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पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 1.djvu/३८१

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अध्यशन—अध्यात्मिक
धानको कुटाई, जो एकबार चावलको भूसो निकल

जानेपर फिर की जाती है।

अध्यशन (सं० क्लो० ) अधिकं अशनम् । अतिभोजन ; हद से ज्यादा गिजा, जो अजीर्ण या बदहज़मी रहते भी खाया जाये । इसका लक्षण यों कहा गया है,-

“अजीर्णे भुज्यते यत्तु तदध्यशनमुच्यते ।
प्राग्भुक्त त्वनले मन्दे विरहो न समाहरेत् ॥
प्रातराशे त्वजीर्णे तु सायमाशो न दुष्यति ।
पूर्वभुक्त विदग्धेऽन्न भुञ्जानो हन्ति पावकम् ॥
सायमाशे त्वजण तु प्रातर्भुत विषोपमम् । "

(वैद्यक निघण्ट दिनचर्या)

अध्यस्त (सं० ति० ) अधि-अस-त कर्मणि । १ कृता-ध्यास, ऊपर रखा गयां । २ आरोपित, ख्याली । ३ छिपा हुआ, पोशीदा ।

अध्यस्थि (सं० क्लो० ) अस्थिके ऊपरकी अस्थि जो हड्डी हड्डीपर जमती है ।

अध्याण्डा, अध्या देखो ।

अध्यात्म ( सं अव्य० ) आत्मानं देहमिन्द्रियादिकं क्षेत्रज्ञ' ब्रह्म वा अधिकृत्य । अनश्च । पा ५।४ । १०८ । आत्मा अथवा ब्रह्मको अधिकार कर, रूह या परमेश्वरको बाबत | (क्लो०) २ परब्रह्म, परमेश्वर । (त्रि० ) ३ आत्मविषयक, रूहानी ।

अध्यात्मक वायु (सं० पु० ) न्यायमतसे प्राणाख्य वायु, हवा जिसे प्राणाख्य कहते है।

अध्यात्मचेतस् (सं० पु० ) ईश्वर का ध्यान करनेवाला व्यक्ति, जो शख्स परमेश्वरका चिन्तन करे।

अध्यात्मज्ञान ( सं० क्लो० ) ईश्वर अथवा आत्माका ज्ञान, परमेश्वर या रूहका इला।

अध्यात्मदृश् (सं०वि० ) अध्यात्मं पश्यतीति, दृश-क्विन् । आत्मज्ञ, विषयादि व्यापार-शून्य होकर जो केवल आत्माको देखे ; रूहका राज समझनेवाला, जो सब ! दुनिया के सब काम छोड़ सिपर निगाह डाले।

अध्यात्मयोग (सं० पु० ) कृत्य योगः। विषयव्यापारसे हटा केवल आत्मतत्त्वमें मनोनिवेश, दुनियाको बातोंसे खींच रूही एल टिलका लगाव।

अध्यात्मरति (स० पु० ) ईश्वर या श्रात्माके विचार में

आनन्द लेनेवाला व्यक्ति, जो शख्स परमेश्वर या रूह खयालमें मस्त रहे।

अध्यात्मरामायण (सं० क्लो० ) आत्मानमधिकृत्य कृतं रामस्य अयनं शास्त्रम्। ब्रह्माण्डपुराणान्तर्गत सप्त-काण्डात्मक ग्रन्थविशेष । प्राचीन पुराणों की उप- क्रमणिकामें बात कहनेको यह प्रथा रही, कि कलिकाल में जब पृथिवो पापभारसे भारी पड़ती, तब जीवके परित्राणका क्या उपाय होता था। अध्यात्मरामायण के आदिमें भौ लेखकने यहो प्रथा पकड़ गल्पको आरम्भ किया है । नारदने ब्रह्मा के पास पहुंच पूछा, कि कलिकालमें लोग नाना प्रकार के पापकर्म करेंगे ; उससे उनके निस्तारका क्या उपाय है? कमलयोनि ब्रह्माने कहा, कि एक समय महादेवने पावँतोको अध्यात्मरामायण सुनाया था ; कलिके लोग वह उपाख्यान सुननेसे हो मुक्त होंगे। लेखकने यह भूमिका बना वाल्मीकिरामायणकी स'क्षेपसे दूसरी कथामें नकुल उतारो है। यह नहीं कहा जा सकता, कि अध्यात्मरामायणका प्रकृत लेखक कौन था। जो हो, पुस्तक अधिक पुरातन नहीं । आदिकाण्ड में लिखा है, -

"बहुना किमिहोक्तेन शृणु नारद तत्त्वतः ।
श्रुतिस्मृतिपुराणेतिहासागमशतानि च ।
अर्हन्ति नाल्पामध्यात्मरामायणकलामपि । ”

'हे नारद! इस विषय में अधिक कहने से क्या फल है ? मैं मुख्य बात कहता ह, सुनिये । शत-शत श्रुति, स्मृति, पुराण, इतिहास, आगम प्रभृति अध्यात्मरामायणको एक अल्प कलाके बराबर भो नहीं हो सकते।'

अध्यात्मविद्, अध्यात्मदृश् देखो।

अध्यात्मविद्या (सं० स्त्रो० ) अध्यात्मज्ञान देखो।

अध्यात्मशास्त्र (स० क्लो०) अध्यात्मप्रतिपादकं शास्त्रम्। शास्त्रग्रन्थ जिसमें अध्यात्मयोगादिका विषय लिखा हो।

अध्यात्मा (सं० क्लो० ) परमेश्वर, भगवान्।

अध्यात्मिक, आध्यात्मिक (सं० त्रि०) परमात्मा अथवा जीवात्मा सम्बन्धीय, जिसका लगाव ईश्वर या रूहसे हो।