पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/७३६

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यमुक-वमुदा ८ साधु पुरुष, सजन। पातमुद्ग, पोलो मूग।। पसुकोदर ( स०क्लो०) तालीशपल । १० वृक्ष, पेड। ११ पुष्करिणो सरोवर। (सिद्धाको० | वसुक (स.पु०) एक मबद्रष्टा भूपिका नाम । इस उपादि वृचि ) १२ शिव। १३ सूय। १४ विष्णु। । नामके दो शूपि हुए हैं। इद्रके गोलमें उत्पन्न हुए (महामा० १२१४६।६३) | थे, दुमरे यशिष्ठके गोलके थे। पन्ति भूतान्यत्र एतषु स्वयमपीति वमुः। (शाकरमान्य) । यमुमो-एक चैयाकरण । गणरत्नमहोदधिमें इनका १५ फुलान कायस्थको पद्धतिविशेष। १६ शब्दों उल्लेख है। द्वारा सख्या सूचित करनेकी रोतिके अनुसार आठको सुगुप्त-सियातचन्द्रिका, रूपन्दसूत्र और स्पन्दकारिकाके सख्या। १७ पकुल, मौलसिरो। १८ राना नृगके एक रचयिता। पे भट्ट कल्लट और राजामक श्रारामफे गुरु पत्रका नाम । १६ छप्पयफे हो सक्नेवाले भेदोममे | थे। मर्गदर्शनस प्रहमें इनका उल्लेख देखा जाता है। ६च्या भेद। प पसुगुप्ताचार्य नामसे विख्यात थे। (को०) यसत्यनेनेति यस (शस्त स्निहाति । उपप । - यसुचन्द्र (स पु०) महामारनफे अनुसार एक व्यक्तिका १।११) इति उ। २० रत्न। २१ धन । २२ पृद्धी । नाम। (भारत प्रापपय) पघ । २३ श्याम । २४ हाटक सोना । २५ जल ।। पसुचरण ( स. पु० । गणके चौधे भेदका नाम । इसक (सी०)२६ दीप्ति प्रामा। २७ दक्ष प्रजापतिको एक आदिमें गुरु और फिर दो लघु होत हैं। कन्या। यह घमको म्याही थी और इससे द्रोण आदि पसुचारुक (स.की.) स्वर्ण, सोना। पाठ यमुओं का जम हुआ था। (विपु०११५।१०५) यसुच्छिद्रा (स. स्त्री० ) महामेदा। (नि.)२८ मधुर। २६ शुक। ३० जो सबमें पास पसुजिन् ( स० त्रि०) वसुजफ्फारो, वसुको जीतनेयाला । करता हो। जिसमें सवका यास हो। (थयय ।२०।१६) पसुक (स० को०) घसुषत् कायतोनि के क । १ साम्मर यसुता (स खो ) वसुसत्या, धनपत्ता। लवण । २ पाशुलयण । ३ पास्तूक, यधुमा । ४ कृष्णा (ऋक् ।।१३) गुरु काला अगर। ५क्षार लवण। (भावप्र०) (पु.) | वसुताति ( स स्रो०) धनविस्तार । यसु सूर्यस्तनाम्ना कायतीति के मातोऽनुपेति क 1६ (ऋक १।१२२।१२ सायप) मदारका पेठ १७ पनहुला वृक्ष, पडी मौलसिरी । ८ पुष्प | वसुति ( स . स्त्री०) धनलाम । विशेष। यह पुष्प सफेद और लाल दो प्रकारका होता यसुत्व (सक्ती०) यसोर्माव त्व। यसुका भाव या है। पर्याय-यमु, शैघ, यक, शिवमलिका, पाशुपत, धर्म। (भृङ्ग १०६१।१२) | नियमत, सुरेट, शिवशेषर। गुण-टु, तिक्त, उग्ण, घमुत्वन (स. को०) पासक, यमुत्वयुक्त । पारमें शीतल दीपन, अजीर्ण वात और गुरमनाशक । वसद (म.पु०)पसूनि ददातीति दाक । १कुबेर । श्वेत पुष्प-रसायन । (रासनि०) पोतमु, पोली मूग वसु धन ददातीति दा-क। २ यिष्णु । (मारत १३२१४६२, यसुवर्ण (सपु०) वसुफ गोलमें उत्पन्न एक मन्त्रद्रष्टा (त्रि०) ३ धनदाता। अपि। वसुदत्त (स.पु०) क्यासरित्सागरोक एक व्यक्तिका यसुकल्प-पक माधोन कवि । इन्होंने अपने मय फाय नाम। (फयास० २१६५३) घाण, योगेश्वर और राजशेखर कविका उल्लेख किया है। यमुदत्तपुर (स० को०) एक नगरका नाम । यसुषल्पदत्त-ए। प्राचीन कवि। पसुदा (स स्त्री०) १ स्कन्द मातार्मिस एफ १२ पृथ्वी। यसुकोट (स.पु.) वमुनि घने कोट इव प्रायकत्वात् ।। याचक। ३माली राक्षसकी पत्नी। यह नर्मदानामको गर्यो- यमुहत् (स.पु.) वसुझके गोतमें उत्पन्न एक मन्तद्रष्टा' को पुती थी। इसके माल, निल, हर और सम्पाति ऋषि। नामक चार पुत्र थे, जो विमीपण ममास्यथे। Vol xx 191