पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/४९९

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मायादेवमायामोह घेदनूर रायदुर्ग, हर्पनहलो और सावनूर सामन्त-राजयों, १ मायावी, मायापटु । २ असुर । ये बड़े मायावो हैं इस- को मिलित सेनाका एक भीषण युद्ध हुआ था। युद्धमें लिये इन्हें मायाधर कहा जाता है। ३ ऐन्द्रजालिक, पराजित हो पालेगार-सरदारने आत्महत्या की तथा उनके जादूगर । ४ भ्रान्तिकर, भ्रान्तिजनक । सहयोगी चन्दासाहय (जो अरकाटका नवाय-पद पानेके मायापटु (सं० पु०) मायया पटुः कुशलः। मायाकुशल, लिये डुप्लेके शरणागत हुए थे मी) वन्दी हुए। । मायावी। मायाक्षेत्र (स.पु०) दक्षिणके एक तीर्थका नाम। । | मायापति ( स० पु० ) १ मायावी । २ मायाके सामो। मायावण (सनि० ) मायया वित्तः 'यित चुशु चणपौ । मायापुर-१ बंगाल के २४ परगना जिलान्तर्गत एक बड़ा इति चण। माया द्वारा विख्यात, अतिशय मायावी। गांव। यह अक्षा० २३ २६ १५” उ० तथा देशा० _ "गाधेयदिष्ट विरस रसन्त रामोऽपि मायाचयामल चुचुः।" ८८१०५० पू० हुगली नदीके किनारे इछापुरके दक्षिणमें (मटि २०३२), अवस्थित है। यहां यूटिश सरकारको वारुदका कार- मायाचार (स०) मायायो । घाना है। मायाजीविन ( स० पु०) मायया इन्द्रजालविद्यया जीवति । ____२ हरिद्वारके निकटवत्ती एक पुण्यस्थान । हरिद्वार देखो। जीवनयात्रा सम्पादयति इति जीव-णिनि । प्रातिहारिक, ३ नचदीपके अन्तर्गत एक स्थान। यह जलंगी ऐन्द्रजालिक, जादूगरीसे जीयिका निर्वाह करनेवाला । और भागीरथीके संगमके निकट अवस्थित है। मायाजीवी (सपु०) मायाजीविन देखो। मायापुरी ( स० स्रो०) नगरभेद, एक प्राचीन नगरीका मायातन्त्र (स' फ्ली०) तन्त्रमेद, एक प्रकारका तन्त्र । । नाम । मायाति (स० पु० ) मायया सह अतति यद्वा मा अत- मायाफल (स' फ्लो०) फलविशेष, माजूफल । पर्याय- तोति ( अतअज्यतिम्यां च । उपा ४११३०) इति इण ।। मायफल, मायक, छिद्राफल, मायिफल, मायिक, छिद्राफल, मायि। इसका गुण- नरवलि । प्रवर्तपुराण में लिखा है, भगवती दुर्गादेवीके वातहर, कटु, उष्ण, शैथिल्य, सङ्कोचक और केशको काला उद्देश्यसे अएमी और नवमी-संधिमें नरबलि देनी करनेवाला माना गया है। होती है। इस नरयलिका नाम मायाति है। पितमातृ- / मायामय ( स० त्रि०) माया स्वरूपार्थे मयर । माया- विहीन युवक, रोगरहित, विवाहित, दीक्षित, परदार-1 स्वरूप, माया। विहीन, मजारज और विशद्ध इन सय गुणोंसे यक्त पक मायामोह (सं० पु०) मायया मोहयति असुरानि मुह- भादको उसके मा पापको अधिक मूल्य दे कर खरीदना णिच, अच् माया च मोहश्च ती यस्येति या। विष्णु- होगा। याद में उसे एक घर्ष तक भ्रमण करा कर गंधमा- देहनिर्गत असुरमोहक पुरुर विशेष, विष्णुके शरीरसे ल्यादि द्वारा यथाविधि अर्चना कर देवीके उद्देश्यसे यलि निकला हुआ एक कल्पित पुरुप जिसकी सृष्टि असुरोंका देनी होगी।* आज कल यह प्रथा प्रचलित नहीं है। । दमन करनेके लिये हुई थी। मायारमक (सत्रि०) मापायुक्त। "इत्युक्तो भगवास्तेभ्यो मायामोह शरीरतः। मायाद ( पु०) मायया छलेन धृत्वेत्यर्थः अत्ति भक्षय- तमुप्ताद्य ददौ विष्णुः प्राह चेद मुरोत्तमान ॥". तीति अद-मन् । १ कुम्भीर, मगर । मायां ददातीति (विष्णूपु० ३।१७ भ०) दा-फ। (नि.) २जो माया दान करे। विष्णुपुराणमें लिखा है,-असुरोंसे सताये जाने पर मायादेयो (सस्त्री०) युद्धदेवकी माताका नाम! देवताओंने विष्णुको शरण ली। भगवान विष्णुने माया- मायादेयोसुत ( स०पु०) मायादेव्याः सुतः। युद्ध। मोहको अपने शरीरसे उत्पन्न कर देवताओंको दिया मोहका अपन शरारत मायाधर (सति०) धरतीति धृ-अच, मायायाः धरः। और कहा, तुम लोग अब किसी वातको चिन्ता मत करो। मायामोह जव दैत्योंको मोहित करेगा, तब ये प्रदायत्त पुराण-प्रकृतिपयट १५ म. सय वेदमार्गविहीन हो जायेगे। धैसी हालतमें तुम Vol. XVil, 111