पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/५०१

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. वेत्त-बेदार ( विदार) धर्ममतका अनुसरण कर इस देवमन्दिरका संस्कार और फलों आदिका व्यवहार औषधमें होता है। कराया था। टीपू सुलतानके अभ्युदय तक यह स्थान बेदमल ( हिं० पु. ) लकड़ीकी वह तस्ती जिस पर तेल देशीय सामन्तोंके अधीन रहा। .. लगा कर सिकलीगर लोग अपना मस्किला नामक बेत--दक्षिण-भारतस्थ जैनदेवस्थान विशेष । यहां न कोई यन्त्र रगड़ कर चमकाते हैं। मन्दिर है और न तीर्थङ्करोंकी कोई प्रतिमूत्ति ही है। यहां बेदमाल । हिं० पु०) बंदमान देना । एक प्राचीर बोष्टित विस्तृत प्राण है जहां गोमती वा बेदमुश्क (फा पु०) पश्चिम भारत और विशेषतः पंजाबमें गोमत राजाको मूर्ति प्रतिष्ठित है। वहांके लोग उस मूर्ति अधिकतामे होनेवाला एक प्रकारका वृक्ष। इसमें एक की पूजा करते हैं। प्रकारके बहुत ही कोमल और सुगन्धित फूल लगते हैं। बेत्तुरः-महिसुर गज्यके देवनगर तालुककं अन्तर्गत एक इन फूलोंके अर्कका यवहार औषधक रूपमें होता है। गण्डग्राम । यह अक्षा० १४.३० उ० तथा देशा यह अके वहुन हो ठंढा और नितको प्रसन्न करनेवाला ७६७ पू०के मध्य देवनगर शहरसे २ मील उत्तर अव माना जाता है। स्थित है। जनसंख्या १२१० है । किंवदन्ती है, कि १३वीं बेदरी (हि. वि. ) निद बन्यो । शताब्दीमें यह स्थान देवगिरिके यादवगजाओंको अन्य- वेदर्द । फा०वि० ) कठोर हृदय, निर्दय । नम राजधानी थी। बेदी ( फा० स्त्री० ) निर्दयता, बेरहमी। बेत्वा-मध्यभारत एजेन्सोके बुन्देलखण्डके अन्तर्गत एक बेदलैला ( फा० पु. ) एक प्रकारका पौधा । इसमें सुन्दर नदी। इसका प्राचीन नाम बेत्रवती है। वेत्रवती देग्यो। फूल लगते हैं। बेतौर (अ० कि० वि०) बुरी तरहसे, येढ'गेपनसे । (वि०) बेदाग ( फा० वि० ) १ निर्दोप, शुद्ध। २ निरपराध, २ जिसका तौर तरीका ठीक न हो, बेढगा। बेकसूर । ३ जिसमें कोई दाग या धब्बा न हो, साफ । बेद ( सं० पु०) वेद देग्वा । बेदाना (हि० पु०) १ एक प्रकारका उत्कृष्ट काबुली अनार । येदक ( हिं० पु०) हिन्दु । इसकी छाल बहुत पतली होती है। २ एक प्रकारका बेदखल (फा० वि० ) अधिकारच्युत, जिसका दखल, मीठा छोटा शहतूत। ३ एक प्रकारको छोटे दानेकी कब्जा या अधिकार न हो । इसका व्यवहार सिर्फ स्थावर मोठी बुदिया। इसमें बहुत रस रहता है। ४ दारुहल्दी, संपत्ति के लिये ही होता है। चित्रा। विहीदाना नामक फलका वीज । इसे पानी में बेदखली (फा० स्त्री० ) अधिकारमें न रहनेका भाव, दखल भिगोनेसे लुआब निकलना है। लोग प्रायः इसका शर या कब्जेका हटाया जाना अथवा न होना । बत बना कर पीते हैं। यह ठंढा और बलकारक माना बेदनरोग ( हिं० पु० ) पशुओंका एक प्रकारका छूतवाला जाता है । ( वि० ) ६ मूर्ख, ब वकूफ । भीषण ज्वर । इसमें रोगी पशु बहुत सुस्त हो कर कांपने वदाम ( हि पु० ) १ बादाम दग्यो । ( क्रि० वि० ) २ विना लगता है, उसका सारा शरीर गरम और लाल हो जाता है, दामका, जिसका कुछ मूल्य न दिया गया हो। भूख बिलकुल नहीं और प्यास बहुत अधिक लगती है। बेदाम--मन्द्राजप्रदेशके गाम जिलान्तर्गत एक छोटा इसमें पाखानेके साथ आंव भी निकलती है। सामन्त राज्य । बदाम प्राम दो वर्गमील विस्तृत है। बेदम (फा०वि०) १ मृतक मुरदा। २ जो काम देन बेदार (बिदार )-हैदरावाद राज्यके गुलबर्गा विभागका योग्य न रह गया हो, जर्जर। ३ जिसकी जीवनी-शक्ति : एक जिला। यह अक्षा० १७३० से १८ ५१ उ० बहुत घट गई हो, अधमरा। तथा देशा० ७६३० से ७७ ५१ पू०के मध्य अवस्थित वेदमजनू (फा० पु. ) एक प्रकारका वृक्ष । इसकी शाखाएँ है। भूपरिमाण १६८ वर्गमील हैं जिनमेसे २१२० बहुत झुकी हुई रहती हैं। इसी कारण यह बहुत मुर. . वर्गमील जागीर है। इसके उत्तरमें नान्दर जिला, भाया और ठिठुरा हुआ जान पड़ता है। इसकी छाल ' पूर्व और दक्षिणमें नवाब सर खुरशेदजाहका पैगाह