पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/६७

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


फरीदपुर ह देता है। कभी कभी जलस्रोतमें नदीतीरवती कितने था। किसी ब्राह्मणके शापसे वे ढाकाका परित्याग कर ग्राम बह जाते हैं। स्थानीय प्रवाद हैं, कि गङ्गा नदीके यशोर, फरीदपुर और बाखरगक्ष अञ्चलोंमें आ कर बस पहले सलीमपुरके पास हो कर बहती थी। अभी वह गये और इस प्रकार आवाग्भ्रष्ट हुए हैं। जो कुछ हो इनका कानाईपुरकी ओर गति पलट कर पूर्वकी ओर पद्मा नामसे अध्यवसाय, कष्टसहिष्णुता और स्वदेशप्रियता आश्चर्य बहती है। जनक है। नदीके पंकसे धीरे धीरे इस जिलेकी उत्पत्ति हुई है। जिलेकी प्रधान उपज धान, पटमन, तेलहन, दलहन, क्रमशः प्रजावृन्दके आग्रहसे जबसे यहां विचार अदालत ! गेहूं और बाजरा है। गज कार्यको सुविधाके लिये यह आदि स्थापित हुई, तबसे यह सम्पूर्ण स्वाधीन जिला- फरीदपुर, राजबाड़ी और मदारीपुर नामक तीन उपवि. रूपमें गिना जाने लगा है। १५८२ ईमें मगलसम्राट भागोंमें विभक्त है। यहांकी भर्घरा नदीके किनारे प्रति चैत अकबरशाहने जब बङ्गालका बंदोबस्त किया, उस समय संक्रान्तिमें गङ्गा और कालीपूजाके उपलक्षमें एक मेला यह स्थान महम्मदाबाद सरकारके अन्तर्निविष्ट था । २री : लगता है। हिन्दु मुसलमान ईमाई आदि अपने अपने शताव्दीमें यहां मघदस्युगण भारी उत्पात मचाने लगे और अभीष्टकी सिद्धिके लिये उक्त नदी में स्नान और मानसिक आसामवासियोंने इस स्थानमें लटपाट आरम्भ कर दिया। पूजा दान करते हैं। अंगरेजी शासनके आरम्भमें १७६५ से १८११ ई० तक विद्याशिक्षाकी और लोगोंका उतना ध्यान नहीं है । यह स्थान ढाकाविभागके अन्तर्भुक्त था और लोग इसे सैकड़े पीछे छः मनुष्य पढ़े लिखे मिलते हैं। जिले भरमें ढाका-जलालपुर कहा करते थे। उस समय ढाका नगर- अभी कुल १०५ मेकण्डी, १६५६ प्राइमरी और २०७ स्पे में ही फरीदपुरका विचार सदर था जिससे लोगोंको सल स्कूल हैं। शिक्षाविभागमें कुल खर्च ढाई लाख उतनी दूर आने जाने में बहुत कष्ट होता था १८११ ई०में रुपयेसे ज्यादा है। स्कूल के अलावा जिले भरमें १६ इस अभावको दूर करनेके लिये यहां स्वतन्त्र विचार- : अस्पताल हैं। गृहादि स्थापित हुए। तभीसे यह स्थान एक स्वतन्त्र २ फरीदपुर जिले का एक उपविभाग । यह अक्षा. जिलारूपमें गण्य होता आ रहा है। - २३८ से २३१२ ३० तथा देशा०८६३० से १०.१२ __इस जिलेमें २ शहर और ५२८३ ग्राम लगते हैं। पू०के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण ८६० वर्ग मील जनसंख्या वीस लाखके करीब है। मुसलमान और और जनसंख्या सात लाखसे ऊपर है। इस विभागमें १ चण्डालगण ही यहांके मुख्य अधिवासी हैं। इन्हींकी : शहर और २२६६ ग्राम लगते हैं। संख्या अन्यान्य जातियोंसे अधिक है। मुसलमान सिया ३ उक्त जिलेका एक प्रधान शहर। यह अक्षा० २३ और सुन्नी सम्प्रदायके हैं। उनमें अधिकांश मनुष्य खेती ३७ उ० और देशा० ८६ ५६ पृ० मरा-पद्माके किनारे बारी करके अपना गुजारा चलाते हैं। अवस्थित है। जनसंख्या लगभग ११६४६ है। फकीर ___ मुसलमानोंके फराजी-मतके प्रवत्तयिता हाजी सरि- फरीदशाहके नाम पर इसका फरीदपुर नाम पड़ा है। तुल्लाने इसी जिलेके अन्तर्गत दौलतपुर प्राममें जन्मग्रहण नगरके दक्षिण ढोलसमुद्र है। इसका जल स्वच्छ, सुमिष्ट किया था। पचास वर्षके भीतर उनका मत क्रमशः सारे और स्वास्थ्यकर है । प्रति वर्षके जनवरीमें यहां एक कृषि- पूर्वबङ्गालमें फैल गया। फराजीगण सुन्नी हैं और प्रदशनी मेला लगता है। उस मेलेको प्रतिष्ठा पहले आबू-हनीफा (१) के मतानुसार चलते हैं। यहांके जो पहल १८६४ ईमें हुई। अभी उसी मेलेके प्रताप जन- चाण्डाल हैं उनमेंसे अनेक मुगल और अफगान-शासन-' साधारणमें शिल्पकी उन्नति देखी जाती है। कालमें दीक्षित हुए थे। उनका कहना है, कि वे पहले फरीदपुर -१ युक्तप्रदेशके बरेली जिलेको एक तहसील। हिन्दू समाजभुक्त थे। उनमें ब्राह्मणादि नाना वर्ण भी यह अक्षा० २८.१ से २८ २२ उ० तथा ७६ २३ और (१) कुरानके प्रसिद्ध टीकाकार। ७६४५ पू०के मध्य अवस्थित है । भूपरिमाण २४६ Vol. Xv. 10