पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/१०७

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१०४ रोहम-रोहिणी मकेश बडे यत्नसे रखा हुआ है। प्रति वर्ष चैत्र था, जिन्तु अभी ममुद्रतटकी अवस्था बदल जानेसे मासमें वह केश दिवाने के समय एक छोटा मेला लगता । घाणिज्यका यान कुछ हाम हो गया है। उसीसे यहाँका छोटा दुर्ग काममें न लाये जानेके कारण टूटी फूटी १८५५ ई०में यहा म्युनिस्पलिटी म्यापित हुई। अवस्थामें पड़ा है। तमीले यहाँकी आवहवा अच्छी है। नाथ चेष्टर्न ऐट- रोहि ( सं० पु०) रोहतीनि रुह (पिपिमहीति । उण रेलवेके खुल जानेसे वाणिज्यवृद्धिके साथ साथ नगरके । ४।१।१८ ) इति इन् । १ वीज । २ वृक्ष, पेड़। ३घ्रती, भी सौन्दर्य और समृद्धिकी वृद्धि हुई है। रेलपथ जाने- तपम्वी। के लिये नगरके सामने सिन्धुनद पर लाहेका पर सुन्दर रोहिक ( स० पु०) वनगेदि नामक मृग । इसका मांस पुल बना है। मलबत्तेसे घाराची बन्दर जानम रोहरीकै दिन और वलकर यात और ग्लेमाप माना गया मध्य हो कर जाना पडता है। रोहरीके दूसरे किनारे है। (अत्रिस० २२५०) सिन्धुवक्षस्य चरके ऊपर पीर स्वाजा विजिरका पीठ-गेदिकाप्रिय (सं० पु०) महाज। स्थान है। यहां हिन्दू और मुसलमान एक साथ पूजा रोहिण (सं० पु०) गेहतीति रह (महेश्च । उया २।५५ ) करते हैं। शहरमे सब जजकी अदालत, एक अस्पताल इति इनन् । १ कालभेद । दिनके नवें मुहर्तको रोहिण और चार स्कूल हैं। पहने हैं। इस समयके बीच एकोदिए श्राद्ध नहीं करना रोहस् (सं० लो० ) उच्च प्रदेश । चाहिये। फुतपमुहर्नमें श्राद्ध शुरु कर रोहिणकाल के रोहन्मेन ( स० पु०) मृच्छकटिक नाटकोक्त एक व्यक्तिमा अन्दर शेप करे। ( श्रादतत्त ) इसका दूसरा नाम रौहिण नाम । भी है ।(पु०) २ भृतृण, रोहिन घास । ३ वटवृक्ष, वड़ रोहा-१ बम्बईप्रदेशके कोलावा जिलेका एक उपविभाग। का पेड । ४ रोहितक वृक्ष, रोहितका पेड़। ५ पुराणा- यह अक्षा० १८१७ से १८२ उ० तथा देगा०७२। नुसार शाल्मलद्वीपके एक पर्वतका नाम (मत्स्यपु०- ५७ से ७३२० पू० के मध्य अवस्थित । भूपरिमाण १२१६६ ) ६ कटफल वृक्ष, गूलरका पेड। २०३ वर्गमील है । इसमे रोहा नानका १ शहर और १३३ . १३३ रोहिणि (सं० स्त्री०) रोहिणी नक्षत । प्राम लगने है । जनसंख्या ५० हजारके लगभग है। दम- रोहिणिका (सं० स्त्री०) रोहिण्येव स्वार्थे कन् टाप, का अधिकांश स्थान पर्वतमय और जंगलावृत है। केवल कुण्डलिका नदी प्रवाहित उपत्यका-प्रदेश ही । हस्यश्च । क्रोधसे लाल स्त्री। उर्वरा है। रोहिणिनन्दन ( स० पु० ) रोहिणोपुत्र, बलराम । २ उक्त उपविभागका प्रधान नगर । यह अक्षा १८ रोहिणिसेन ( स० पु०) रोहिणी नक्षत्र के चारों ओर २६३० तथा देशा० ७७ पू०के मध्य कुण्डलिका नदी अवस्थित तारामण्डली! के वार किनारे अवस्थित है। जनसत्या ६ हजारले रोहिणी (सं० स्त्री०) सह इनन, गोगदित्वात् ङोप । ऊपर है। रोहासे शस्यभंडारसे बम्बई नगरमे चावल १ स्त्री गरि, गाय । २ तडित्, विजली। ३ कटुम्भरा, भेजा जाता है । १६७३ ई०में टापसे गडेन इस स्थानका अटुका, कुटकी । ४ सोमवल्क, गटा१५ महाश्वेता, सफेद 'Esthemy" नामले उल्लेख कर गये हैं। उस समय कौवाटोंठी ।६ लोहिता, लाल गदहपूरना। ७ जैनोंकी इसकी वाणिज्य-समृद्धि भी अच्छी थी। विद्यादेवी । ८ काश्मरी, गंभारी । ६ हरीतकी, छोटी लंबी रोहार-वम्बईप्रेसिडेन्सीके कच्छप्रदेशके बजार विभाग-! पोली हड जो गोल न हो। १० मञ्जिटा, मजीठ । ११ एक के अन्तर्गत एक प्रधान बन्दर। यह बजार नगरसे १२ प्रकार कपिल वर्णकी हड जो गोल और दस्तावर हो। मील पूरबमें अवस्थित है। १८५८ ई० मे २ हजार मनका १२ वसुदेवकी स्त्री जो वलरामकी माता थी।ये कश्यप- योमा लाद कर जहाज इस बंदरम मामानीसे माना जाता पत्नी सुरमिक अंशसे उत्पा हुई थी। (हरिव श) १३