पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३८४

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३८६ लोह-लोहकण्टक रायलौह, रास्नादिौद, फाञ्चनाभ्ररम, पारिशोपणरस, | नायरस, ताम्नेश्वरवटी, अग्निकुमारलौह, यदरिलौह, सर्वातोमदरस, विक्टवाद्यगेद, कटुकायलोह, खूपणाध मृत्युञ्जपलौह, प्लीहाशादूल, प्याहारिरस, यशोहररस, लोह, सुराय लौह, नित्यान दरस, भगन्दरहररस, पञ्चामृतरस अग्निमुपलौह, चयादिलोह, पञ्चामृतचूर्ण, पुष्ठकालानलरस, महातालेश्वररस, अम्लपित्ता तारस, नवायस लौह, योगराजलौह लौहामृत, पञ्चास्यरस लीलाविलासरस, पानीयमकवाटिका, क्षधावतीस्टी, | मृगजरस, वप्रेश्वररस, प्राणत्रापारस, कामकलारस, कालागिरद्ररस, मत्राशनिरम, नयनामृतरम, तिमिरहर चित्रकाद्यचूर्ण, भूदाररस, गोडारस कृष्णाचलौड़, गृह लोह, शिरोवतरस, चन्द्रकान्तारस, महालक्ष्मीविलास त्रिफलाधलीह, गैगुडिशा, मलायगुडिका, लोहगुग्गुल रम, प्रदरान्तालीह महाराजनृपतिबालभरस पृहदान मूवरच्छ हरलोह, श्य धादिरोड, मेघरखरस, मेघद्विरद कुमाररस, पहलङ्गादिवटी, मिशालानलरस, पृमि रस, शुक्रमातृकायटिका, उदरारिरस उदशारिलोद, रोगादिरस विज्ञापलौह, बैलोषयसुन्दररस, चन्द्र गोयोदरारिगौड़, अग्निगर्भगरिका, यत्प्लोदोदरहर सूयात्मरस, आमलषयावलौह, शतमूलाधलीह, रन । लौह, श्लोपदारितीह प्रणगताकुश, कारणघ्नवटी, एके गर्भपोटलोरस सर्याङ्गसुदररस, रत्काञ्चनाभ्रोह, श्वरम, कुठा तारस, चेनालास, कुष्टशैले हरस, सर्ग मृत्युञ्जयरस, महामृत्युञ्जयरस, प्रदरा तरस सूति । समलोह, अमृताकुरलौह, लामृतलौह फालपचूर्ण, कानमहायटो, रसशार्दूल, वृहद्रसशादू, मोमरुद्ध रसाभ्रचूर्ण, भरपारगुडिया, शतुवरस, सुरसुन्दरी रस, धोम मथरस, महेश्वररस, पूर्णच द्ररस, काश्य गुडिया, मृतसञ्जीवनीगुडिका, महाकामेश्वरमोदक, घरलौह पृहन्पूणव दरम, मारध्वज, घसात वृहत्कामेश्वरमोदक मदनम दीपपूर्ण, कामदूतरस तिठारस, वसन्तकुमुमारास, नीलाएठास, मदनसुदररस, रत्नगिरिरस, नरवरेभसिह पीयूप महानीयएउरम शिलाजत्यादि लौह यमकेशरिरस, मि दूररस, पडाननरस, भल्लातलोद, पाण्डुगजकेशरी, गृहय हामृतरस, क्षपकेशरी, वृद्से द्रगुडिका, पित्तका पाण्डुनिप्रदरस, मेहसुदररस विहरिद्रावलोह, काल सान्तारस, फाससंहारभैरन, लक्ष्मीविरासरस, साय पएटकरम, सौहाभयाचर्ण वृहत् पानीयमरगुडिका, भीमरस, महोदधिरस, जयागुडिका, यिनयागुडिका, | अगस्विरम, पैश्यााररम, और पुए यश।। स्वच्छन्दभैरव, श्रीच द्रामृतलौह, विजयावटी, लौइपर्पटी , रसे सारसप्रइके मतसे सामान्य लोहयो अपेक्षा रस पिपुरावलोह, श्वासकासचितामणि भूतावुशरस क्रौञ्चलौद द्विगुण गुणयुन क्रोक्षसे कालिङ्ग भएगुण, उमादमञ्जरी इद्रग्रह्मटो पातगजाकुश, पृहद्वातगजा कालिगस भद्र शतगुण भद्रस बस सहनगुण यजसे कु, यातनाशनरस, चातकएकरस, चतुर्मुसरस, गग पान्ति शतगुण पातिसे निरङ्ग दशगुण और निरनसे नादिवटी, श्लेष्माशैलेन्द्ररस, गुड च्यादि रोत, पित्ता तक | कातिलोह सहस्रकोटि गुणयुक्त है। रोदेके जार जो रस महापित्ता तपरस राडल्याच लोद, यातरजातक मल जम जाती है उसे गएडूर कहते हैं। इस मण्डू का रस आमवातारिवटिका, आमवातेश्वररस, दाराधीह, मी गोपन, व्यवहार होता है । रसेन्द्रसारस०) आमवातगजसिहमोदक, सप्तामृतलीह चक्ष ममलौह, वालणकी है।हपात्रम भोजन नहीं करना चाहिए । शूगजलीह, विद्याधरान वृद्विद्याधरान शलपनिणी करनसे र रव नरक प्राप्त होता है। यटिका, गुल्मकालानररम, महागुल्मकालानलरस गुल्ल ३लक्षणाचित काला या लाल पारा (मनु २२७२) शार्दूल, सभ्वररस पणाचलौह हरिशङ्करम | ४ एक पहाडीज ति। मेहमुद्गररस, मेघनादरस, चन्दप्रमावटी, मेहमान, गेह । (को०) ५रकरण, लाल। (भार ११ १६।२३ ) फगरी, योगेश्वररस, तारकेश्वारस, गानादिलोह सोग (को०): भगुरु भगर घृक्ष । नाथरस गृहसोमनाथरम, मोमेश्वररस वडवाग्निनगह | लोहक (स० पु० को०) लोह देखो। वैश्वानरोपटी, रोहितग्लोह, लोकनाथरस, वृहल्लोक | लोहक एटक (स.पु.) मदनरक्ष। Vol xx 98