पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६६५

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मिल्लत-मिशमी ५५ 'संग्रामकी तरह नाना घटनाओंसे परिपूर्ण है। मिल्टन , किनारे, दफाभूम पर्वत पर तिब्बतके पार्वतीय जङ्गलमें पिउरिटन (पवित्रभाव सम्बन्धीय ) समितिके प्रतिनिधि तथा दिहिङ्ग नदोतट तक विस्तृत स्थानोंमें देमा थे। सङ्गीतशास्त्र भी मिल्टनको प्रिय न था । मूर्तियों- जाता है। के बड़े विरोधी थे। उन्होंने यूनानो देवदेवियोंको। जातितत्वानुसन्धिसु कर्नल डालटनका अनुमान है, नाना कुत्सितचिलमें चित्रित किया था। किन्तु यूनानी कि ये मिशमीगण पश्चिम-चीनकी यनानप्रदेशवासी साहित्यके रसलुब्ध अन्धकवि मिल्टनने हेलनाके अन्ध, असभ्य मियान-तजे जातिकी एक शाखा है। दोनों कवि हामरकी तरह चाक्यारम्भमें वाग्देवीकी वन्दना की है। जातिके वर्ण और आकृति में बहुत कुछ सदृशता देखी काव्य-निर्माणके विषयों उनके अनुग्रहको प्रार्थना कर जाती है । . पूर्व-कवियोंका पथानुसरण किया है। मिल्टनके काथों- ये लोग कदमें छोटे मजबूत और सुन्दर होते हैं। में जहां भारतवर्षका उल्लेख है, वहाँ मिल्टनने भारतके ये मोङ्गलीके जैसे साहसी और दलवीर्यशाली है । तल- . अतुल ऐश्वर्यका वर्णन किया है। पैराडाइज लीए ग्रन्थमें | चार, धी और शिरस्त्राण इनका प्रधान युद्धान है। मन्दन कानन एवं आदम और इभ का वर्णन अतोय | पे लोग एक स्थानमें रह कर खेती नहीं करते। हृदयप्राही है। इच्छानुसार नोमादियोंकी तरह एक स्थानसे दूसरे स्थान मिल्लत (हिं० स्रो०) १ घनिएता, मेल-जोल । २ मिलन : जाया करते हैं। वाणिज्य व्यवसायको ओर इनका विशेष सारो-1 ३ समूह, मण्डली, जत्था । ध्यान रहता है। तिप्रत आदि देश में भी जाकर ये मिल्लत ( अ० स्त्रो०) सम्प्रदाय, मजहय । लोग वाणिज्य व्यवसाय करते हैं। मिल्ला ( स० स्त्री०) विजयराजकी माता । जो सब मिशमी अङ्गारेजी सीमा पर जा कर वस गधे विजयस्याथ जननी मिलाख्या स्वामिनी जितम् ॥' हैं उनके साथ अगरेजोंका विशेष सद्भाव है। ये लोग (गजनर०८1१०७१) निरोह और शान्तिप्रिय होते हैं। अगरेज-परिवाजक जय मिशन ( अ० पु० ) १ वह व्यक्ति अथवा व्यक्तियोंका। शिमी पर्वत देखने आये; तब इन लोगोंके आचार- । समूह जो किसी विशेष कार्य या उद्देश्पसे कहीं भेजा व्यवहार देख कर बड़े संतुष्ट हुए थे। १८२७ ई०में कप्तान जाय, विशिष्ट कार्य के लिये भेजे हुए आदमो । २ उद्देश्य | चिलकाफ्स, १८३६ ई०में डा० प्रिमिथस और १८४५ . मतलध । ३ राजनीतिक उद्देश्य से भेजा हुआ दूत-मएडल। ई०में कर्नल इ, ए रोलर तथा १८८१ ई० में फरासी मिश. ४ वह संस्था, विशेषतः ईसाइयों को संस्था जो संयरित- नरो मुसौंकक फुछ खामती-सरदारों के साथ तिब्धत- रूपसे धर्म प्रचारका उद्योग करती है। ५ ऐसी संस्थाका | सीमा तक भाये थे। पर दुःखका विषय है, कि शेषोक्त • केन्द्र या कार्यालय मादि। धमयाजकको लौटते समय कहसा नामक एक साधीन मिशनरी ( पु.) १ वह ईसाई पादरी जो किसी मिशमो-सरदारने मार डाला। इस घटनासे उत्तेजित हो मिशनका सदा होता है और अनेक स्थानों में ईसाई। गवर्मेस्टने मिशमी सरदारको दण्ड देनेके लिगे एक दल धर्मका प्रचार करनेके लिये जाता है । २ ईसाइयोंका सेना भेजो। १८८५.ई० में मिशकी-सरदार सपरिवार कोई धर्म पुरोहित, पादरी। पकड़ा गरा था। मिशमो-आसाम प्रदेशको पूर्वी सीमा अवस्थित एक पहले कहा जा चुका है, कि ये लोग नाना स्थानों में .. पहाड़ी प्रदेश । यह तिब्बतके प्रान्त बाग तक विस्तृत है। घूम कर पर्वतजात मेपादि, मृगनाभि आदि वेचते हैं। यहाँको पर्वतमालाको मिशमीशैल और अधिवासीको गो महिपादि पशुको ये बड़े यतसे रक्षा करते हैं। ये मिशमी कहते हैं। लोग शिकार प्रिय और मतभोजी हैं । पहले ये लोग मिरामी-आसामको मिशमी शैलवासी आदिम जाति- बहुन अत्याचारी थे। निकटवत्तों ग्रामोंमें भा फर स्त्री विशेष । इनका वास इरावती नदीको नेमलङ्ग शाखाके | और चालकको चुरा ले जाते थे। वर्तमान समयमें