पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/६८

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फरोदबूटी-फरुखसियर वर्ग मील और लोकसंख्या प्रायः १३०००० है। इसमें १/ वह सचमुच समृद्धिशाली प्रतीत होता है। पहले लषण शहर और ३१४ ग्राम लगते हैं। जिले भरमें यह तहसील प्रस्तुत और विक्रय करना यहांका प्रधान व्यवसाय था। पर्वतमय और अनुवर है। केवल रामगङ्गा, वाघूल और अभी रेलपथके खुल जानेसे शम्बर लवणको विशेष भाम- कैलासनदीके किनारे सामान्यतः स्वेती बारी देखी जाती | दनी होती है जिससे स्थानीय लवणका कारबार प्रायः है। यहां अयोध्या-रोहिलखण्ड रेलपथके दो स्टेशन हैं। वन्द-सा हो गया है। यहां जो कुछ उत्पन्न होता है, २ उक्त तहसीलका प्रधान शहर । यह अक्षा० २८ उसको प्रायः अन्य स्थानों में रफ्तनी होती है दिल्ली- १३ उ० और देशा० ७६ ३३ पू०के मध्य बरेलीसे शाह छार, सीसमहल नामक नवाबका प्रासाद, मसजिद मादि जहानपुर जानेके रास्ते पर अवस्थित है । जनसंख्या सात प्रधान अट्टालिकायें देखने योग्य हैं। हजारके करीब है। इसका प्राचीन नाम पुर था। राज १७१३ ई०में इस प्रदेशके शासनकर्ता वेलूचसरदार द्रोही किसी कठोरिया राजपूतने इस नगरको बसाया। फौजदार खाँ (दलेल खाँ)-ने सम्राट फरुखसियरके नाम १७वीं शताब्दीके मध्यमें कठोरियागण वरेलीसे भगाये पर इसका नाम रखा। १७५७ ई० तक वही वंश यहांके गये। किसीका मत है, कि मुसलमान-साधु शेख फरीद- अधिकारी रहे। पीछे भरतपुरके जाटोंने उनसे छीन के नामानुसार इसका वर्तमान नाम पड़ा है। फिर लिया। १२ वर्षके वाद फौजदारके पौलने पुनः पितृ- किसीका कहना है, क १७४८-७५ ई०के रोहिला-अधि- सिंहासन पर अधिकार जमाया। १८५७ ई० तक उन्होंने कारकालमें जिस शासनकर्त्ताने यहाँ दुर्ग बनवाया था, यहां राज्य किया था। सिपाहीविद्रोहके समय यहांके उन्हींके नामानुसार फरीदपुर नाम रखो गया है। प्राचीन नवाब अहमद अली खाने विद्रोहियों का साथ दिया था हिन्दूराजत्वके गौरस्वरूप यहां कितने मन्दिर विद्यमान हैं। जिससे वे अंगरेजोंके हाथसे यमपुरके मेहमान बने। फरीदबूटी (अ० स्त्री०) एक वनस्पतिका नाम। इसकी तफुज्जुल हुसेन खाँ नामक एक मुसलमानने उक्त सम्पत्ति पत्तियां वरियारके आकारकी छोटी छोटी होते हैं। इन पारितोषिकमें पाई । सिपाहो विद्रोहकालमें उसने अंग- पत्तियोंको जलमें डाल कर मलनेसे लवाव निकलता है। रेजोंको खासी मदद पहुँचाई थी। उनके वंशधर सुराज यह ठही होती है और गर्मीको शान्त करनेके लिये लोग उद्दीन हैदर आज भी उस प्रदेशका शासन करते हैं। इसे पोते हैं। राजस्व छह हजार रुपयेसे अधिक है। शहरमें एक फरीदाबाद--पञ्जावके दिल्ली जिलेकी बल्लभगढ़ तहसीलका अस्पताल है। एक नगर। यह अक्षा० २८२५ उ० तथा देशा०७२ फरुखसियर -एक मुसलमान बादशाह, आजिम उस्-शान- २० पू० दिल्लीसे १६ मीलकी दूरी पर अवस्थित है। के मध्यम पुत्र तथा सम्राट बहादुरशाहके पौल। ये विशे. जनस ख्या प्रायः ५३१० है । जहांगीरके खजानची शेख षतः फरकसे और फेरोकशियर नामसे ही मशहूर थे। फरीदने १६०७ ई० में इस मगरको बसाया था। शहरमें कुमार आजिम उस शान् जब औरङ्गजेब बादशाहके आवेश- विक्टोरिया एङ्गलो-वर्नाक्युलर मिडिल स्कूल, वर्नाक्युलर से बङ्गालका परित्याग कर दक्षिणप्रवेशको गये, उस मिडिल स्कूल और मिडिल इङ्गलिश स्कूल है। अलावा समय उन्होंने अपने मध्यम पुत्र फरुखसियरको बङ्गालका इसके एक सरकारी अस्पताल भी है। नायव सूबेदार बनाया। जब तक दाक्षिणात्यसे लौट कर फरुखनगर--पक्षावकं गुरुगांव जिलान्तर्गत एकं नगर ।। लाहोर न पहुंचे तब तक फरुखसियर बेरोकटोक बङ्गाल- यह मक्षा० २८ २७ उ० और देशा० ७६५० गुरुगांव को सूबेदारी करते रहे । ११२२ ई० (१७१० ई०) शहरसे १९ मीलकी दूरी पर अवस्थित है ।। उनकी जगह पर आज उहौला खामखाना बङ्गालके जनसंख्या लगभग छः हजार है। नगर अष्ट- सूबेदार बनाये गये और फरुखसियरको विल्ली-समाने कोण और प्राचीरपरिवेष्ठित है। चारों ओर चार द्वार; लौट जानेको कहा गया। हैं। मध्य भागमें दो बाजार हैं। नगरकी शोभा देखनेसे फरुखसियर अजीमाबाद (पटना में ) आ कर अर्था-