पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३६२

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लैटिन लोककथा ३१७ स योगो है, यह इसका विरोधी है यह इस समयाची । है और साधारण कम्बल्से कुछ अधिक ल था और है आदि इस प्रकारका छान लैडिहान कहलाता है। चौडा होता है। इसको बुट माय दुसुत्तीको मो इसोकोन्यायमें अनुमान कहते हैं। होती है। रेटिन-पूर्वकालमें इटली में योला जानेवाली एक भाषा लोयाजन (हि.पु.) यह कल्पित अजन जिसे बाखमें पिसो समयमें सारे यूरोपमें यह विद्वानों और पादरियों । लगानेसे मनुष्यका अदृश्य होना माना जाता है लोपा की भाषा थो। इस भाषाका साहित्य बहुत उन्नत या| जन । और इसीलिये अब भी कुछ रोग इसका मध्ययन करते लोकदा (हि.पु.) विवाहमें कन्याके डोलके साय दासीको भेजना। लैन (अ. स्त्री०) १ सोधो लकीर जिसमें लम्बाई मात्र | लोक दो (हिं ० स्रो०) यह दासी जो क्न्याके पहले पहल हो। २ सोमाकी लकीर । ३पति, कतार । ४ पैदन | ससुराल जाते समय उसके साथ भेजी नाती है। सिपाहियोंकी सेना । ५ सिपाहियोंके रहनेकी नगह, | लोक (स० पु० ) ठोक्यते इति लोक घर। मुवा। पारख लोक सात है, सप्तलोक, भौंक, भुरोक, खाक या (दि. पु०) भगहनमें क्टनेवाला पर प्रकारका धान, महर्लोक, जालोर, तपोलोर शोर सत्यलोक । (ग्निपु०) जडहन, शाला। सुश्रुतमे लिखा है कि लोक दो प्रकारका है, रथावर हैडर (म० पु०) एक सु गधित तरल पदार्थ । यह पर और जङ्गम । वृक्ष, ठता और चूण आदि स्थावर तथा पौधे फस निकाग जाता है। यह इतरफी तरह पशु, पक्षी, कार, मनुष्य आदि जगन है। यह स्थावर फपोंमें, या ढक पहुचानेके लिये सिरमें रगाया | और जलमरूप लोक उष्ण शीत गुणभेदसे पुन मान्न य जाता है। और सौम्य हा दो प्रकारमें निभान है। गया क्षिति, रेस (अ.पु.) यह प्रमाणपत्र जिसके द्वारा किसी | 13, अग्नि, वायु और आकाग इन पञ्चभूनके भेदसे पास मनुष्यको विशेष अधिकार दिया जाता है, समद ।। प्रकारमें विभक है। इन दोनों लोकोंके मध्य भूतकी लैस ( म०वि०) १ वदों और हथियारोंसे सजा हुआ, | उत्पत्ति चार प्रकार हैं जैसे बदज अएडजा, उद्धिन तैयार । (पु.)२ कपडे पर चढानेका फीता। एक और जरायुज । एषमान पुरुप इन सघ लोगोंके गधि प्रकारका वाण | इसी नोक रम्बी और बडी होती है। छाता हैं । (मुधर घूवस्था १०) ४पक प्रकारका सिरका ५मानो। जो पुण्यकारी हैं उई उत्तमठोर और जो पापकारी लौं (दि. अथ०) लौ देतो। है उह अधम लोक जाना पड़ता है। पुण्यात्माक रिये लौंडी (दि.मो०) काका लोलक। नाना प्रारके अति विचित्र और पयिन लोग ये सब लौदा (हि.पु.) पिसी गोले पदार्थका वह अश जो | लोक धाममय अति विचित्र है। डले की तरह यधा हो। (अग्निपु० वराह प्रादुर्भार नामाभ्या०) तो(हि. अश्य०) एक अपय। इसका प्रयोग श्रोताको २जन आदमी । ३ स्थान, निवासस्थान । ४ प्रदेश सम्बोधन परके उसका ध्यान अपनी ओर आकृष्ट पिया दिशा । ५ समाज । ७ प्राणो। ८ यश, कीर्ति । जाता है। लोक (हि.पु०) पर प्रकारका पक्षी जो घचम्बसे बडा लोर (दि. सो०) १ प्रमा दौप्ति । २ शिक्षा, स्वा । और धारो रंगका होता है। रोह (हि. स्त्री०) १ गुधे हुए आटेका उता अशजो लोभएटक (स.पु.)१ मद लोक, पराब आदमी। एक रोटीमानक लिये निकाल र गोलीके आधारका २दोषी व्यचि, दुए प्राणी। बनाया जाना है और जिसे घेल कर रोटी पनाते हैं। शेषफया (स० सी० )१ प्रचलित प्रमाद, किया । २एक प्रकारका कम्बल। यह पतले उनसे घुना जाता २ नीतिमूलभ गल्प।