पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/७४

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रोप मानाज्य ७१ पर भर हन होत देखते हैं। उन्हों नरपतियोंके राज्य | निया, गर हुनेन्सिस और ये जिका प्रदेशको राज्यभुक कार से ही रोम साम्राज्यफे सामरिक और राजनीय र युक्साइनसे जर्मनसागरफे किनारे तक सीमा बढ़ा गान्तिका पूर्ण प्रतिष्ठा हु और धीरे धीरे वह उत्तरोत्तर दी थी। इसके याद उसने दक्षिणके मिसिया (६ ई० में) वद गइ थी। उस समयम इम्पिरियल' और 'सेनेटेरियल' रिटिया (१५ इ० ) और गालिया दलजिका सादि प्रदेश प्रदेश विभाग विलुप्त हुआ। राजकोष तथा सम्राट के अधिकार पर सुशासन प्रतिष्ठा द्वारा शान्तिस्थापन अपनत्वका सरगाव दूर हुआ। इसके बाद मेनेटर साम करनेको चेष्टा की थी। यी ई० में भेरुसको पराजय रिक और राजकीय कायों में स्वाधिकार यिच्युत हुप। दाद यह राहतो पार कर सामने आगे पढ़ नही सका। जो कुछ पासो था, यह पिरयात पीर औररियनके | उसके यशधर रावरियस शिल्भा टयू रग्ने वर्गसिसकी (२७० २७५ ६० ) यनसे पूर्ण हुमा। उसने राज्य विपत्तिका बदला चुका पर जर्मनीकासको लौटनेकी शासनका कठोर दण्ड अपने हाथ ले पर प्राचीन आहा दी और १७ इ०में उत्तर डेयूबके मार्शमन्नी प्रथाका सम्पूर्णरूपसे विलुप्त किया। उसने अपने अधि प्रदनफे राजा मापोयोमासके साथ सधि कर उसने कारवार में रोम सरकारमै डाइनाधिसियानके अतु! अपने पिता निदिए अपने पक्षको सुरक्षाका बन्दोवस्त परण पर राजशक्तिको पराकाष्ठा दिपलाइ थी और रो मन र गाया था। इसके अनुसार राइन नदीके प्राध्य नगरोंकी समृद्धिका अनुकरण पर अपने राज्य किनारे उत्तर गौर दक्षिण जमनीमें डेयूरको सीमा पर समृद्धिको गाम्भोग्य वृद्धि की थी। । और पानोनिया और मिसियाक चारों ओर रोमीय रोम साम्राज्यका सहित इतिहास। रीजन प्रतिष्ठित निघे गये थे। पहले ही कहा जा चुका है, कि जुलियस सीजरने । अगएस् रोम साम्राप्यको शान्ति और समृद्धि प्रति रोमसाम्राज्यकी सामा यदा पर नाना चिपोका संस्कार ठित कर गया। इसके बाद वादगाह सभी सुदक्ष थे। घे किया था। वितु रात दिन युद्धविषयकी शान्तिका। अप्रतिहतरूपसे रायगासन पर गये हैं। गेयास, परियाम कोई उपाय नहीं कर गया। महानुभाय अगटस् इसा। और नीरो दुधुद्धिषे कारण तथा उसके अत्याचारसे उपाय कर गया था क्योंकि यह पूक कर पैर रखता रोम और इटली उत्साडित हो उठी थी। राज्यफ गन्य था। रोमाय प्रजात नये निर्वाचित सेनापतियों तथा सय किसी स्थानमें डाको दालन गरी। नौरोको मृत्युके सोनर दक्षिण और पश्चिमके भूखएडों पर विजय र, बाद प्रतिद्वन्द्वी यादशाद के विरोधजनित युद्धर्म रोम गया। फलतः अमिकाके मरुप्रदेश ता अटलागि मामाज्यकी क्षति हुई थी, उसको पूत्ति भेष्पेसियान महासागरके सिया रोम राज्यसीमा और अधिक नहीं हर गया था। भोथो मिटेलियास और मेपेसियानके पद सकी। सोजत गर विजय को थी सदा किन्तु परम्पर युद्धफ अवसर पर ६६७० इ०में सिभिलिसका उमका भतीना अगएसने ही इन सब नगरोंम सुमम्बद । विद्रोह उपस्थित हुाद्राजस, हाशियान और दोनों शासनपति विस्तार और राजगतिका पतन क्यिा आएोनियास अपनी अपनी अमाधारण शक्तिमे रोम था और उसी तरह राजकीय यिधिसे ही यह रोमराज्यको मामाज्यये यिभ्यविजयिनी गति के पुनराविर्भाव करने सीमारक्षामें तत्पर हुआ था। समय होने पर भी मुशासन तथा गाति स्थापनमें इसासे २५वर्ष पहरे म्यूमिडिया रोज्य प्राचीन | सफल हुए थे। कपिपास युगको जोतने लिये अन अमिका प्रदशप अन्तर्मुस योर उसक निफ्टवा इजिप्त! मर हुआ था। आपिकाला (७८८४६० ) यहाँका नगर पर सतर प्रदेशये रूपमें गिना जाने रगा। उत्तर देश जीत पर "हाहियानकी चहारदीवारी" ना स्पेनके उत्तर-पश्चिमके रहनेवालो मसम्य पदाडो गया था। १०७०म यर जातिके भाममणसे घर पर जातियाँको जीत पर लसिटानिया शामन विस्तार द्राजस निम्न रेन्यूद प्रदेशर्म गया और उसने दाकिया दिया गया था। साके २७ या पूर्व अगष्टमी माकुरा गर इसेवालामपो पराजित पर उस राज्य छीन - - - - - -