना।२ प्रश्न करना. यह पूर्वी हिमालयमें ५००० से १००० फुटकी ऊंचाई पूछना । तक पाया जाता है। इसकी ऊंचाई प्रायः ७५ से १०० बट ( हिं० पु० ) १ चनेका हरा पौधा । चनेका हरा दाना। हाथ तक होती है। इसकी लकड़ी यदि सूत्रे स्थान पर | ३ वृक्ष, पेड़।