पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४०९

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मातृग्राम--मातृभोगोन ___ 'मात गुप्त यथासमय काश्मीर पहुचे। मन्त्रियोंने । मातृतीर्थ-एक प्राचीन तीर्थस्थान । यह श्रीरंगपत्तनके इनका बड़ा आदर-सत्कार किया। अनन्तर सोंने मिल | सन्निकट अवस्थित है। कर इन्हें राजसिंहासन पर विठाया। मात गुप्तने ४ वर्ष मातृदत्त मन्त्रमालाटोका नामक हिरण्यकेशीसूत्रवृत्ति- ६ महीने १ दिन तक काश्मीरका राज्य किया था। इसी के प्रणेता । कमलाकरने इनका मत उद्धत किया है। समय मालवाधिपतिका देहान्त हुआ । काश्मीर राज्यके मातृदेवो ( सं स्त्री० ) शकिमूर्तिभेद, तान्त्रिकोंको एक प्रत अधिकारी प्रवरसेनने इनको राज्य न छोड़नेके लिये देवीका नाम। 'बहुत कहा, किन्तु इन्होंने एक भी न मानी ! कारण पूछने मातृनन्दन (सं० पु०) मातृणां नन्दनः पुन आनन्द. पर इन्होंने कहा था, 'हमको जिसने राज्य दिया था, ' वर्द्धनो वा । १ कार्तिकेय । २ महाकरजवृक्ष, महाकरंज अव उसके न रहने पर राज्यभोग करना हमारे लिये का पेड़। २ गुच्छकरंजका पेड़। नितान्त अनुचित है।' मात गुप्त काशीमें जा कर । मातृनन्दा ( स० स्त्री०) शाक्तोंकी एक देवाका नाम । संन्यासी हो गये। (राजतरङ्गिणी) मातृनन्दिन (सपु० ) मातृनन्दन देखो। औचित्यविचारचर्चामे इनको वनाई श्लोकावली , मातृनामन् ( स० क्लो०) १ अथर्ववेदफे एक सूक्तका उद्धत हुई है। घासुदेव-कृत फर्पूरमजरोमें इन्हें अल- नाम । २ उक्त सूक्तके एक ऋपि और देवताफा नाम । कार शास्त्रके रचयिता घतलाया है। अलाया इसके . मातृनिन्दक ( स० वि०) मातुनिन्दकः। १ जननीका इन्होंने भरतकृत नाट्यशास्त्र की एक टीका लिखी है। निन्दाकारी, माताकी निन्दा करनेवाला । २ प्रतुद जाति- मातृप्राम ( स० पु० ) १ राजतरङ्गिणोके अनुसार एक ' का एक पक्षी। .नगर । २ मातृरूपा स्त्रीजाति मात्र, माताकी असो । मानृपालित (सपु० ) दानवभेद । स्त्रीजातिमाल । मातृपूजन (सं० पली०) मातुः पूजनम् । मातृपूजा, मातृघात (स'० पु०) मातृहत्याकारी, माताको हत्या माताको पूजा। करनेवाला। मारघातिन् ( स० त्रि.) मातर हन्ति इन णिनि. इस्य मातृपूजा (मत्रो०) विवाहकी एक रीति । इसमें घ। १मातृहन्ता, माताको मारनेवाला। विवाहके दिनसे एक या दो दिन पूर्व छोटे छोटे मीठे पूए बना कर पितरोंका पूजन किया जाता है । इसीको 'मातृ मातृधाती (सनिक । मातृघातिन देखो। मातृधातुक ( स० पु०)१ मातृहन्ता, वह जोमाताको पूजा' या 'मातृका-पूजा' कहते हैं। मारता हो। २इन्द्र। मातृवन्धु (सं० पु० ) मातुर्वन्धुः। मातृवान्धव, माताके मातृघ्न ( संत्रि०) मातरं हन्ति हन् । मातृघातक, | सम्बन्धका कोई आत्मीय । बन्धु तीन प्रकारका है,-- 'माताको हमन करनेवाला। | आत्मवन्धु, पितृयन्धु और मात्वन्धु । मातृच ( को०) १ ज्योतिपके अनुसार एक प्रकार । "मानुः पितृभ्वसुःपुत्रा मानुर्मातृभ्यमुः मुताः। का चक। २ मातृगणममुह, देवमाताओंका एक साथ मातुतिलपुत्राश्व विजेया मातृवान्धवाः ॥" (मितारा) मातृचेट-वालियर गोपगिरिक सूर्यमन्दिर के प्रतिष्ठाता । मातृवान्धव (सं० पु. ) मातुर्यान्धयः। मातृसम्पीय इन्होंने राजा मिहिरकुलके समय पन्द्रह वर्ष में उपत आत्मीय, मासाके सम्बन्धका कोई श्रात्मीय। •मन्दिर निर्माण किया । मातृभाषा (सं० स्त्री०) वह भाषा जो बालक माताकी मातृतम ( स० वि०) मातृतुल्य, माताके सदृश। गोदमें रहते हुए बोलना सीखता है, माता पिताके मातृवस (सं० अन्य०) मातृ-पञ्चम्यर्थे तसिल । भातासे।। बोलनेको और सबसे पहले सोखी जानेवाली भाषा। मातृतीय (सं० क्लो०) कनिष्ठ अंगुलका निम्नस्थान, मातृभेदतन्त्र (सं० क्ली०) तन्त्रभेद।। हधेलोमें सबसे छोटी उंगलीके नोचेका स्थान। मातृभोगौन (सं० वि० ) मातुभोगः मातृभोगः तस्मै हितं