पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/५६५

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पालवा-गालवी ब्राह्मण ५६६ लोग अच्छी तरह शासन नहीं चला सकते थे, इसलिये सथ स्थानोंको सदर अदालत है। यहाँके पोलिरिकल मालवा उस समय पिण्डारी आदि दाक्षिणात्यके एजेण्ट नीमचके दौरा जजका काम करते हैं। दुष्ट डकेतोंका अड्डा हो रहा था। इन लोगों होके मालवा-पंजावका एक भूमाग । यह पक्षा० २६ अत्याचारसे पाध्य हो उस समयके गवर्नर जेन ३१ उत्तर तथा देशा० ७४ ३०७७पूरयके मध्य रल लाई हेगिसने चीथा मराठा युद्ध ठान दिया। अवस्थित है । यह सतलजके दक्षिण है और यहां था। युद्ध में पिंडारी: लोग हार गीर भाग गये। पीछे सिषन्न रहते हैं। इसमें फिरोजपुर तथा लुधियानाके भील लोगोंने लाई मालफमके समय में शान्तभाव । जिले और पटियाला, हिंद, नाभा और मालर फौटलाके धारण किया। तभीसे इस स्थानके जंगल साफ हैं। देशी राज्य अवस्थित है। यह प्रदेश सिपस रंगझोंकी अनेक भीलोंने अंगरेजी सेनामें प्रवेश किया । सरदार भतींके लिये प्रसिद्ध है और इस सम्बन्धमें यह केवल पुरमें चार सौ मालयाके भीलोंकी एक सेना है। १८वो। मांझासे नीचे है। कहते हैं, कि इस प्रदेशका यह नाम शताब्दीके मध्यम उतरे। मालवा १७८० ई०के पहले २५ । हालका है। मालयासिंहकी उपाधि यहाके सिपखोंको वर्ष तक, पफ वृहत् समरक्षेत्र बना रहा यहां मराठे, मुसल, उनको वहादुरीके लिये वन्दा वैरागीने दी थी। चन्दा मान और यूरोपवाले घरापर लड़ते भिड़ते रहे । अन्तमे वैरागीने कहा था कि यह प्रदेश मालवाके जैसा ही .१८१८ ई में ब्रिटिश-प्रधानता यहां स्थापित हो गई। वादसमृद्धिशाली होगा। ४० वर्ष तक मालयामें कोई उल्लेखनीय घटना नहीं | मालयानक (सं० पु. ) जातिभेद । हुई। लेकिन १८५७ ई०के गदरमें इन्दौर, मी, नीमच, मालविका (सं० स्त्री० ) मालयेषु जाता मालव-ढक-टाए। अजर, मेदिदपुर और सेहोरमें विद्रोहीदल उठ खड़े हुए | वियत्, निसोथ। थे। १८६९-१९०० ईमें मालया घोर दुर्भिक्षसे पीडित , मालविरपिन् (सं० पु०) कुम्भी वृक्ष । रहा । . १९०३ ईमें एक और मुसीयत आई,मालयामें मालवी (सं० स्त्रो०) १ श्रीरागको एक रागिणीका नाम । प्लेग हुआ जिससे अनेक जिलोंके बहुसंख्यक कृषक यम- यह मोड़व जातिको है और धनुमत्के मतसे इसका स्पर- पुरको सिधारे। ग्राम नि सा ग म ध नि है। इसमें पभ और पञ्चम माज फल मालया अफोमके लिये प्रसिद्ध है। हर स्वर वजित है। कोई कोई इसे हिंडोल रागको रागिणी साल प्रायः ८००० चपसे अफीम विदेश भेजी जाती है। मानते हैं। २ पाठा, पाढ़ा । (नि.)मापीय देखो। भनेक करद राज्यको ले कर पश्चिम मालवा एजेन्सी मालवामाह्मण-उत्तर-पश्चिम भारतवासी ग्रामणश्रेणी- धनी है। एक अगरेज एजेएट इन सीकी देख-रेख की एक शाखा | याराणसी आदि प्रान्तों में इस श्रेणी- करते हैं। जायरा, रत्लाम, सिल्लना, सीतामी आदि के पटुतसे लोग रहते दिखाई देते हैं। ये लोग लेखा राज्य और उज्जैन, शाहजहानपुर, आगरा, मन्दशोर का काम करके अपना गुजारा चलाते हैं। कोमो? नीमच, रामपुर, मेहिदपुर, कैथा, तराना, मालीत, पिरावा, वाणिज्य व्यवसाय भी करते हैं। परन्तु याजनादिको शाचा, पांचपहाड़, दग और गंगरार जिले उक्त एजेन्सी भी नहीं करते। के अधीन है। मध्यमारतमें पशाति (छमाति) ग्राह्मण नामक जो नीचे लिखे स्थानों के ठाकुरोका अधिकार गयएटसे छः स्वतन्स दल है, घे भी अपनेको मालय ब्राह्मण कहते मंजूर किया गया है। अजरन्दा, वर्ग, पिच्छौद, पिलन्दा है। उनका कहना है, कि प्रायः ३० पीढ़ीसे ये लोग दानि, दताना, धुलतिया, जयालिया, सालुग्वेरा, सालगढ़ जन्मभूमि मालयका परित्याग पर भारतर्फे नाना स्थानों. नरवाद, ननगांव, नालना, पन्तापिप्लोदा पिप्लिपा, में बस गये हैं। जातितत्त्यायिन् मि० सेरिने उन्हें गुल पिलोदा पधं शियगढ़। इन स्थानोंका क्षेसफल १२००० राती ग्राह्मणकी एकगाया पतलाया है। वर्गमील है। जनसंख्या प्रायः १६ लाए। आगरेमें इन। उन लोगोंके मध्य किंवदन्ती है, किरिसो मालय