पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५३६

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पारिगन्धिका-मार्चएड . मातारगन्धिका ( म. पी० ) मारि गन्ध कन टाए अत : माइकियायन ( पु.) माडांकन ( हरितादिभ्योऽनः । । इत्यञ्च । मुद्पणी बनमूग। पा ११९० ) इति असन्तात् फम् । माइकिवा गोला मारिपाद (म० पु.) अयमेद, एक प्रकारका युरे/ पत्य । लक्षणवाला घोड़ा। जिस घोड़े के ग्युर उसके शरीरके माडीक (सं० लो०) मुससाधनां रंग सा न हो कर दुसरे रंगका हो उसीका नाम माजार मातएड (सपु०) मृतश्चासो भएडश्चेति, मृताण्डे भय . पाद है। ऐसे नोड़े का व्यवहार नहीं करना चाहिये. तीति मृताण्ड ( तत्र भवः । पा ॥३॥५३ ' इति अण। १ फरनेसे अमङ्गल होता है। अर्क वृक्ष, अकयनका पेड़। २शार, सूमर। ३ स्पर्ण- माजारि ( म पु पुराणानुसार मगधरान सहदेवके : माक्षिा, सोना मघवी । । सूर्य । इनका उत्पत्ति विवरण पुत्र। मार्कण्डेयपुराणमें इस तरह लिया है,-प्राचीनगलमें माजासरी । सं० सी० । मार्टि शोधयदि केगादिकानया : दानयोंने देवताओंको परास्त कर म्बर्गराज्य पर अधि. मृज भारन नियां टोप। १ कस्तरी। २ जन्तुविशेष : कार जमाया। देवमाता अदिति पुत्रोंकी भलाई के लिये पाटामी। पर्याय- पूमिका, पृनिकज, गन्धलिका। . भगवान भास्करके उद्देशसे फठोर तपस्या करने लगी। (राजनि०) ! भास्करदेव तपस्यासे संतुष्ट हो अदितिके समीप उप- माशिटोड़ी (हिं० रखी०) सम्पूर्ण जातिको एक रागिनी ! : स्थित हुए और उन्हें घर मांगने कदा। अदिति इममें सब कोमल म्बर लगते हैं।

धोलो, 'दैत्य और दानयोंने मेरे पुव देवताओंका त्रिभुवन

माजरीय ( सं० पु० ) माज़ारस्यायं मानार ( गहादिभ्यश्च । और यशभाग ले लिया है. अतः प्रार्थना करतो है, कि पा १२।१३८ ) इति छ। १ बिडाल, बिल्ली । २ शूद्र । ३ । जिससे देवगण फिरसे यज्ञमागभुक और स्यर्गाधिपति कायशोधन, शरीरका परिष्कार करना। । हो यह उपाय बतला दीजिये ।' भगवान भास्करने गदिति- माजाल ( सं० पु. ) मानाररलगोरेकत्यात् रस्य ल। के प्रति प्रसन्न हो कहा, 'तुम्हारे गर्भसे मैं सहस्रांशा मार्जार, विडाल। उत्पन्न हो कर तुम्हारे पुत्रके शव ओंका विनाश करूगा।' माजालाय (म० पु०) मज (म्याचतिम गठच वानज्ञालायचः।' इतना कह कर भगवान अन्तर्धान हो गये। उपा ११११५.) इति आलोयन् । १ विडाल, विल्ली। इस प्रकार अदितिका अभिलाप पूरा होने पर उन्होंने २ शब्द। ३ कायशोधन, शरीरका परिष्कार करना। तपस्या करना छोड़ दिया। कुछ दिन बाद रयिका सीपुग्न ४ महादेव। नामक कर अदिति गर्गम चुमा। देवजननी अदिति "नलाटानाय समय मोदुरे शुमपायये । समाहित चित्तसे शौच और शन्य नान्द्रायणादि मत करपं. पिनाकगोन्से सूर्याय माज्ञानीयाय पंध" उस दिण्य गर्मको बदन करने लगीं। कश्यप अदिति के ( भारत ३१३६७७) प्रतिम न हो योले, 'तुम प्रतिदिन उपवास करके पण ५पुराणानुसार एक ऋषिका नाम । इसका दूसरा इस गर्माएको नष्ट कर दोगी?' अदितिने प्रयाव दिया, नाम मालीय भी है। मार्जित ( स० वि०) माते मज-णिच फर्मति का | 'तुम यह जो गाएर देयते दो इसे मैं नष्ट नहीं करनी गु शोधित, स्पड किया हुआ . . प । २ :- • यह विपक्षियोंको मृत्युका कारण स्वरूप है। फिर एक प्रकारका साद्य पदार्य ५. और कि. ____वातचीत करते करने विवाद हो गया। इस पर उसो मगय गर्भको गिरा दिया। कश्या मादिगो मिला कर और डाल कर, यताया जाता है । मान गर्मको उदीयमान् मारकरको तरह प्रभा. पु . . देश . . करने लगे। इमी समय . ..: करने दुप देययाणी तुं. 'तुम अर्थात् मार डालोगी, ऐसा