पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६२९

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मित्रहिंसक-पिथिल मिनहिंसक (स.नि.) मिलको हत्या करनेवाला। मिवेस (सं० लि. ) यजमानोके, ईरयितायाधक । “जघन्या मित्रा ('स०सी०) मित्र स्त्रियां साप्। १ मिनदेवकी | इन्द्र मिलेरून" (भृक् ११३७॥३) "fसेरून मित्राणां स्त्रीका नाम-। २ सुमिवा, शत्रुघ्नको माता। ३ पक। यजमाना नामोरयिन् वाधकान् ।" ( सायण ) अप्सराका नाम। मिलेश्वर (सं० पु०) मित्रशर्म प्रतिष्ठित काश्मीरके एक "अलम्बुपा धृताचीच मित्रा मित्राङ्गदा रुचिः।" . शिवलिङ्गका नाम। (महाभारत १३६४४) मिनोदय ( स० पु०) १ सूर्यादय । २ वन्धुओंके सौभाग्य. .४ पराशरके शिष्य मैत्रेयकी माताका नाम। का उदय । भाग० ३१1३। मिना ( स० लि.) भिमिदास्नेहने इति मिद-स्थार्थ यत् । मिनाक्षर (सकी0) छन्दोबद्ध पर, छन्दके रूप में यना भनुरक्त। ( भृक्५८५।७ ) . हुथा पद। मिथनो । स० स्त्री० ) मेथी। मित्राय (सं०वि०मिव नामधेय। भाग्नेय मित्राख्यपर्व, मिथस् ( स'अय्य०) मेधति इति मथ सङ्गमे असुन्, मला पृपादादित्वात् हस्खः। १ अन्योन्य, परस्पर।२रहः। मिवाणवली-पक्षाय प्रदेशके सियालकोट जिलान्तर्गत "व्यवहारी मिस्तेषां विवाहः सदृशैःसह ।" ( मनु१०५३) एक नगर । यह स्थान सूती कपडे और अनाज- मिथस्तुर ( स० त्रि.) परस्पर वाघमान वा संश्लिष्ट.। के वाणिज्य व्यवसायके लिये मशहूर है। "मिथस्नुर ऊतयो यस्य ( भृक् ॥२६॥६) मित्रातिथि सं० पु०) एक राजाका नाम । (ऋक् १०१३३१७) "मियः परस्परं तुरो वाधमाना संश्लिष्टा वा।" (सायण) मित्रानुग्रहण (संक क्लो०) पन्धुके प्रति अनुग्रह दिव. मिथास्पृध्य (सति० ) परस्पर स्पर्धांविषय । लाना। (ऋक १।१९६६) गिवाभिद्रोह (सं० पु०) यन्धु विद्ध पक, मित्रसे यैर या मिथि ( सं० पु० ) मेथते हिनस्ति शत्रुकुलमिति मिथि इन द्वेष रखने वाला। ( सर्व धानुम्य इन। उया ४११७ ) राजा निमिके पुत्रका मित्राय (सं०१०) १ राजा दियोदासके एक पुत्रको नाम । नाम। विष्णुपुराणमें यहो जनक राजाके नामसे प्रसिद्ध (त्रि०)२ मित्रको इच्छा करनेवाला। है । राजा निमिको कोई पुत्र न था। इसीलिये मुनियोंने मित्रावरुण ( सं० पु.) मिलश्चासी वरुणश्चेति ( देवता. - अराजकता बढ़ जानेके डरसे उनके शरीरको अरणीम मथ द्वन्द्व च। पा ६२१४१) मित्र और वरुण नामक देवता। डाला। मथनेके कारण उससे एक कुमार उत्पन्न हुआ। ___मित्र और वरुण देखो। २ उत्सवभेद । इसी कुमारका नाम जनक हुआ। इनका पिता विदेह इसी मारकर मित्रावरुणवत् (सं० पु०)पितावरणयुक्त । (ऋक ८।३।१३) अर्थात् देहरहित थे, इसीसे उनका दूसरा नाम विदेह भी मित्रावरणीय (सं० लो०) त्विज मिनावरण सम्ब-' हुआ। मथनेसे उत्पन्न होने के कारण इनको संज्ञा मिथि न्धीय। हुई । इनको एक पुत उत्पन हुआ जिसका नाम था उदा. मिनाबसु (सं० पु०) १ विश्वायसुके एक पुलका नाम।। वसु । (विष्णुपु. ४१५ १०) रामायणमे मिथिवंशका उल्लेख २सिद्धगणके राजा। मिलता है। यथा- मिविन् (सं० त्रि०) बन्धुयुक्त, जिसे मित हो । निमिः परमधर्मात्मा सर्वसत्त्यवता बर। । मित्रिय (सं० त्रि०) वन्धु सम्बन्धीय । (अथर्ग २१२८१) तस्य पुत्रो मिथिनामि जनका मिथिपुत्रका " . मिली (सं० स्त्री०) दशरथकी पत्नी सुमिता जो लक्ष्मण . (रामायण १।७१४) और शत्रुघ्नको माता थीं। मिथिन (सं० पु.) राजभेद । मिन्नेयु (सं० पु०) राज्ञा दिवोदासके एक पुत्र का नाम । मिधिनो ( स० नो०) मेथो। (माग० हा२।१) | मिथिल (सं० स्रो०) राजर्षि जनकका एक नाम । , , Vol, ITII. 140