पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२९८

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लाहोर था। यहा रह कर उनके येरे खुरारून पिता के विरुद्ध औरङ्गजेयके अत्याचारसे पीडित दो कर राहोर तलवार उठाइ था। नदागोरके रानत्व कालमें आदि मायके पासो लाहोर छोड़ कर भाग गये । उसके राज्याधिकार सङ्कलयिता सिपन्न गुरु गर्नुनमा यहाक कैदखानेमें | के पहले जहानाबाद (वर्तमान दिल्ली ) नगर म्यापन मरे थे। मुगल राज प्रासाद और राजा रणजिसिह / कालमें भी कइ (राजकर्मचारी और राजानुगृहीत शक्ति) के भजन मन्दिरफे वोत्र धर्मार्थ नावनदानकारी लाहोर नगर शन्य कर वहा जा कर बस गये। जहाना सिपम्व-गुरु अर्जुनका समाधि मन्दिर विद्यमान है। वाद प्रतिष्ठित होनेके वाद मुगल सम्राट प्राय दो लाहोर बादशाह जहागीरने यहाके प्रसिद्ध साय गाद या विधाम नगरीमें भाते न थे। इससे इसकी भावी उन्नतिका स्थान, मोती मसजिद और अनारकलीका समाधि पथ अवरुद्ध होते देख यहाफे रहनेवाले घोरे धीरे वहाले मन्दिर बनाया था। जहागीरका रातमहल हारती नदी भागने लगे। केतर पर अपस्थित है। सन् १८४६ ३०में लाहोर नगरमें अगरेजोंक (Coun शाहदराम बना जहागीरका भजनाथम या इबादत al of Regency ) समा प्रतिष्ठित हुइ और सन् १८५६ लाना लाहोरका एक प्रधान भूषण है । मुमलमान १०में महाराज दिलीपसिइने इट इण्डिया कम्पनीके हाथ राजाभों और सिक्खोंक उपद्रवोंमे इसकी युरी हालत हो मलाहोरका शासन मार अर्पण कर सिहासन त्याग रही है। इस इमारतफे समाधि स्थलमें जो सदा । किया था। तपसे लाहोर अगरेजाधित पक्षाय प्रदेश मरमरफा युज था, उसे औरङ्गनेव उखाड रे भागा। की रानधानीक रूपमें गिना जाने लगा। इधर अगरेज जहांगीरकी प्रियनमा पतो नूरजहान और सारा आसफ | अधिकारी भी इस नगरकी उन्नतिमें दत्तचित्त हुए । नवसे नाके समाधि मन्दिरके मरमर मन्दिरों और नाना रगोंक | यह नगर उनत हो रहा है। मोनारों के शिलाको सिषक्षों। लूट लिया। इससे पद | ___ सन् १८४६ में अगरेजोंके अधिकारमें आरोक सम्पूर्णरूपसे श्रीहीन हो गया है। बाद मी इम नगरके चारो ओरके स्थान टूटे फटे इस जहागारके महल की वगरम उसके पुत्र शाहजहानने न मकानोंके खण्डहरोंसे परिपूर्ण था। पहलेसे यूरोपियो पक छोटा सा महल बनाया था। इस समय भी इस की वस्ती नगरके दक्षिण मोर बनी थी। पीछे धीरे धीरे की शिल्पशोभा देख पड रही है। इसके मरमर पत्थरों ये पूतीमार पढ गह और जो स्थान पहले खण्डहर पर सफेद चुनेका काम हुआ है। इससे सिपात भ्रममें | और ज ग था, यह नाना रगको महालिकाओ से पूर्ण पद पर सफे मरमको उठानेसे वाज आये थे। उक्त हो गया। इसके बाद यहा नये नपे भवन बनोसे इस सम्राट्ने "पागाई" महलकी वाइ दगलमें पारितको नगरकी श्रीवृद्धि हो रही है। तरह लम्बी लम्बी अट्टालिकाय वनवाई थी। इनके बीच ___ वर्तमान लाहोर नगर प्राय:६४० एकड जमीना पैला में 'समान यज' नामक एक कोना किला है। उसके | हुमा है। यह प.ले प्रायः ३० फीट उच्च इटोको घदार वीच भागनौ वडा पर चादनी मोर मूत्यवान् पत्थरोंस दीवारीसे घिरा था और इसके चारों घोर साई पोदी पोदित पुष्पमा ठादि शिल्पचानुप्से परिपूर्ण है। इस ! | गह थी और नगररक्षणोपयोगी किला, घुरुज भी यन के बनानां नौ लास दापा l टुमा था, इमसे लोग | | थे। पाछे यह साइभर दो गर भोर ३० फोटकी ना इसे नौलखा करत थे। इसीको बगर में 'शीस महल' नामक महल है। महाराज रणजिस् सिह यहा चहारदीयारी हट फूट कर गय १६ फोटकी रह गई है। चहारदीवारीक चारो ओर साइके स्थानमें माना जातीय यैठ पर पैदेनिक और सामत राजामोंकी अपना | वृक्षों में पोरशोमित हो रहे हैं। फेयल नगरका उत्तर माया उनके भेजे दुनों के साथ भेट करत थे।इसी माल में पैठ उनके यो दिलीप सिदन अगरेज सरकार हाप माग यक्षोसे वाली है। पापा राज्य भार सौंपा था। इसीलिये अगरेजी राबतो दोके फिनारेमें यद गर स्थापित होने पर रिपेयह महल बहा प्रिय है। | माज कलका नगर स्थान उच्चस्तरमें परिणत हुआ है।