पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२८३

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


-- लाला लाजपत राय बारें पञ्जावो हर शहरों में वक्तृता देने फिरते थे। टम लाला हसगज उक्त झालेजके अध्यक्ष थे । लाली कार दश वर्ग बनने पर नृताका फट दिखाई पड़ने । हंसराज और आप आर्य-समाज तथा आर्य-समाजके प्रति लगा। उन्होंने हिन्दू समाजके अनेक कुलस्क गेली ठित विद्यालयो और अनाथालयोंके प्राणस्वरूप थे। निन्दा की थी। इसमे बटुतरे हिन्दू उनके विरुद्ध हो गये लला हमराजहा उद्देश्य था अपने उद्योग और परि- थे । वामोजोने अयो-माज नामक एक समाज प्रतिष्टा श्रमको एमाज और समा के प्रतिष्ठित किये हुए विद्या किया था। पंडित गुल्दत विद्यायी, लाला हंसराज लयो तथा आश्रमों की देख रेखमे नियोजित करना। और लाला लाजपत राय ये तीन नवयुवक आर्य समाज परन्तु लाला लाजपतका कहना था. कि धर्ममन और पूरे कट्टा थे तथा इन्होंने ही इसके चलानेका कुल मार | सामाजिक आचारमें सब पक नहीं हो सकता । इसलिये अपने हाय लिग था। आप तीनोंने १८ ई०की पहली देशको सार्वजनिक मलाई के लिये राजनीति की चर्चा जनको लाहोरमें दयानन्न एगलोवेदिक कालेज म्यापित करना उचित है। सुतरां मापने गजनीति अवलम्बन की पिया निमग आज भी एम० ए० तककी शिक्षा दी जानो, यो । परले हो कहा जा चुका है, कि सर सैयद अहमद है । पञ्जाद विश्वविद्यायसे भी उक्त विद्यालयकी मजरो हो कांग्रेसका पक्ष छोउ विरुद्धता करने लगे और लाला राया गई। कुछ समय बाद देशाय भावने शिक्षा देने का बन्दो- किशनने उनके आचरणका प्रतिवाद किरा या । १८८८ यस्त हगा। तीस वर्ष पहले भारतवार में कही मो ऐसा ई मे लाला लाजपत गय पहले राजनोनि क्षेत्र में उतरे और दन्दोवस्त नहीं था। इस समय लाला लाजपत राय हिनार लेयर साहब के पूर्व तया बाद के मतोंको लेकर सवाद- नगरमें वकालत करते थे। उनके मित्र तथा दयालु-हार पत्रोंम वहुन पत्र लिया करते थे। पत्रके इन्तमे अपना लाला लाग्यपन गयने जो धन कमाया था, कुल देगको ' नाम इस तरह देते थे,-(The son of an old follo मल ई और शिक्षाको उन्ननिमें दे दिया । उस धनग्गे आप- Ter of your- ) अर्थात् 'आपका एक पुराने शिष्य ने आर्य-समाजको वडी ही उन्नति की यो। १८६२ ई० । का पुत्र ' लालाजीके पिताने एक उर्दू अवधारमें आप हिमार छोड लाहोर वकालन करने आये। यद्यपि 'बलीगढ पालिसी' नामक एक प्रवन्ध लिख कर सर आप हिसार स्युनिन र ट-बोर्ड सेकेद्रग थे, तो भी आप- सैयद अहमको प्रतिवाद किया था। को बना छोटे काममे मन न लगा । आप बड़े उत्साह पहले पहल सर सयटके राजनैतिक मतसे लाटाती गं अपना जीवन वृहत कार्य अविवाहित करने के लिये : का चरित गठिन हुआ था, लेकिन पीछे आपने मामिनी पक्षावका केन्द्र लाहोर आये। वहा आ कर आपने दया- : (Mazam) और गारोबल डी ( Garibaldi ) नामक नन्द कालेज और आर्य समाजके कार्यों में विशेष मनोयोग दो इटालियन स्वदेश भक्तों और शिवाजौका चरित्र पाठ दिया। पहले पता यहां तक कि आर्य समाजीनमी करके अपना चरित्न उनके जैसा बना दिया। आप लालाजीको वडा निरत्साहित किया था, लेकिन आप शिवाजी और श्रोहणका चरित्र-विवरण दिस गये हैं। उसने जग मी विचलित न हुए, और अदम्य उत्साहसे १९०१ ई में गवर्म एटको ओरल फेमिन मोशनमें काम करने लगे। इसके फलस्वरूप आर्य समाज की सालाना, लालाजीका व मान लिया गया था। सर आन्टोनी लाग्यो रुपये की आय बढ़ गई। सम्प्रति एक कालेज, मेकडोनेलने लालाजी के बयान पर निर्भर करके कमी- १६ उच्च अगरेजी-विद्यालय, बहुत सी कन्या-पाठमाला, गनके बहुत प्रस्तावोंका परिवर्तन कर दिया। उन फिरोजपुरमें एक बड़ा अनाथ आश्रम और कई जिलों में प्रस्तावों में अनाथ बाल को ले कर जो व्यवस्था हुई थी, वरत से छोटे अनाथ आश्रमोंका खर्च उसी रुपये उससे हिन्दू समाजका बड़ा उपकार हुआ । १६०५ ई०के चलता है। इस उन्नतिके मूल एकमात्र लाला लाजपत अप्रेल महीनेमे भूडोलसे कांगड़ा जिले में भारी नुकसान राय और लाला हंसराज थे। पडित गुरुदत्त विद्यानि पहुंचा था। इसमे आपने आर्यसमाजकी ओरसे चंदा २५ वर्णको उम्रम ही अपनी जीवनलीला संवरण की थी। घसूल कर उन लोगोंको खासी मदद पहंचाई थी। कड