पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५७२

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वाम-बम्बई ५६३ तथा चीनी मिलाकर पीनेमे यमि तथा अतीसार रोग । करके, उसमें थोड़ा सा मधु मिला कर सेवन करने का नाश होता है। जामुन तथा मामक पनोंसे काढा । स मिरोग दव जाता है। भुनी हुई मूग १ पल, - तैयार करके ठढा होने पर उमम लाइक चूण तथा मधु जल २ सेर शेष २ पल, लाइका चूर्ण २ पल तथा घोडा मिला कर पीनेमे उष्मानन्य यामि, मतासार तथा पिपामा मधु और चानी मिला कर उस जलको पानसे वमि अती दूर होती है। सार, तृष्णा दाह तथा पर निधारित होता है। इसके पोप की छाया मम्म जमाल कर पीनेसे अति । अतिरिक्त इलायचीचूर्ण रमे द्र, पध्वजरस तथा पद्म दुसाध्यमिगेग भी आराम होता है। इलायची, लवग, का घृत प्रभृति घमन रोगको अत्युत्तम दया है। नागकेशर, येरको आठोस गूदा, लाया, प्रिय गु मुस्तक, (मपञ्चरत्ना० अमिरोगाधि) रक्त चन्दन तथा पिपलो इन सब चीजोका घराघर परावर इस रोगका पथ्यापथ्य-चमि होने पर आमाशयमें माग चूर्ण फरफे मधुके साशवानेसे पातज, पित्तज तथा घेदना होता है, इसलिये पहले लघन देना उचित है। कफ ये तीनों प्रकारके यमिरोग छूट नाते हैं। चमन घेग का जाने पर जल्द हजम होने वाला तथा रुचि पीमत्स घमिरोग हृदयप्राहो वस्तुओंस दोहदज , कारक भोजन पशा देना उचित है। घमनका धेग घमिरोग इच्छित फसे तथा मामज चमिरोग लघनसे | रुकत हो यदि आहार देनेको आवश्यकता होचे, तो भुनी आराम होते है । उद्दारकी अधिस्ता साथ यमि हुह मूगके काढ़े के साथ लाइका चूर्ण मधु तथा चीन होनेमे मूळ, धनिया मुस्तक, जेठा मधु तशा रसाशन मिला कर खानेको द सकते हैं। इस तरह हारनेसे का चूर्ण समभाग ले कर मधुक साथ चाटनेस साधारण | यमन भेद, घर, दाह और पिपासाको शान्ति होती है। घमि दूर होता है। यह रोग सौप लवण, कृष्णजारा, चमनवेग कक जानेके पाद सदनोय समो वस्तु मेजिन पर चीनी तथा मरिचचूर्ण घरावर भाग ले र मधुके साथ | सकते हैं पय ज्वरादि उपसर्ग न रहन पर अभ्यासानु चारनेमे मा आराम हो जाता है। मार स्नानादि भी कर सकते हैं। स्वच्छ पान, ___ारियल पानी, भूदा पाजलो हुह रोरो भि गाया स्वच्छ स्थानका वाम पय मन प्रफुल्लता मादि म हुआज मधया परफतापानी यमन निवारणको उत्कृष्ट रोग विशेष लाभ पहुचाती है। जिन सब कारणोंसे भौषध है। बडो इलायचीश काढा सेग्न करनेमे घृणा पैदा होती है, ये सब कारण नया रोद्रादिफे भातप घमनरोग गाय ही दूर हो जाता है। रानिमें गुरुचको सेवन प्रभृति इस रोगमें बहुत हानिकारक है। जनमें भिगो रपे, प्रात काठ उस जठको मधुक । । शलरोग तथा अग्लपित्तरोग, यमन करानेसे ही साथ पोधे ता सब प्रकारक बमिरोग दूर हो जाते हैं। गम होता है। खेतप्पडा, पिल्बमूल या गुलचा काढा मधुक साथ धमति उदगिरति धूमादिकमिति "इफ ध्यादिम्य" पच मूळ मूलका पादा चावल्के पानोक माप सपन इति इक् । २ अग्नि। ३धृत। करनेसे मय तरफे यमिरोग आराम होते हैं। जेठो मधु यमित (सं०नि०) धन-क। १ जिसको यमन कराया गया तथा रसचन्दन दूधफे साथ अच्छी तरह पीस तथा घोंट हो। क्ला०) २ घमन किया हुमा पदार्थ। फर पानसे रसयमन आराम होता है। आपरेका रस यमितथ्य (स० वि०) यमा लाया। १ तोला तथा तरकारमर तोग, थोडा सा पापल यमिन् (स.नि.)१ घमनकारी। २पोहित । चूर्ण तथा मरिधचूर्णके साथ मधु मिरा पर सेवन करने यम्मा-टिश सरकारके पश्चिम भारतका पर देशमाग में प्रवर घमन मी एक सस्ता है। तेर गकी विष्ठा और विचार विभाग । यह अक्षा० १३ ५३ से २८ २९ श४ दाना अलमें मिगो पर उम जलको थोडा पीनेसे उ० तथा देशा० ६६ ४० से ७६ ३२० मध्य यिस्तुन पति प्रपर समका तुरत ही दमन होता है। । है। सिघ मिला कर इसका भूपरिमाण १२२६८४ यग श्तचन्दन २ तोरा प्रायरेका रस २ तोला पास मोल मोर जनसच्या १८ करोडम ज्यादा है। अना