पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६६६

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५६ . पिशि-मिश्रण महरेज राज और अरय-जातिके भयसे इन्होंने शान्तः । "खुरकं मिभक चेति निविध यमुच्यते ।" ( भाव प्र.) समाव धारण कर लिया है। ५ देवोधान, देवताओंका उद्यान। ६ तीर्थभेद, एक मिशि (स स्त्री० ) १ मधुरिका, सौंफ । २ शतपुश, } तीर्यका नाम। . सोयाँ । ३ मेथिका, मेयो ! ४ कासमेद, दाभ । ५ जा. "ततो गच्छेत धर्मश ! मिश्र सोकविच त ।" मांसी, पालछड़। ___तम तीर्धामि रागेन्द्र ! मिधितानि महाताना ॥ मिशो ( स० स्त्री०) मिशि-ऋदिकारादिति पझे डोप् । (महाभारत ३१८१८८) १ जटामांसो। २ मधुरिफा, सौंक। (नि.) ७ मिश्रणकी, मिलानेयाला। मिध ( स० पु०) मिश्र-बाहुलकात् रक् । १ चाणक्य मिश्रकस्नेह (सं० पु०) गुल्मादि रोगों में प्रयोज्य औषध. मूलक, मूली । २ हाथियोंको चार जातियोमसे एक भेद। प्रस्तुत प्रणाली-निसोथ, त्रिफला, दरितमूल भी। प्रस्त जाति । और दशमूल प्रत्येक १ पल, जल १६ सेर, शेष ४ सेर, धी भद्रो मन्दो मृगा मिभश्चतसो गजजातयः ।" ( हेम) . २ सेर, रेडीका तेल २ सेर, दूध ४ सेर । इन सब ३ सन्निपात । ४ रत, लेह । ५ ज्योतिपके अनु- वस्तुओंसे यथाविधान उक औषध तैयार कर गुल्मादि सार उप्र आदि सात प्रकारके गणोमिसे अन्तिम या। रोगो में उसका प्रयोग करने से बहुत लाभ पहुंचता है। सातवां गण। यह वृत्तिका और विशाखा नक्षलके योगसे "प्रियता विमलो दन्ती दशमूरनं पामोन्गितम् । होता है। (नि०)६ मिथित मिला या मिलाया हुआ। जले चतुर्गुणे परत्या चतुर्भागस्थित रसम् ॥ ७ श्रेष्ठ, बड़ा। ८ जिसमें कई मिन्न भिम प्रकारको सरियडजे तक दीरका साधयेत् । रक्रमोंको संख्या हो । जैसे-मिन माग, मिश्र गुण । स सिद्धा मिश्रकस्नेदः स क्षौद्रः कपागुल्मनुत् ।। मिश्र-युकप्रदेशके गोरसपुर आजिमगढ़ और वाराणसी. यफयातयिषन्धा कपठप्लीहोदरेषु च । यासो कृपिनीयी जातिविशेष। इस जातिके लोग अपने प्रयाज्या मिश्रकस्नेहः योनिशुलेषु चाधिकार ॥" को भुरदार तथा ब्राह्मणशके बतलाते हैं। ठाकुर, (चरक नि०५०) मिश्र और तिवारी इन को वंशोपाधि है। | मिश्रकावण (सं०पली०) मिश्रकाना धन, अकारस्पाकार सप्यूपारीण, फान्य कुब्ज, सारस्वत और मैथिल (यनगियों: संज्ञायो कोटरकिंशुनकादीनां । पा.६.३११७ धादि ग्राहाणों में भी 'मिश्र' की उपाधि देखी जाती है। ततो पता ( वनं पुरगामिगिकासिधूपगशारिकाकोटरामभ्यः । शाण्डिल्य, कात्यायन और विश्वामित्र आदि इनके गोल पाडा४४ ) इन्द्रका उद्यान, नन्दनवन । मिश्र देपो । हैं। इन लोगों की गिन' उपाधि देख कर जातितत्त्ववेत्ता मिनकेशव (सं० पु.) एक प्राचीन कवि अनुमान करते है, कि ये लोग शायद 'मिस्त्र' देशसे इस मिश्रकेशो ( सं० स्रो०) एक अप्सराका नाम । यह देशमें थाये होंगे। मेनकाकी सम्पी थी। मित्र-कुछ प्रन्धकारों के नाम । जैसे-१ कुसुमाअलि- मिश्रचतुर्भुज (सं० पु०)एक ग्रन्थकारका नाम । टोका और दालोकरणेता । २ पाणिनोयोणादि मिश्रन (सं० पु०) मिश्रात् मिन्नजातीययोः सम्मेलनम् सूत्रोद्धाटनके रचयिता । छटा नामक मुग्धवोध टीका ज्ञात इति जनाइ । १ घाह जो दो मिन्न जातियों के मिश्रण- के प्रणेता। ४ कात्यायन श्रीमूव भाप-कर्ता। अग्नि से उत्पन्न हुमा हो। २ पथर। ' होतिन् इनको उपाधि धो। मिश्रजाति (सं. वि०) जो यो भिन्न ज्ञानियोंके मिश्रण- मिश्रक (सं० पी०) मिन कन् । १ औपर लवण, से उत्पन्न हुमा हो, वर्णसङ्का, दोगला। वारी नमस! २ यशद, जस्ता । मूलक, मूली, मिश्रण (सं० फ्लो०) मिश्र व्युर । संयोतन, जोड़ना। ४ यमेव, धकके अनुसार एक प्रकारका रांगा जिसे २ एकीकरण, दो या दो में अधिक पदाधोंको एकमें गुरा रांगा भी करने है। मिलानेकी मिया।