पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/६७७

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- मिस्र यहाँको वायुमें जलको भापमा पूर्णतः अभाव है।। जाते हैं। ताड़के पेड़ हर जगह दिखाई देते हैं। मिस्रमें इसीलिये मिनमें पृष्टि, तूफान यो वनपात नहीं होता। अरण्य नहीं है। यहां "पेपाइरस" नामक पेड़ उत्पन्न समुद्र के किनारेके स्थानों में कुछ वर्षा होती है। उत्तरकी होते हैं। ७००० वर्ष पहले मित्रमें इसके पल्कल या ओरसे वायु प्रवाहित होती है। शीत-ऋतु ही यहांको । छालसे कागज तैयार किया गया था। मिस्र-गापाके 'भाधो-हवाके लिये बहुत रमणीय है। बसन्तके अन्तमें । प्रायः प्राचीन अन्य इसी छाल पर लिखे गये थे। साइसून' और 'सिरको' शादि मरुभूमिमें विषाक्त वायु पहले जो यहांके राजा थे, उसकी उपाधि पदीय प्रवाहित होती है। इसी वायुके स्पर्शसे प्राणिमात्र हो । होती थी। पहले इन्हीं खदीवके अधीन एक मन्त्रो. मुहर्त भरमें काल-प्रसित होते हैं। मण्डल रहता था। इसी मन्त्रो-मण्डल द्वारा यहांका प्राणि-राज्यमें नाना तरहके वैचित्रा दिखाई देते हैं। राज्यकार्य निर्वाहित होता था। इसमें सैनिकों के विभाग- नील-मदमें दरियाई घोड़े बहुतायतसे देखे जाते हैं। से ४ और विचारकोंके विभागसे ४ मन्त्री चुने यहुत सहस्र वर्षों से ही यह प्राणी मिस्रमें पाये जाते हैं।। जाते थे। आदि राजा 'मेना' दरियाई घोड़ोंका शिकार खेलनेमें। खदीयोंके जमानेमें मिस्रकी बड़ी श्रीवृद्धि हुई है। हो मारे गये थे। इस समय नील-नदके दक्षिांश- पाश्चात्य आदर्श पर कितने ही विद्यालय स्थान स्थान के सिवा ये दूसरी जगह नहीं दिखाई देते, मिम्बमें ही पर प्रतिष्ठित हुए हैं। सुएज फेनेल (नहर ) खुदवा सबसे अधिक अहिनकुलका प्रादुर्भाव है। नीलनदके देनेसे यहां के व्यवसाय-वाणिज्यकी बड़ी उन्नति हो रही घड़ियाल पृथ्वीमें मशहूर हैं। गृहपालित सब तरहके है और पाश्चात्य सभ्यता यहांके अधिवासियोंका चित्त पशु पक्षियों के सिवा हिरण, गाल (सियार या गीदड)। अपहरण कर रही है। और सींगयाले सधैं यहांके अद्भुत जन्तु हैं। रिसो पुरातत्त्व । बहुतायतसे देखी जाती हैं। तरह तरहके कीट-पतलोंका मिस्रका पौराणिक इतिहास अधिकारसे आच्छन्न मी यहां अभाव नहीं है। . . . . . . . . है । ऐतिहासिकोंको पर्वत पर खुदे लेखोंसे पता लगा है, _ मिस्रमें धातुद्रव्यको खान नहीं है। ७००० वर्ष . कि देयोने सत्ययुगमे मिस्नमें २५६०० वर्ष तक राज्य पहले मेनाके राजत्यकालमें पत्थरके धने अस्रोका किया था। इसके बाद मिस्रो त्रेता और द्वापर युगमें प्रयोग होता था । किन्तु ये इस तरहके कौशल देववंशसम्भूत राजाओंने ६००० वर्षों तक राज्य किया से बनाये जाते थे, कि उनसे हजामत तक भी बन सकती है। इसके बाद ईसाके ५००४ (या ७००४) वर्ष पहले थो और असर चिकित्सा तक में भी काम लिया जा| मनुष्य जातिके भादि राजा मेनाने नये राज्यको स्थापना सकता था, लकड़ी काटने और अन्यान्य कामों को कौन कर राजघंशकी प्रतिष्ठा की थी। उस समयसे आज तक ७००० वर्षका धारावाहिक इतिहास मौजद है । इस. " खनिज द्रों में मर्मर पत्थर, गन्धक, सोरा और लिये मिस्रका अतीत वृत्तान्त दुघितमसाच्छन्न नहीं नमक तथा छोटे छोटे होर हो प्रधान है। है। अगरेज पहले मिस्र के प्राचीनत्यमें सन्देह करते थे। .' धान, मका ( मकई ), बाजरा, कपास, जौ, गेह, क्योंकि अगरेज-धर्मयाजक 'आसार' (Usher) ने गणना • कफड़ी, घोरे, ईख, अफीम, तम्बाकू, पटुआ और नील कर बतलाया था, कि ईसाके ४००४ वर्ष पहले पृथ्वीको यहांको प्रधान ऊपज हैं। भूमि अत्यन्त उर्वरा है। वर्षा सृष्टि हुई और २३४८ वर्ष ईसासे पूर्व जलप्लावन या न होने पर भी असंख्य नहरोंके जलसे खेतीका काम प्रलय हो गया था। उस समयके लोग आसारको होता है। मिस्रके फलोद्यान पृथ्वीमें सबसे अधिक मश- गणनाको निमूल पहने थे। किन्तु प्रलतत्वविदोंने हर हैं। नारंगी (संतरा) आदि कई तरहके निम्बू पर्वत पर लिखे विचित्र चित्रलिपियोंका ( Hierogly. अओर, अखरोट, खजूर, बादाम, फेला बहुतायतसे पाये | phies ) यथार्थ तत्त्व जान कर भी भासीरिया, रमानी,