पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४२७

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३७६ . . “माधबोलना-माधुरी माध्योलता (सस्त्री०) मधियो नामक सुगंधित फूलो. किन्तु सभी विषयों में जिलेके डिपुटी कमिश्नरकी गनु की लता। माधवी देखो। ' मति लेनी पड़ती है। यहां ईखको खेती अच्छी माधवीवन-दाक्षिणात्यके अन्तर्गत एक प्राचीन तीर्थ ।। लगती है। यह मद्रास-प्रदेशके नजोर जिलेके तिरुक्कारकावुर नामक २ उपत जिलेका एक नगर तथा उसी तहसीलका स्थानमें अवस्थित है। स्कन्दपुराणके माधबीवन विचारसदर । जनसाधारण इसे रानीजू नगर भी माहात्म्यमें इसका माहात्म्य वर्णित है। कहते हैं। माधवेन्द्रपुरी-पद्यावलोधृत एक कवि। कुमारह देखो। माधुकि ( स० पु०) दोनों अश्विनीकुमार । माधयेन्द्र सरस्वती-शाङ्कर सम्प्रदायके आचार्य । माधुच्छन्दस ( स० लि.) १ मधुच्छन्दासम्भूत। २ माधवेष्टा (स' स्त्री०) माधवस्य इष्टा । १ वाराहीकंद। अघमर्पण और जेतृका गोत्रापत्य । ..२ दुर्गा। | माधुपार्किक (स० वि० ) मधुपक देनेके समय पूज्य माधवोचित (सलो०) ककोल, कंकोल । व्यक्तिकी पाय, अयं गौर मधुपर्कादिसे पूजा करनी माधयोद्भव ( स० पु० ) माधयादुद्भवोऽस्य । राजादनी, होती है। इस समय जो धन दिया जाता है उसीको खिरनीका पेड़। माधुपार्किक कहते हैं। माधथ्य ( स० पु०) मधोोनापत्य मधु (मधुवोनीमण "विद्या धनन्तु यद्यस्य तत तस्पय धनं भवेत् । कौशिकयोः। पा ४।१२१०६) इति या । १ मधुका मैत्र्यमौवाहिकञ्चय माधुपर्किकमेव था ॥" ( मनु ।२०६) गोनापत्य ब्राह्मण । २ शकुन्तला नाटक राजा दुष्मन्त- 'माधुर्किकं मधुपकदानकाले पूज्यतया यल्लम्धं तस्यैव फे विदूषकका नाम। तत् स्यात्' (कुल्लूक) इस माधुपार्किक धनका भाई आदिमें माधी (हिं० पु० ) भैरवरागके एक पुत्रका नाम । बंटवारा नहीं होता। यह जिसको मिलता उसीके पास माधुक (सपु०) १ मैत्रेयक नामको संकर जाति। २/ रहता है। मधुक-पुष्पजात मदिरा. महएकी शराय। ३मधुरभापिन् "माधुमत (सं० पु. ) मधुमत्सु भवः मधुमत् (१च्छादि- प्रिय बोलनेवाला। भ्यश्च । पा ४।२।१३३ ) इति अण । काश्मीरदेशमय, माधुकर ( स० वि० ) १ मधुकर सम्बंधोय । २ मपलीक । काश्मीरमें होनेवाला। समान 'इकट्ठा करनेवाला । ३ मधुक मय, महुएकी माधुमतक (सं०नि०) मधुमत् ( मनुष्यतत्स्थयो। पा शराब। मधुकरी (स० स्त्री०) पृन्दावन तीर्थप्रसिद्ध भिक्षावृत्ति ४।१।१३४ ) इति वुत्र । फाश्मीरदेशभव, काश्मीर. 'विशेष । मधुमक्खीको तरह मौन हो कर दर दर | देशका! भीख मांगनेसे इसका नाम माधुकरीवृत्ति पड़ा है। २." माधुर ( स० लो०) मधु अस्ति अस्य अस्मिन् चेति मधु तृतीयाश्रम चार भिक्षुर्कोको पांच घरसे लो गई 'मिक्षा । ( उपमुयिमुक मधोः । पा ५।२।१०७ ) इति र ततः माधुकणिक (स० वि०) मधुकर्ण सम्बन्धीय । .. । साथै मण । २ मल्लिका, चमेली । (वि०) २ मधुरसम्मय, माधुगढ़-युक्तप्रदेश जलौन जिलेकी एक तहसील । यह मोटा। पहुज और यमुना नदीके धीच अवस्थित है। भपरिमाधुरई (हि० स्त्री०) मधुरता, मिठास। 'माण २८२ वर्गमोल है। इस तहसीलके पश्चिमसीमान्त | माधुरता (सं० स्त्री०) मीठापन, मिठास। वत्ती रामपुर, जगमोहनपुर और गोपालपुरके राजा तथा! माधुरी (सं० स्त्री०) माधुर-गौरादित्वात् डीप। १ मथ, जमींदार भङ्गरेज गवर्मेण्टको किसी तरहका कर नहीं शराब । २माधुर्य, शोभा। देते। उन्होंने अपनी अपनी भूसम्पत्तिके शासनकार्यको . "तानि स्पर्शमुखानि वे च तरशाः निग्धा शोभ्रिमा। देखरेखके लिये स्वतन्त्र विचारायभाग खोल रखा है। सद्वक्त्राम्बुजसीरभ स च गुघास्यदी गिरा वक्रिमा ।