पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/११

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'मनवार होता है, किचेरके अन्तिम राजा चेरमान मुसलमान , प्रचार और नरहत्या काण्ड करने लगा। इसके लिये होनेके लिये स्वयं मका गये थे। इन्होंने कव राज्यका भयानक विद्रोह उपस्थित हुआ। पोछे अग्रेजोने शासन किया था, इसमें मतभेद है। किन्तु अब मालूम उसके माथ युद्ध किया। निराश्रय राज्यमो ने अंग्रेजों हुमा, कि अरब सागरके किनारे सफहाई नामक स्थानमें , का आश्रय लिया। फिर क्या यात थो, साराका सारा उनको कन है। इस फत्र में लिखा है, कि ये ८२७ ई० मलावार अंग्रेजोंके हाथ आ गया। घ गवएटने सन्में मका गये थे और इन्होंने ८३१में परलोक प्रयाण ' जो कमोशन नियुक्त किया था उसे देशी राजाओंके किया। इसके बाद मलवार कई छोटे छोटे राजाओंके हाथ राज्यमें दे दिया । इस तरह एक शान्तिका आया। इनमें उत्तरमें कोलतिरो या चेराकल और दक्षिण साम्राज्य छा गया। किन्तु वीच बीचमें मोपले आ आ में जमोरिन सामरीराज प्रसिद्ध है। इनसे और कोचीन । कर तग करने लगे। टीपू सुलतानने फिर अपने साथियों. राज्यसे पहले पहल पुगालियोंका सम्बन्ध हुआ। ! के साथ मारी और वाटसन नामक स्थानों पर कम्जा . सन् १४६८ ई०में भास्कोडिगामा मलयारमें आ उप-2 कर लिया, किन्तु अन्तमें यहांसे यह खदेड़ दिया गया। स्थित हुआ। इसके बादके शासनकर्त्ताने कोचीन, कालि . अरवौ औरस तथा मलबारी-रमणीके गर्भसे जो फर और कनानुर पर अधिकार जमाया । सन् १६९६ ई० में सन्तान उत्पन्न होती है। यह मोपला कहलाती है। हालेएडवालेने पुर्तगीजोंसे प्रतिद्वन्दिता करनेके लिये अपने इनका कुछ भी पुराना इतिहास नहीं मिलता। केवल ध्ययसायका विस्तार किया। इन्होंने पहले फनानूर पर तहफत उल-मुजाउद्दोन नामक एक मुसलमानी अन्धमें अधिकार कर पीछे कोचीन शहर और दुर्ग पर भी अधि.! इन सवोंका कुछ उल्लेख पाया जाता है। इस ग्रन्थमें कार जमा लिया और ताचेरी अधिकार कर सन् १७१७ । नेरुमानके मका जाने तथा उनके मुसलमान होने और ईमें चेत्राई द्वीपको भी अपने राज्यमें मिला लिया। उनको कनके बारे में बहुतेरो दातें विशेष रूपसे लिखी हुई किन्तु इसके बाद ही इनको क्षमताका हास होने लगा। है। सिया इसके मसजिदोंके भी वर्णन या है। मोपले इन्होंने कनानूरफो इस राज्यके घंशोंके हाथ घेच डाला।) और मायरों में सदासे झगड़ा फसाद होता आता था। प्रमशः कोचोन् चेताई आदि स्थान भी इनके हाधसे नायर जाति अत्यन्त धर्म शोल और न्यायपरायण है। निकल गये। फ्रान्सोसो दलने सन् १७२० ६०में सबसे ) धर्मान्ध मूर्ख मोपले सदा इनको घृणाको दृष्टिसे देना पहले माहीमें अपना उपनिवेश कायम किया । सन् १७१२) फरते थे और समय समय अत्याचार नथा प्राणनाश ईमें कालिकट और १७५४ में डिल्लो पहाड़ इनके अधि | भो किया करते थे। नायरोंकी पियादप्रथा पदुत दी फारमें आ गया। सन् १७६५ ई०में अरेजोंने हालेएड कौतुहलपूर्ण है। यहां पहले एक स्त्रो बहुत गर्द रक्ष यालासे कोचीन राज्य छीन लिया । मंग्रेजोंके माथ | सकती थी। किन्तु यह कुनधा उठ गई है। मान्सोसियोंका बड़ा संघर्ष हुआ। इससे वाणिज्यको एक यादिपुरुपसे जो कन्या सन्तान जन्म लेतो, ये बड़ी हानि हुई। अगरेजोंने सन् १६६४ ई०में कालि- सब पकन रहतो थों। जहां घे रहती घों, उस पासगृहः . • कट, सन् १६८३ ई०में तेलीचेरो, और १७१४ ईमें | को 'तारपद' कहते हैं। इनमें बहुमो -विवाह प्रचलित अहो और चेतराई मादि स्थानोंको अपने अधिकारमें रहने पर भी दो मर्द एक खोसे पियाद नहीं कर सकता कर लिया। | था। दक्षिणके मलयारमें साधारणतः स्त्रिया स्वामीके • प्रायः एक सौ वर्ष तक मरहट्टे जलीय डाकू मलयार! घर रहती हैं सही। किन्तु राजा और समीरीकी खियां उपकूलके यन्दरों तथा नगरौंको लूट पाट किया करते कमी भी 'तारवद' परित्याग कर जा नहीं सकता। रहे। पीछे मगरेजोने इनको पराजित कर इन प्रदेशोंमें ! पहली शताब्दीमें घेवलिनसे एक मिलरीदलने मल- शान्ति स्थापित की। अप्रेज तथा फ्रान्सीसियों की यारमें आ कर एक गिरजा बनयाया। यहां चार सरहके ललाई सतम होते ही रोपू सुलतानने यहां आ कर धर्म ! ईसाई दिखाई देते हैं। यथा--जाकोयाटस (२)