पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/८३१

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


मुगल ७४१ 'गरी पर बैठा। उसके कमरान, आस्कुथि और इन्दाल । हिन्दू मुस्लिम एकताफा पक्षपाती था। उसके मुयोग्य नामके और भी तीन लड़के थे। लेकिन सूरवंशके पुत्र सलीमने पिताके अमीट मार्ग और उपदेनोंको उल. अरुगान सरदार शेरशाहने हुमायूं को भगा कर कुछ इन करने की इच्छा न की। यह सब है कि कमी कमी दिन भारत-साम्राज्यका शामन किया। हुमायू के रस : नरोकी हालतमें २६ पुराने मार्गसे यहा जाता था, • प्रवासकालमें अमरकोटमें सकपरका जन्म हुआ था। लेकिन यह उन राजकीय भूलो या अपराधोंको मिटाने अफवरके बाद जहांगीर, शाहजहां और औरङ्गजेब याद तथा प्रजाोके दुपा दूर करने में उदासीन नहीं रहता शाह दिल्लीके सिंहासन पर बैठे और सम्पूर्ण भारतमें था । भारत साम्राजी नूरजहान्ने भो शासनको हर मुगल-शासनका विस्तार किया। वापर, हुमाय, किया था। वर, जहांगोर, नूरजहां, शाहजहां आदि शहरों में विशेष अकपरफा लड़का जहांगीर हिरमणीके गर्भसे विवरण दिया गया है। उत्पन्न हुयी था, अतएव 'नराणां मातुलफाम' नियमके अनुसार उसे अपनी मां सजातियों के प्रति अपना. मुगमोंका सधःपतन। पनकी रक्षा करनी पड़ी थी। जहांगीरका लड़का याद पीरहदय यावर, वनविहारी हुमायू, सुप्रसिद्ध अफ- शाह शाहजहां जोधपुरके राजा उदय सिंहको लड़की वर शाह, चश्चलचित्त जहांगीर और सौभाग्यशाली शाह! वालमतीफे गर्भसे उत्पन्न हुआ था। शतपय हिन्दू रत जा आदिकी राजकीय शासन प्रणाली देख कर अनु। फे संयोगसे उसके हृदयमें भी हिन्दुओंकी स्याभाविक मान किया जाता है कि उनके शासनमें तु जातिका दया गृत्तिको संचार था। शादजाने सपने पिता और प्रभाय पूर्णरूपसे वर्तमान था। उसके साथ भारतीय पितामहके दृष्टान्त रहने हिन्दुओंके विरुद्ध चलनेका माहम हिन्द प्रजाके प्रति उन लोगोंको असीम दया, सद्भाय नहीं किया, परन् प्रजाओं को प्रसन्न रखने की और उसका और सहयता रहने के कारण दोनों जातियों में किसी विशेष ध्यान था। यद्यपि यह सौभाग्य मुखमें विमोर दो प्रकारका विजोतोय विशेप और चैपम्य नहीं दिखाई। शासनको पूर्वपत् सुगढ़ न रख सका, सोमी उसके राज्य देता था। अकयर और जहांगोरके हिन्दू-स्त्रियों के कालमें किसी भी देशी राज्यको मुगल शक्तिके विरस पाणिप्रहण करने, हिन्दुओं को सेनापति आदि उघ राज-उठनेका साहस नहीं हुआ। पर शं यह अवश्य स्वीकार कोय पद देने और हिन्दुओंको शासक बनाने के कारण कि विलासिता और भोगकामना होके कारपा यह राज दोनों जातियोम विरोध बढ़ने के बदले एक सुखमय कार्य से अलग रहा करता था। बादशाहकी शिथिलताफे समताको वृद्धि हुई थी। अकबर शाहका दिन लादी कारण ही शासन शिथिल पट गया था। मामहांको विला नामक धर्ममत उस समय दितीफे शासन में सर्वप्रिय हो । मिताने ही मुगल साम्राज्यको अयनतिका सूत्रपात किया। गया था। या हिन्द, पया मुसलमान, क्या पठान सब ____ मयूर सिंहासन, मोतीमस जिद, ताजमहल, शाह. के सय उस सनियन्ताको दृष्टिमे यरावर हैं अतएव जहानायाद नगरका निर्माण शाहजहांको विलासिताका मापसमें भेदभाव रण जातीय शत्रुता उत्पन्न करना चूडान्त दृष्टान्त है ! प्रज्ञाको खून चूस कर इस प्रकार सरासर अन्याय ईं यहो उनका उपदेश था। । अपरिमित धन प्यय कर फ.य, मसजिद और सिंदामन- सम्राट अकबरने अपनी असाधारण प्रतिभाफे बल । का बनधाना मुगल अत्याचारोंसे पीड़ित भारतको प्रमा पर इसी उत्तम मार्गमा अनुसरण किया। मारन हिन्दू तथा राजाओंको बहुत अतरा । सिंहासन शोमा मात विलासी गादमदार प्रति प्रमाफ. दोन अदाके बदले राजामोंके माथ वरायर छेडछाड़ करनेसे किमी न " ग्नि धधक उठी । उस समय भी मुगल शकिकी धाक किसो समय गायन फैल सकती है और उसमे समूचे भारतमै प्रमो दुधी, इसलिये बगायत उटने न पाई। मुगल साम्राज्यका अधःपतन हो सकता है, बुद्धिमान् | लेकिन जा मीर राजाओंक' लपमें यह माम माग पर यहाभच्छी तरह समझता था। इसीलिये 'जीपी rcl:TII. 186 .