पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/५२

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ना फतह-फते खाँ फतह ( स० स्त्री० ) १ विजय, जीत । २ कृतकार्यता, २ बह'कटी, सलूका । ३ विजय या लूटका धन, लड़ाई सफलता। । या लूटमें मिलाहुआ माल। फतहमंद ( अ० वि०) जिसे फतह मिली हो, जिसको फतेअली --तलपुरमीरोंके एक सरदार । सिन्धुप्रदेशमें जीत हुई हो। कहोराओंने कुछ दिन तक राज्य किया। पीछे फतेअली- फतहाबाद --फतेहाबाद देखो। ने अपरापरं बलूचियोंको सहायतासे उन्हें भगा कर सिन्धु फतिंगा ( हिं० पु. ) एक प्रकारका उड़नेवाला कोड़ा । यह ! प्रदेश पर अधिकार जमाया। वे एकच्छता अधिपति कीड़ा विशेषतः बरसातके दिनोंमें अग्नि या प्रकाशके होना चाहते थे। पर ऐसा नहीं हुआ। आत्मीय- आस पास मंडराता हुआ अन्तमें उसीमें गिर पड़ता विच्छेद और रक्तपातका सूत्रपात हुआ। अब फतेअली है, पतिंगा। मीरपुर आदि कुछ स्थानोंका परित्याग कर तीनों फतोलसोज़ ( फा० पु० ) १ पीतल या और किसी धातु- भाइयों के साथ हैदराबादमें राज्य करने लगे। को दीवट। इसमें एक वा अनेक दोये ऊपर नीचे बने सिन्धुप्रदेश देखो। होते हैं। इसमें तेल भर कर बत्तियां जलाई जाती हैं। फते खाँ - निजामशाही राज्यके एक सर्वश्य कर्ता, मालिक उन दोयोंमें किसीमें एक, किसीमें दो और किसीमें चार अम्बरके ज्येष्ठ पुत्र । मालिक अम्बरकी मृत्युके बाद चार बत्तियां जलती हैं। इसे चौमुखी भी कहते हैं।२, १६२६ ईमें फते खाँ निजामशाही राज्यके अभिभावक कोई साधारण दीयट. चिरागदान ।

हुए थे। पदलाभके बाद ही उन्हों ने निजाम-उल-मुल्क-

फतीला ( अ० पु.) १ जरदोजोका काम करनेवालोंकी की सलाहसे मुगलोंके साथ युद्ध ठान दिया । इधर लकड़ीकी तीली। इस पर बेलबूटा और फूलोंको डालियां श्रेष्ठ क्षमता हाथमें आ जानेसे वे धीरे धीरे अत्याचारो बनानेके लिये कारीगर तारको लपेटते हैं। हो गये । १६२६ ई०में मुर्नजा निजामशाह (२य ) फतुआ ---पटना जिलेका एक नगर और रेल-स्टेशन । यह . बालिग हुए। फते खाँके हाथ कुल अधिकार छीनना अक्षा० २५.३० उ० और देशा० ८५२१ पू० पटना ही उनका पहला काम था। उनका उद्देश्य भी फली- शहरसे ८ मील दूर पुनपुन और गङ्गाके सङ्गम पर अव- ! भूत हुआ। तक्करिव खांकी सहायतासे उन्होंने फते खाँ- स्थित है। गङ्गा सङ्गम पर बसे रहनेके कारण यह को कैद कर लिया। मूर्तजा भी उपयुक्त बुद्धिशक्तिके तीर्थस्थानरूपमें गिना जाता है। यहां वर्षमें ५ मेले , अभावसे सबोंके अप्रिय हो उठे । शाहजी भोंसलेने लगते हैं। जिसमेंसे वारुणीद्वादशीको स्नानोपलक्षमें : उनका पक्ष छोड़ कर मुगलोंका पक्ष लिया। दुर्भिक्ष जो मेला लगता है, वह सबसे बड़ा है । इस समय लाख और शत्र के आक्रमणसे वे तंग तंग आ गये। इस से ऊपर मनुष्य एकत्र होते हैं। समय मुगलसेनापति आजम खाँको उत्तेजनासे मूर्तजाने फतूर ( अ० पु० ) १ दोष, विकार । २ उपद्रव, खुरा- पुनः फते खाँको पूर्वाधिकार प्रदान किया। इस भलाई- फात। ३ विघ्न, वाधा । ४ हानि, नुकसान । का फल उलटा ही निकला । फते खाँ अभी हाथमें फतूरिया ( अ० वि० ) जो किसी प्रकारका फतूर या · सारी क्षमता पा कर मूर्तजा निजामके विरुद्ध खड़े हो उत्पात करे, उपद्रवी। गये। विजयपुरके राजाने मुगलों के विरुद्ध लड़ाई ठान फतूह ( अ० स्त्री० ) १ विजय, जीत । २ लूटका माल । ३ । दो। फतेहाने उनका साथ दिया। इस युद्ध में वे कभी विजयमें प्राप्त धन आदि, वह धन जो लड़ाई जीतने पर विजयपुरका और कभी मुगलोंका साथ देते थे इस कारण मिला हो। दोनोंकी ही निगाहमें वे विश्वासघातक ठहराये गये। फतूही ( अ० स्त्री० ) १ एक प्रकारको पहननेकी कुरती। आखिर १६३६ ई०में मुगलसेनापति महम्मदखाने दौलता- यह सिर्फ कमर तक होती है और इसके सामने बटन वादमें फते खाँको चारों ओरसे घेर लिया। निजामशाही या घुडी लगाई जाती है। आस्तीन इसमे नहीं होती। राज्यका पतन अवश्यम्भावी समझ कर फते खाँ मुगल-